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पुणे इमारत हादसा: सेना की टास्क फोर्स बचाव में जुटी, 23 में से 12 लोग निकाले सुरक्षित

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पुणे इमारत हादसा: सेना की टास्क फोर्स बचाव में जुटी, 23 में से 12 लोग निकाले सुरक्षित

सारांश

पुणे के मोशी में निर्माणाधीन इमारत ढहने से 23 लोगों के दबे होने की आशंका थी — अब तक 12 को सुरक्षित निकाला गया है। भारतीय सेना की दक्षिणी कमान की टास्क फोर्स NDRF के साथ मिलकर अभियान में जुटी है। महाराष्ट्र में मानसून ने अब तक 62 जानें ली हैं।

मुख्य बातें

पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ (PCMC) के मोशी कचरा डिपो परिसर में 8 जुलाई को निर्माणाधीन इमारत ढही।
करीब 23 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका; अब तक 12 लोग सुरक्षित निकाले गए।
5 लोग स्वयं निकले, 7 को बचाव दल ने रेस्क्यू किया; 1 व्यक्ति गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती।
भारतीय सेना की दक्षिणी कमान की संयुक्त टास्क फोर्स — इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, मेडिकल अधिकारी सहित — घटनास्थल पर तैनात।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने युद्धस्तर पर बचाव का निर्देश दिया।
SDMA के अनुसार, 1 जून से महाराष्ट्र में बारिश-संबंधी घटनाओं में 62 लोगों की मौत।

महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) क्षेत्र के मोशी कचरा डिपो परिसर में 8 जुलाई को निर्माणाधीन इमारत ढहने के बाद बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है। भारतीय सेना की एक विशेष टास्क फोर्स भी इस अभियान में शामिल हो गई है, जिससे मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कार्रवाई और तेज़ हुई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इमारत गिरने से करीब 23 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका थी।

बचाव अभियान की स्थिति

अब तक 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है — इनमें से 5 लोग स्वयं बाहर आने में सफल रहे, जबकि 7 लोगों को बचाव दलों ने रेस्क्यू किया। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है, जिसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शेष लापता लोगों की तलाश जारी है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अन्य एजेंसियाँ मौके पर पहुँच गईं। सेना की विशेष टीम के जुड़ने से अभियान को और बल मिला है।

सेना की तैनाती

दक्षिणी कमान (Southern Command) की ओर से एक संयुक्त टास्क फोर्स घटनास्थल पर तैनात की गई है। इस टीम में सेना के इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, मेडिकल अधिकारी और राहत दल के सदस्य शामिल हैं। सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स और रिलीफ कॉलम NDRF, पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए काम कर रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने राहत एवं पुनर्वास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीता वेद सिंघल, पिंपरी-चिंचवड़ नगर आयुक्त विजयकुमार सूर्यवंशी और पुलिस आयुक्त विनयकुमार चौबे से संपर्क कर बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश दिए। सेना को बचाव अभियान में शामिल करने का निर्णय भी उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर लिया गया।

भारी बारिश की पृष्ठभूमि

यह हादसा ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के आँकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक राज्य में बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में 62 लोगों की मौत हो चुकी है। गौरतलब है कि भारी वर्षा के दौरान निर्माण स्थलों पर संरचनात्मक जोखिम बढ़ जाता है, और यह हादसा उसी की एक गंभीर मिसाल बनकर सामने आया है।

आगे की स्थिति

बचाव अभियान अभी जारी है और मलबे में अभी भी लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बनाए रखा है। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है और राहत कार्य तब तक जारी रहेगा जब तक सभी फंसे हुए लोगों का पता नहीं चल जाता।

संपादकीय दृष्टिकोण

निवारक नहीं। जब तक निर्माण स्थलों पर मानसून-कालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल को कानूनी दाँत नहीं मिलते, ऐसे हादसे हर बरसात में दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में इमारत ढहने का हादसा कहाँ और कब हुआ?
यह हादसा 8 जुलाई को पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) क्षेत्र के मोशी कचरा डिपो परिसर में निर्माण कार्य के दौरान हुआ। निर्माणाधीन इमारत अचानक ढह गई, जिससे मलबे में कई लोगों के दबने की आशंका बनी।
कितने लोग मलबे में फंसे थे और कितने निकाले गए?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, करीब 23 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका थी। इनमें से 12 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है — 5 स्वयं बाहर आए और 7 को बचाव दल ने रेस्क्यू किया। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है।
भारतीय सेना इस बचाव अभियान में कैसे शामिल हुई?
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के निर्देश पर भारतीय सेना को बचाव अभियान में शामिल किया गया। दक्षिणी कमान (Southern Command) की ओर से एक संयुक्त टास्क फोर्स तैनात की गई, जिसमें इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, मेडिकल अधिकारी और राहत दल के सदस्य हैं।
महाराष्ट्र में इस मानसून सीजन में बारिश से कितनी मौतें हुई हैं?
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के अनुसार, 1 जून से अब तक महाराष्ट्र में बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में 62 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में पिछले कई दिनों से लगातार भारी वर्षा जारी है।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
बचाव अभियान में भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं। सभी दल आपस में समन्वय करते हुए मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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