चंडीगढ़ औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 में इमारत ढही, 5 बचाए गए; 2 अभी भी मलबे में फंसे
सारांश
मुख्य बातें
चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 में शनिवार, 4 जुलाई 2026 की शाम एक दो मंजिला पुरानी इमारत अचानक ढह गई, जिसमें बचाव दल ने मलबे से पाँच लोगों को जीवित निकाला। अधिकारियों के अनुसार, अभी भी दो लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है और उन्हें बचाने के प्रयास जारी हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) को पुलिस और अग्निशमन दल के साथ तत्काल मौके पर तैनात किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवाओं की टीमें कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुँच गईं। स्थानीय पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों के सहयोग से समन्वित बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबे के नीचे दबे जीवित लोगों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों को भी तैनात किया गया है, जबकि बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता देने के लिए घटनास्थल पर एम्बुलेंस मौजूद हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह इमारत एक कबाड़ व्यापारी के उपयोग में थी। इमारत की उम्र और रखरखाव की स्थिति की जाँच की जा रही है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
उप-मंडल पुलिस अधिकारी (दक्षिण) गुरजीत कौर ने मीडिया को बताया कि बचाव अभियान पूरे जोर-शोर से जारी है और मलबे के नीचे फंसे दोनों लोगों को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सभी संबंधित एजेंसियाँ आपस में समन्वय बनाए हुए हैं।
24 घंटे में दूसरी घटना — CCET का भी गिरा छत
गौरतलब है कि यह 24 घंटे से भी कम समय में शहर में इमारत गिरने की दूसरी घटना है। एक दिन पहले, सेक्टर 26 स्थित चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CCET) के सभागार की छत ढह गई थी। सौभाग्यवश, उस समय सभागार में कोई भी उपस्थित नहीं था।
यह सभागार एक महत्वपूर्ण सरकारी सुविधा है, जहाँ चुनावों के दौरान मतगणना होती है। इंजीनियरिंग विभाग पहले ही CCET की संरचना को असुरक्षित घोषित कर चुका था और उसे खाली रखा गया था। विस्तृत संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट के बाद विभाग ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) से संरचनात्मक स्थिरता पर आगे की सलाह माँगी थी और असुरक्षित ढाँचे को गिराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।
जर्जर इमारतों पर उठते सवाल
इलाके के निवासियों और व्यापारियों ने कई इमारतों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि इनमें से कई इमारतें दशकों पहले बनाई गई थीं और उचित रखरखाव या नियमित संरचनात्मक निरीक्षण के बिना आज भी उपयोग में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में पुरानी इमारतों की सुरक्षा जाँच को लेकर बहस तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
फिलहाल NDRF का बचाव अभियान जारी है। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह औद्योगिक क्षेत्र की अन्य पुरानी इमारतों का भी संरचनात्मक सर्वेक्षण कराएगा। दोनों घटनाओं की पृष्ठभूमि में नगर निगम पर पुरानी इमारतों के नियमित निरीक्षण को लेकर दबाव बढ़ने की संभावना है।