26 जुलाई 2026
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विकसित भारत 2047: दिल्ली स्पीकर विजेंद्र गुप्ता बोले — जागरूक समाज और विधायक ही असली नींव

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विकसित भारत 2047: दिल्ली स्पीकर विजेंद्र गुप्ता बोले — जागरूक समाज और विधायक ही असली नींव

सारांश

दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने चंडीगढ़ में CPA सम्मेलन में दो-टूक कहा — विकसित भारत 2047 का सपना तभी पूरा होगा जब नागरिक सतर्क रहें और विधायिकाएँ ईमानदारी व दूरदर्शिता से काम करें। AI, जलवायु परिवर्तन और साइबर खतरों से निपटने के लिए विधायी सुधार अब जरूरी है।

मुख्य बातें

दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने 9 जून को चंडीगढ़ में CPA इंडिया रीजन जोन-II कॉन्फ्रेंस के प्लेनरी सेशन-II को संबोधित किया।
विकसित भारत 2047 की सफलता के लिए जागरूक नागरिक समाज और जिम्मेदार विधायिका का तालमेल अनिवार्य बताया।
भविष्य की प्रमुख चुनौतियों में AI , जलवायु परिवर्तन , साइबर सुरक्षा , शहरीकरण और युवाओं के कौशल विकास को गिनाया।
नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) जैसी पहलों को पारदर्शी विधायिका के उदाहरण के रूप में पेश किया।
चेतावनी दी कि डिजिटल उपकरण 'इंसानी जवाबदेही और संसदीय विचार-विमर्श की भावना' की जगह नहीं ले सकते।

दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार, 9 जून को चंडीगढ़ में स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को साकार करने के लिए एक जागरूक नागरिक समाज और जिम्मेदार विधायिका — दोनों का तालमेल अनिवार्य है। उनका यह संबोधन हरियाणा विधानसभा में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीजन जोन-II कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन प्लेनरी सेशन-II में दिया गया।

मुख्य संदेश: लोकतंत्र सिर्फ चुनावों से नहीं पनपता

गुप्ता ने कहा कि यदि नागरिक लोकतांत्रिक सतर्कता बरतते हैं, तो विधायकों की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें सही दिशा दें। उनके शब्दों में, 'अगर समाज उम्मीद जगाता है तो संस्थानों को उन उम्मीदों को नतीजों में बदलना चाहिए।' उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र तब फलता-फूलता है जब नागरिक सक्रिय रूप से गलत सूचनाओं का मुकाबला करते हैं, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं और अपने संवैधानिक अधिकारों तथा कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहते हैं।

भारत की उपलब्धियाँ और आत्मविश्वास

स्पीकर ने रेखांकित किया कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और इस महत्वपूर्ण यात्रा पर पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, स्पेस टेक्नोलॉजी और पब्लिक सर्विस डिलीवरी में देश की क्रांतिकारी उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी सराहा कि अभूतपूर्व सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के बावजूद भारत अपने लोकतांत्रिक संस्थानों की पवित्रता और मजबूती को बनाए रखने में सक्षम रहा है।

भविष्य की चुनौतियाँ: विधायी दूरदर्शिता जरूरी

अगले दो दशकों की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने कहा कि 21वीं सदी की विधायिकाओं को कई मोर्चों पर एक साथ तैयार रहना होगा। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती तकनीकों का तेज़ी से बढ़ता प्रभाव, जलवायु परिवर्तन का कृषि और जल संसाधनों पर गंभीर असर, बढ़ते साइबर सुरक्षा खतरे, तेज़ शहरीकरण से बुनियादी ढाँचे पर दबाव और युवा आबादी को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए कुशल बनाना शामिल हैं।

संस्थागत सुधार और तकनीकी नवाचार

गुप्ता ने व्यापक संस्थागत सुधार का आह्वान करते हुए कहा कि 'कानून बनाने वाली संस्थाएं अतीत के तरीकों का इस्तेमाल करके भविष्य की चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकतीं।' उन्होंने नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) जैसी पहलों और दिल्ली विधानसभा के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि तकनीकी नवाचार किस तरह नागरिक-केंद्रित और पारदर्शी विधायी संस्थाएँ बना सकता है। साथ ही उन्होंने सावधान किया कि डिजिटल उपकरण और डेटा गवर्नेंस में सहायक हो सकते हैं, लेकिन वे 'समझदारी, इंसानी जवाबदेही और संसदीय लोकतंत्र की मुख्य विचार-विमर्श वाली भावना' की जगह कभी नहीं ले सकते।

आगे की राह

विजेंद्र गुप्ता का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब देशभर में विधायी संस्थाओं की प्रासंगिकता और दक्षता पर बहस तेज़ है। उनका स्पष्ट संदेश था कि विकसित भारत 2047 की सफलता किसी एक नीति या योजना पर नहीं, बल्कि नागरिक जागरूकता और संस्थागत ईमानदारी के स्थायी तालमेल पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'जागरूक समाज' और 'जिम्मेदार विधायिका' की परिभाषा कौन तय करेगा और उसे मापेगा कौन। NeVA जैसी तकनीकी पहलें प्रक्रिया को डिजिटल बनाती हैं, पर जवाबदेही का ढाँचा अभी भी कमज़ोर है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य विधानसभाओं में सत्र की अवधि और बहस की गुणवत्ता दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। बिना ठोस संस्थागत सुधार और स्वतंत्र निगरानी तंत्र के, ये विचार प्रेरक भाषणों तक सीमित रह सकते हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित भारत 2047 क्या है और इसमें विधायकों की भूमिका क्यों अहम है?
विकसित भारत 2047 भारत सरकार का वह लक्ष्य है जिसके तहत देश को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है। दिल्ली स्पीकर विजेंद्र गुप्ता के अनुसार, इस लक्ष्य की अंतिम सफलता जागरूक नागरिक समाज और ईमानदार विधायिका के तालमेल पर निर्भर करती है।
CPA इंडिया रीजन जोन-II कॉन्फ्रेंस कहाँ और कब हुई?
यह सम्मेलन 9 जून को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा विधानसभा में आयोजित हुआ। यह कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) के इंडिया रीजन जोन-II का दो दिवसीय आयोजन था।
विजेंद्र गुप्ता ने 21वीं सदी की विधायिकाओं के सामने कौन-सी चुनौतियाँ गिनाईं?
उन्होंने पाँच प्रमुख चुनौतियाँ बताईं — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों का प्रभाव, जलवायु परिवर्तन का कृषि व जल संसाधनों पर असर, साइबर सुरक्षा खतरे, तेज़ शहरीकरण से बुनियादी ढाँचे पर दबाव और युवाओं को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए कुशल बनाना।
नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) क्या है और इसका उल्लेख क्यों किया गया?
NeVA केंद्र सरकार की एक डिजिटल पहल है जो विधानसभाओं को पेपरलेस और पारदर्शी बनाने के लिए बनाई गई है। गुप्ता ने इसे तकनीकी नवाचार के उदाहरण के रूप में पेश किया, साथ ही यह भी कहा कि ये उपकरण इंसानी जवाबदेही की जगह नहीं ले सकते।
क्या डिजिटल तकनीक संसदीय लोकतंत्र की जगह ले सकती है?
विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि नहीं। उनके अनुसार डिजिटल टूल्स और डेटा गवर्नेंस में सहायक हो सकते हैं, लेकिन वे 'समझदारी, इंसानी जवाबदेही और संसदीय विचार-विमर्श की मूल भावना' की जगह कभी नहीं ले सकते।
राष्ट्र प्रेस
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