बांग्लादेश में खसरे के संदिग्ध मामले 1 लाख पार, मार्च-जून 2026 में 6,258 बच्चों की मौत
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों के बीच खसरा (मीजल्स) और अन्य संक्रामक बीमारियों का संकट गहराता जा रहा है। द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 से 30 जून 2026 के बीच देश में खसरे के संदिग्ध मामलों की संख्या 1,01,077 तक पहुँच गई, जबकि इस अवधि में 6,258 बच्चों की मौत इस बीमारी से जुड़ी बताई गई है। कुपोषण, कमज़ोर टीकाकरण व्यवस्था और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार बिगड़ती स्थिति ने इस संकट को और विकराल बना दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के मुताबिक, खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जिसकी संक्रमण-फैलाने की क्षमता कोरोना वायरस से भी अधिक मानी जाती है। कुपोषित शिशु और छोटे बच्चे इसके सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कमज़ोर होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खसरा एक बार फिर बांग्लादेश के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है।
इसके साथ ही, निमोनिया भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में हर साल पाँच वर्ष से कम उम्र के लगभग 24,000 बच्चों की मौत निमोनिया के कारण होती है — यानी प्रतिदिन औसतन 60 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आकर जान गँवाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कुपोषित बच्चों में खसरा और निमोनिया से गंभीर जटिलताओं और मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
टीकाकरण कवरेज में गिरावट
रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश में बच्चों के टीकाकरण का दायरा लगातार सिकुड़ रहा है। 12 से 23 महीने के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 2019 में 83.9 प्रतिशत था, जो 2023 में घटकर 81.6 प्रतिशत रह गया। शहरी क्षेत्रों में यह कवरेज केवल 79 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 84.6 प्रतिशत बच्चों को पूरा टीकाकरण मिल पा रहा है।
यद्यपि जन्म के समय बीसीजी टीके की कवरेज 98 प्रतिशत से अधिक है, लेकिन 15 महीने की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते बड़ी संख्या में बच्चे टीकाकरण का पूरा कोर्स पूरा नहीं कर पाते। विशेष रूप से खसरा-रूबेला (एमआर-2) की दूसरी खुराक छूटने के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों ने टीकाकरण कार्ड, रजिस्टर और टीकों की उपलब्धता में कमी की शिकायत भी की है।
कुपोषण और स्तनपान की कम दरें
रिपोर्ट के अनुसार, देश में केवल 56 प्रतिशत शिशुओं को ही जन्म के बाद पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध मिल पाता है। किशोरावस्था में मातृत्व, पर्याप्त मातृत्व अवकाश का अभाव, कामकाजी महिलाओं के लिए स्तनपान की सुविधाओं की कमी, जागरूकता की कमी और फॉर्मूला दूध की आसान उपलब्धता को इसके प्रमुख कारणों में गिना गया है।
इसके अलावा, बच्चों के भोजन में आयरन, विटामिन ए, विटामिन डी और जिंक जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी भी गंभीर समस्या बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाँच साल से कम उम्र के 43.6 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं, जिनमें दो वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या सबसे अधिक है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पोषण, टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल और ठोस सुधार नहीं किए गए, तो आने वाले समय में बच्चों के स्वास्थ्य पर यह संकट और गहरा सकता है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश पहले से ही आर्थिक दबाव और स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरियों से जूझ रहा है।
आगे की राह
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि टीकाकरण कार्यक्रम को मज़बूत करना, पोषण संबंधी हस्तक्षेप बढ़ाना और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना — ये तीनों मोर्चे एक साथ साधने होंगे। गौरतलब है कि बांग्लादेश ने अतीत में टीकाकरण अभियानों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी, लेकिन हालिया आँकड़े उस उपलब्धि के क्षरण की ओर इशारा करते हैं।