24 सितंबर 2026
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विकसित भारत 2047: सीईए नागेश्वरन बोले — विनिर्माण, विदेशी निवेश और एआई कौशल हैं तीन स्तंभ

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विकसित भारत 2047: सीईए नागेश्वरन बोले — विनिर्माण, विदेशी निवेश और एआई कौशल हैं तीन स्तंभ

सारांश

विकसित भारत 2047 का सपना सिर्फ लक्ष्य नहीं, एक कठिन परीक्षा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने मुंबई में साफ़ कहा — विनिर्माण, विदेशी निवेश और एआई कौशल, ये तीनों एक साथ चाहिए। माल व्यापार घाटा GDP के 3.5–4% पर बना हुआ है, और चीन की प्रतिस्पर्धा दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।

मुख्य बातें

अनंत नागेश्वरन ने 24 सितंबर 2026 को 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव , मुंबई में विकसित भारत 2047 के लिए विनिर्माण, विदेशी निवेश और एआई कौशल को अनिवार्य बताया।
तेल और सोने को छोड़कर भारत का माल व्यापार घाटा अभी भी जीडीपी के 3.5–4% के बीच है।
नागेश्वरन ने कहा — विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में से किसी एक को नहीं, दोनों का समानांतर विस्तार ज़रूरी है।
विदेशी निवेश के लिए कर निश्चितता, सरल नियामकीय ढाँचा, निवेशक सुरक्षा और कुशल कार्यबल को प्रमुख शर्तें बताया।
आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आयात प्रतिस्थापन नहीं — वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही ज़रूरी।
सप्लाई चेन की कमज़ोर कड़ियों की पहचान और रणनीतिक भंडार विकसित करने पर ज़ोर।

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने 24 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए देश को तीन मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा — विनिर्माण आधार को सुदृढ़ करना, अधिक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश खींचना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अर्थव्यवस्था के लिए कार्यबल को तैयार करना। मुंबई में आयोजित 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2026 में दिए गए अपने संबोधन में उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और चीन की विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को भारत के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियाँ बताया।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा

नागेश्वरन ने रेखांकित किया कि भारत की आर्थिक प्रगति ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब दुनिया एक साथ कई संकटों से जूझ रही है — भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन का बढ़ता रणनीतिक दुरुपयोग, जलवायु अनिश्चितताएँ और चीन के विनिर्माण क्षेत्र से कड़ी प्रतिस्पर्धा। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को अपनी पारंपरिक कार्यप्रणालियों में बदलाव लाना होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन सीमा तनाव और अमेरिका-चीन व्यापार विवाद के बीच वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का पुनर्गठन तेज़ हुआ है, और 'चाइना प्लस वन' रणनीति के तहत भारत के पास एक ऐतिहासिक अवसर है।

विनिर्माण बनाम सेवाएँ — दोनों एक साथ ज़रूरी

सीईए ने स्पष्ट किया कि भारत के सामने विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में से किसी एक को चुनने का सवाल नहीं है। उनके अनुसार टिकाऊ और व्यापक आर्थिक विकास के लिए दोनों क्षेत्रों का समानांतर विस्तार अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि तेल और सोने को छोड़कर भारत का माल व्यापार घाटा (गुड्स ट्रेड डेफिसिट) अभी भी जीडीपी के लगभग 3.5 से 4 प्रतिशत के बीच बना हुआ है, जो घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मज़बूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

गौरतलब है कि जीडीपी में विनिर्माण की हिस्सेदारी वर्षों से 17 प्रतिशत के आसपास अटकी है, जबकि लक्ष्य 25 प्रतिशत का है। नागेश्वरन ने चेतावनी दी कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आयात प्रतिस्थापन नहीं होना चाहिए — घरेलू उत्पादन के साथ-साथ वैश्विक बाज़ारों में प्रतिस्पर्धी निर्यात क्षमता विकसित करना भी उतना ही ज़रूरी है।

विदेशी निवेश के लिए नीतिगत ढाँचा मज़बूत करना होगा

नागेश्वरन ने कहा कि वैश्विक निवेश आकर्षित करने में भारत को विकसित अर्थव्यवस्थाओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना है। इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर नीतिगत ढाँचे को सुदृढ़ करना अनिवार्य है। उन्होंने विदेशी निवेश के लिए चार प्रमुख कारक गिनाए — कर व्यवस्था में निश्चितता, सरल नियामकीय वातावरण, निवेशकों की बेहतर सुरक्षा और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता

सप्लाई चेन लचीलापन और रणनीतिक भंडार

सीईए ने आवश्यक वस्तुओं के लिए रणनीतिक भंडार विकसित करने और उन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण पुर्जों एवं घटकों के घरेलू उत्पादन पर ज़ोर दिया, जो वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने पर गंभीर समस्या बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि केवल बड़े औद्योगिक संयंत्र स्थापित करने से आर्थिक मज़बूती नहीं आती — नीति निर्माताओं और उद्योग जगत को सप्लाई चेन की कमज़ोर कड़ियों की पहचान करनी होगी और संभावित झटकों से निपटने की तैयारी पहले से करनी होगी।

यह संदेश कोविड-19 के दौरान सेमीकंडक्टर और दवा कच्चे माल की वैश्विक किल्लत के सबक की याद दिलाता है, जब भारत समेत कई देशों को आपूर्ति शृंखला की नाज़ुकता का अहसास हुआ था।

एआई कौशल और भविष्य का कार्यबल

नागेश्वरन ने एआई-आधारित भविष्य के लिए भारत के विशाल युवा कार्यबल को पुनः प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका मानना है कि तकनीकी बदलावों के साथ कदमताल करने वाला कुशल कार्यबल ही भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रख सकता है। आने वाले वर्षों में भारत की नीति और उद्योग की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि विनिर्माण, निवेश और एआई कौशल के इन तीनों स्तंभों पर कार्यान्वयन कितनी तेज़ी से आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा सवाल अनुत्तरित रहता है — जब जीडीपी में विनिर्माण की हिस्सेदारी एक दशक से 17% पर अटकी है और लक्ष्य 25% का है, तो इस बार अलग क्या होगा? भू-राजनीतिक अवसर की खिड़की खुली है, 'चाइना प्लस वन' की रणनीति भारत के पक्ष में है, फिर भी नीति ढाँचे की जटिलता और राज्यों के असमान कार्यान्वयन की पुरानी समस्या बनी हुई है। एआई कौशल की बात सही दिशा में है, लेकिन बिना मापने योग्य प्रशिक्षण लक्ष्यों और संस्थागत क्षमता निर्माण के यह भी एक और भाषण बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित भारत 2047 के लिए सीईए नागेश्वरन ने कौन-से तीन प्रमुख क्षेत्र बताए?
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने विनिर्माण आधार को मज़बूत करना, अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करना और एआई-आधारित भविष्य के लिए कार्यबल तैयार करना — इन तीनों को 2047 के विकसित भारत लक्ष्य के लिए अनिवार्य बताया। यह बयान 24 सितंबर 2026 को मुंबई में 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में आया।
भारत का माल व्यापार घाटा अभी कितना है?
सीईए नागेश्वरन के अनुसार, तेल और सोने को छोड़कर भारत का माल व्यापार घाटा (गुड्स ट्रेड डेफिसिट) अभी भी जीडीपी के लगभग 3.5 से 4 प्रतिशत के बीच बना हुआ है। यह आँकड़ा घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को और मज़बूत करने की ज़रूरत को दर्शाता है।
क्या भारत को विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में से कोई एक चुनना होगा?
नहीं। नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि भारत के सामने विनिर्माण और सेवाओं में से किसी एक को चुनने का सवाल नहीं है — टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए दोनों क्षेत्रों का समानांतर विस्तार ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आयात प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा विकसित करना भी है।
विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए भारत को क्या करना होगा?
नागेश्वरन के अनुसार कर व्यवस्था में निश्चितता, सरल नियामकीय वातावरण, निवेशकों की बेहतर सुरक्षा और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता — ये चार कारक विदेशी निवेश के लिए सबसे ज़रूरी हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर नीतिगत ढाँचे को मज़बूत करने की ज़रूरत बताई।
सप्लाई चेन लचीलेपन पर सीईए ने क्या कहा?
नागेश्वरन ने कहा कि केवल बड़े औद्योगिक संयंत्र स्थापित करने से आर्थिक मज़बूती नहीं आती। नीति निर्माताओं और उद्योग जगत को सप्लाई चेन की कमज़ोर कड़ियों की पहचान करनी होगी, आवश्यक वस्तुओं के लिए रणनीतिक भंडार विकसित करने होंगे और छोटे लेकिन महत्वपूर्ण घटकों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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