चरित्र निर्माण पर स्पीकर विजेंद्र गुप्ता का युवाओं को संदेश — 'डिग्री नहीं, चरित्र बनाएगा विकसित भारत'
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने 25 अप्रैल को पीजीडीएवी कॉलेज (मॉर्निंग) के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित किया।
- 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर देश की जिम्मेदारी आज के युवाओं पर होगी — विकसित भारत के लिए चरित्र और शिक्षा दोनों अनिवार्य।
- ऑपरेशन सिंदूर, चंद्रयान की सफलता और UPI क्रांति को स्पीकर ने भारतीय चरित्र और समर्पण का प्रमाण बताया।
- स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों को उद्धृत करते हुए युवाओं को मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े रहने की सलाह दी।
- स्पीकर ने कहा — 'असफलता से नहीं, बेईमानी से डरो' — जड़ें गहरी रखो और सपने ऊंचे देखो।
- समारोह में मेधावी छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
पीजीडीएवी कॉलेज में स्पीकर का ऐतिहासिक संबोधन
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज (मॉर्निंग) के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में युवाओं को एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 2047 में जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश की बागडोर आज की पीढ़ी के हाथों में होगी। इसलिए सिर्फ डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं — एक 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए शिक्षा के साथ-साथ मजबूत चरित्र भी अनिवार्य है।
शिक्षा और चरित्र — दोनों की समान जरूरत
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि 'शिक्षा रास्ता दिखाती है, लेकिन चरित्र उस रास्ते पर टिके रहने की शक्ति देता है।' उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस विचार को उद्धृत किया जिसमें कहा गया है कि शिक्षा वह पूर्णता है जो पहले से ही हर मनुष्य के भीतर विद्यमान है। उनके अनुसार, सच्ची शिक्षा वही है जो इंसान के भीतर के 'इंसान' को जगाए।
उन्होंने पीजीडीएवी कॉलेज को केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि महर्षि दयानंद सरस्वती की विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। उनका कहना था कि महर्षि दयानंद की मूल्यों की ओर लौटने की पुकार आज भी पीढ़ियों का मार्गदर्शन कर रही है।
भारत की वैश्विक उपलब्धियां — चरित्र का प्रमाण
स्पीकर ने भारत की हालिया वैश्विक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बना है। इसके अलावा, UPI के रूप में भारत ने डिजिटल क्रांति में पूरी दुनिया को नई राह दिखाई है, जो आज एक वैश्विक मॉडल बन चुका है।
उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए एक 'नए भारत' ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा। उनके अनुसार ये सभी उपलब्धियां वैज्ञानिकों की ईमानदारी, सैनिकों के अनुशासन और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों के समर्पण — यानी चरित्र — की देन हैं।
युवाओं को प्रेरणा — जड़ें गहरी रखो, सपने ऊंचे देखो
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने छात्रों को एक महत्वपूर्ण जीवन-दर्शन दिया — 'जो पेड़ जितना ऊंचा बढ़ता है, उसकी जड़ें उतनी ही गहरी होनी चाहिए।' उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे असफलता से नहीं, बल्कि बेईमानी से डरें। उनका कहना था कि असफलता जीवन में कुछ सिखाती है, जबकि बेईमानी जीवन भर साथ रहती है।
उन्होंने मातृभाषा, संस्कृति और देश के प्रति गर्व की भावना रखने पर भी बल दिया। 'दयानंद एंग्लो वैदिक' यानी DAV के विचार को उन्होंने आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम बताया। उनके अनुसार, आज की पीढ़ी के पास तकनीकी प्रगति और सभ्यता का ज्ञान — दोनों उपलब्ध हैं, और इन्हें साथ लेकर चलने से ही राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
मेधावी छात्रों का सम्मान
समारोह में शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को पुरस्कृत किया गया। स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए उन्हें राष्ट्र-निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
यह समारोह ऐसे समय में हुआ जब देशभर में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास तेज हो रहे हैं। आने वाले महीनों में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में इसी तरह के प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है, जो युवाओं को राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ने में सहायक होंगे।