बांग्लादेश में खसरा प्रकोप: 24 घंटों में 5 और बच्चों की मौत, कुल मृतक संख्या 666 हुई
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे जैसे लक्षणों से होने वाली बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। 18 जून 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 5 और बच्चों की मौत दर्ज की गई, जिससे संदिग्ध और पुष्टि किए गए मामलों में कुल मृतक संख्या बढ़कर 666 हो गई है। ढाका स्थित स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, यह सभी मौतें संदिग्ध खसरा मामलों के अंतर्गत दर्ज हैं।
ताज़ा आंकड़े और स्थिति
डीजीएचएस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, संदिग्ध मृतकों की संख्या 573 और प्रयोगशाला में पुष्टि हुई मौतों की संख्या 93 बनी हुई है। पिछले 24 घंटों में 1,009 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 89,904 हो गई है। इसी अवधि में 139 नए कंफर्म मामले भी दर्ज किए गए, जिससे पुष्टि किए गए कुल मामले 10,773 तक पहुँच गए हैं।
15 मार्च 2026 से अब तक 74,184 बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया है, जिनमें से 70,503 मरीज उपचार के बाद घर लौट चुके हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं और स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
प्रकोप की पृष्ठभूमि
बांग्लादेश 2005 के बाद के सबसे बड़े खसरा प्रकोप से जूझ रहा है। 15 मार्च से 14 अप्रैल 2026 के बीच देश के 91% जिलों में 19,161 संदिग्ध मामले और 2,897 प्रयोगशाला-पुष्टि मामले दर्ज किए गए। इस अवधि में 166 संदिग्ध मौतें रिपोर्ट की गईं और केस फेटलिटी रेट 0.9% रहा।
मई की शुरुआत तक संदिग्ध मामलों की संख्या लगभग 55,000 और मौतों की संख्या 400 से अधिक हो चुकी थी। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही स्वास्थ्य ढाँचे पर दबाव झेल रहा है।
सबसे अधिक प्रभावित कौन
आंकड़ों के अनुसार, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कुल मामलों का 79% हिस्सा हैं। 9 महीने से कम उम्र के शिशुओं में मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है, जो इस प्रकोप की गंभीरता को और रेखांकित करता है।
टीकाकरण में गिरावट: असली वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकोप की जड़ में टीकाकरण दर में लगातार गिरावट है। बांग्लादेश की कवरेज इवैलुएशन सर्वे 2023 में पाया गया कि पहली डोज कवरेज 2019 के 88.6% से घटकर 86% रह गई, जबकि दूसरी डोज 89% से घटकर 80.7% पर आ गई। इस कमी के चलते करीब 1 करोड़ बच्चे पहली डोज से वंचित हैं, जबकि लगभग 2 करोड़ बच्चों में दूसरी डोज का अंतर बना हुआ है।
फरवरी 2026 में किए गए जेनेटिक विश्लेषण से लगातार संक्रमण के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अचानक आई आपदा नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रणालीगत कमियों का परिणाम है। आने वाले हफ्तों में टीकाकरण अभियान की गति और सरकारी प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह प्रकोप कितना और फैलेगा।