पुणे इमारत हादसा: मोशी में तीन मंजिला इमारत गिरी, 1 की मौत, 9 मजदूर सुरक्षित निकाले; बचाव अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ स्थित मोशी इलाके में बुधवार, 9 जुलाई को एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत के ढहने से कम से कम एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 9 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), सेना, पुलिस और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं, क्योंकि मलबे में अभी भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका बनी हुई है।
हादसे का विवरण
यह इमारत वेस्ट-टू-एनर्जी (कचरा-से-ऊर्जा) परियोजना स्थल के निकट निर्माणाधीन थी। अचानक इमारत के ढहने से वहाँ काम कर रहे कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (PCMC) की आपदा प्रबंधन टीम, अग्निशमन दल, NDRF, सेना और पुलिस की टीमें मौके पर पहुँचीं।
बचाव दलों को शुरुआत में 17 लोगों की सूची मिली थी, जिनके मलबे में फंसे होने की आशंका थी। पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के फायर ऑफिसर दिलीप गायकवाड़ ने बताया कि रात तक इनमें से 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि शेष की तलाश अभी भी जारी है।
सुरक्षित निकाले गए लोग
मलबे से सुरक्षित निकाले गए लोगों में विजय सपकाल, दादासाहेब आरडे, रणवीर सिंह, सोमनाथ शेलके, महेश राऊत, रामप्रताप चव्हाण, शुभम पाटील, सचिन दाबडगव और सुजाता शिंदे शामिल हैं। मलबे से निकाले गए मृतक के शव को आगे की प्रक्रिया के लिए वाईसीएम अस्पताल भेजा गया है।
बचाव अभियान में चुनौतियाँ
फायर ऑफिसर दिलीप गायकवाड़ के अनुसार, राहत कार्य में सबसे बड़ी चुनौती मलबे की स्थिति है। इमारत गिरने से बीम और स्लैब टूट गए हैं, जिससे अंदर जाने के लिए बेहद कम जगह बची है। कई स्थानों पर जवानों को रेंगकर अंदर जाना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, कचरे से प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली गैसें भी बचाव कार्य में बाधा बन रही हैं, जिसके चलते टीमों को सुरक्षा उपकरणों के साथ काम करना पड़ रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घटनास्थल पर किसी विशेष गैस सिलेंडर या गैस भंडारण की जानकारी नहीं है, किंतु कचरे के कारण बनने वाली गैसें चिंता का विषय बनी हुई हैं।
बचाव की रणनीति
बचाव दलों ने सबसे पहले उस हिस्से में अभियान शुरू किया जहाँ कैंटीन थी और जहाँ कुछ लोगों के फंसे होने की जानकारी मिली थी। स्लैब काटकर रास्ता बनाया गया और जवानों को अंदर भेजा गया। जिन लोगों ने आवाज़ या हरकत से प्रतिक्रिया दी, उन्हें एक-एक करके सुरक्षित बाहर निकाला गया। जिनकी ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है, उनकी तलाश लगातार जारी है।
बचाव में लगी एजेंसियाँ
इस अभियान में NDRF, भारतीय सेना, पुलिस और PCMC की आपदा प्रबंधन टीम के जवान समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक मलबे में फंसे सभी लोगों का पता नहीं चल जाता, राहत कार्य बंद नहीं किया जाएगा।
यह हादसा ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मोशी इमारत हादसे की जाँच और हादसे के कारणों की पड़ताल अभी बाकी है।