नीति आयोग में बड़ा बदलाव: अमित शाह ने प्रो. गोबर्धन दास को दी हार्दिक बधाई, बोले — राष्ट्र निर्माण में देंगे अपार योगदान

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नीति आयोग में बड़ा बदलाव: अमित शाह ने प्रो. गोबर्धन दास को दी हार्दिक बधाई, बोले — राष्ट्र निर्माण में देंगे अपार योगदान

सारांश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक प्रो. गोबर्धन दास को नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य बनने पर बधाई दी। दास पश्चिम बंगाल के दलित किसान परिवार से आने वाले अंतरराष्ट्रीय ख्याति के इम्यूनोलॉजिस्ट हैं, जिनका टीबी शोध विश्व में प्रसिद्ध है।

Key Takeaways

  • गृह मंत्री अमित शाह ने 25 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रो. गोबर्धन दास को नीति आयोग सदस्य बनने पर बधाई दी।
  • कोलकाता में शनिवार को अमित शाह और प्रो. दास के बीच व्यक्तिगत मुलाकात हुई।
  • प्रो. गोबर्धन दास आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक और तीन दशकों के अनुभवी इम्यूनोलॉजिस्ट हैं।
  • अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष और गोबर्धन दास को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया — दोनों पश्चिम बंगाल से।
  • प्रो. दास पश्चिम बंगाल के दलित किसान परिवार से आते हैं और उनकी नियुक्ति को सामाजिक प्रतिनिधित्व की दृष्टि से ऐतिहासिक माना जा रहा है।
  • टीबी रोगजनन पर उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

नीति आयोग में ऐतिहासिक नियुक्ति

नई दिल्ली, 25 अप्रैलकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक और प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर गोबर्धन दास को नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई दी है। शाह ने कहा कि प्रोफेसर दास अपनी वैज्ञानिक दक्षता और अनुभव के बल पर राष्ट्र निर्माण में अपार योगदान देंगे।

अमित शाह का संदेश — कोलकाता में हुई मुलाकात

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में लिखा कि शनिवार को कोलकाता में प्रोफेसर गोबर्धन दास से मुलाकात कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि एक बंगाली विद्वान के रूप में प्रोफेसर दास ने आणविक विज्ञान में अपने अतुलनीय योगदान से भारत और बंगाल दोनों को गौरवान्वित किया है।

शाह ने आगे कहा कि नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में प्रोफेसर दास की नियुक्ति से देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और गहराई मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दास राष्ट्र निर्माण में अपना अपार योगदान देंगे।

कौन हैं प्रोफेसर गोबर्धन दास?

डॉ. गोबर्धन दास भारत के जाने-माने इम्यूनोलॉजिस्ट (प्रतिरक्षा विज्ञानी) हैं। उन्होंने लगभग तीन दशकों के वैज्ञानिक करियर में प्रतिरक्षा विज्ञान, संक्रामक रोगों और कोशिका जीव विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल की है।

विशेष रूप से तपेदिक (टीबी) के रोगजनन पर उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता मिली है। वे वर्तमान में आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक पद पर कार्यरत हैं।

नीति आयोग के ढांचे में बड़ा फेरबदल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने हाल ही में नीति आयोग की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किए। इस पुनर्गठन के तहत दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट से भाजपा विधायक और प्रख्यात अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

वहीं, प्रोफेसर गोबर्धन दास को इस प्रतिष्ठित संस्था का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब सरकार नीति आयोग को अधिक विशेषज्ञता-आधारित और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में काम कर रही है।

गोबर्धन दास की भावुक प्रतिक्रिया — दलित किसान परिवार से नीति आयोग तक का सफर

प्रोफेसर गोबर्धन दास ने 'एक्स' पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस दिन को अपने जीवन का सबसे अहम दिन बताया।

दास ने कहा कि वे पश्चिम बंगाल के एक सुदूर गांव के दलित वर्ग के साधारण किसान परिवार से आते हैं। बचपन से मिट्टी की खुशबू, मेहनत का मोल और संघर्ष की वास्तविकता उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि यह पद उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उन जैसे लाखों आम लोगों के सपनों और उम्मीदों का प्रतिबिंब है।

यह नियुक्ति इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि नीति आयोग में अब विज्ञान और स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में एक सशक्त आवाज़ जुड़ी है। टीबी उन्मूलन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जैव-चिकित्सा अनुसंधान जैसे मुद्दों पर प्रोफेसर दास का अनुभव नीतिगत निर्णयों को नई दिशा दे सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना रोचक होगा कि वे नीति आयोग की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य-विज्ञान नीतियों को किस रूप में प्रभावित करते हैं।

Point of View

बल्कि मोदी सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें नीति-निर्माण को विशेषज्ञता-आधारित बनाने की कोशिश हो रही है। एक दलित किसान परिवार से उठकर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक बनना और फिर नीति आयोग तक पहुंचना — यह प्रतीकात्मक रूप से भी शक्तिशाली संदेश है। हालांकि, असली परीक्षा यह होगी कि क्या नीति आयोग में उनकी वैज्ञानिक विशेषज्ञता — विशेषकर टीबी और संक्रामक रोग नीति में — जमीनी बदलाव ला पाती है, या यह नियुक्ति केवल प्रतीकात्मक विविधता तक सीमित रहती है। बंगाल से दो प्रमुख नियुक्तियां (लाहिड़ी और दास) एक साथ होना राजनीतिक दृष्टि से भी उल्लेखनीय है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

प्रोफेसर गोबर्धन दास को नीति आयोग का सदस्य क्यों बनाया गया?
प्रोफेसर गोबर्धन दास को उनकी तीन दशकों की वैज्ञानिक विशेषज्ञता — विशेषकर प्रतिरक्षा विज्ञान, टीबी रोगजनन और कोशिका जीव विज्ञान में — के आधार पर नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया। मोदी सरकार नीति आयोग को अधिक विशेषज्ञता-आधारित बनाने की दिशा में काम कर रही है।
अमित शाह ने गोबर्धन दास को बधाई कहां और कैसे दी?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बधाई दी। उन्होंने बताया कि शनिवार को कोलकाता में प्रोफेसर दास से उनकी व्यक्तिगत मुलाकात भी हुई।
नीति आयोग में और कौन-कौन सी नई नियुक्तियां हुई हैं?
केंद्र सरकार ने नीति आयोग के पुनर्गठन में अर्थशास्त्री और बालुरघाट से भाजपा विधायक अशोक लाहिड़ी को उपाध्यक्ष तथा प्रोफेसर गोबर्धन दास को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। दोनों ही पश्चिम बंगाल से संबंधित हैं।
प्रोफेसर गोबर्धन दास की पृष्ठभूमि क्या है?
प्रोफेसर दास पश्चिम बंगाल के एक सुदूर गांव के दलित किसान परिवार से आते हैं। वे आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक हैं और टीबी रोग पर उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।
नीति आयोग में वैज्ञानिक की नियुक्ति का क्या महत्व है?
नीति आयोग में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक की नियुक्ति से स्वास्थ्य नीति, टीबी उन्मूलन और जैव-चिकित्सा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बल मिलेगा। यह भारत की वैज्ञानिक कूटनीति और स्वास्थ्य लक्ष्यों के लिए भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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