बड़ा फैसला: BWF ने 3x15 पॉइंट सिस्टम को मंजूरी दी, जनवरी 2027 से बदलेगा बैडमिंटन
सारांश
Key Takeaways
- BWF ने 25 अप्रैल 2025 को 3x15 पॉइंट सिस्टम को आधिकारिक मंजूरी दी।
- प्रस्ताव डेनमार्क के हॉर्सेंस में 198-43 वोटों से पारित हुआ — दो-तिहाई बहुमत से कहीं अधिक।
- नया फॉर्मेट जनवरी 2027 से लागू होगा और पुराने 3x21 सिस्टम की जगह लेगा।
- विश्व नंबर-1 शि यूकी और नंबर-2 एंडर्स एंटोनसेन ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई है।
- इस सिस्टम का परीक्षण गुवाहाटी वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2024 सहित कई टूर्नामेंट्स में हो चुका है।
- 14-14 की बराबरी पर गेम 21 पॉइंट तक जा सकता है — पुरानी व्यवस्था की तरह।
नई दिल्ली। बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) ने शनिवार, 25 अप्रैल 2025 को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए बैडमिंटन के स्कोरिंग फॉर्मेट में बड़े बदलाव को हरी झंडी दे दी। जनवरी 2027 से अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में दशकों पुराने 3x21 पॉइंट सिस्टम की जगह नया 3x15 पॉइंट सिस्टम लागू होगा। यह फैसला सदस्य संघों के भारी बहुमत के समर्थन के बाद लिया गया है।
डेनमार्क में हुई बैठक में भारी बहुमत से पास हुआ प्रस्ताव
डेनमार्क के हॉर्सेंस शहर में आयोजित BWF की वार्षिक आम बैठक (AGM) में यह प्रस्ताव 198 के मुकाबले 43 वोटों से पारित हुआ। यह संख्या किसी भी संवैधानिक बदलाव के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से कहीं अधिक है, जो दर्शाती है कि वैश्विक बैडमिंटन समुदाय इस बदलाव के लिए तैयार है।
यह निर्णय BWF की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत खेल को युवा दर्शकों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्रॉडकास्टर्स के लिए अधिक आकर्षक बनाया जाना है।
नए 3x15 सिस्टम की मुख्य विशेषताएं
नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक गेम अब 15 अंकों तक खेला जाएगा और मुकाबला बेस्ट-ऑफ-थ्री के आधार पर तय होगा। हालांकि, यदि किसी गेम में स्कोर 14-14 की बराबरी पर पहुंच जाए, तो वह गेम 21 अंकों तक खिंच सकता है — ठीक उसी तरह जैसे मौजूदा सिस्टम में 20-20 पर होता है।
BWF का तर्क है कि इस बदलाव से मैच की अवधि घटेगी, खेल की गति बढ़ेगी, और प्रत्येक पॉइंट का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। इससे दर्शकों के लिए हर रैली पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक बनेगी।
एक साल से अधिक समय तक हुई परीक्षण प्रक्रिया
BWF ने यह बदलाव बिना तैयारी के नहीं किया। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ग्रेड 3 इवेंट्स और गुवाहाटी में आयोजित वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2024 में इस फॉर्मेट का व्यापक परीक्षण किया गया। यह सिस्टम BWF के 'बैडमिंटन के वैकल्पिक नियम' के तहत पहले से ही प्रयोग में था।
गुवाहाटी में हुई जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस फॉर्मेट की पहली बड़ी परीक्षा थी। उस अनुभव से मिले आंकड़ों ने AGM में प्रस्ताव को मजबूती दी।
खिलाड़ियों में बंटी राय — सितारों ने जताई चिंता
इस बदलाव को लेकर बैडमिंटन जगत में स्पष्ट मतभेद हैं। विश्व के नंबर-1 खिलाड़ी शि यूकी (Shi Yuqi) ने चिंता व्यक्त की है कि छोटा फॉर्मेट उम्रदराज और अनुभवी खिलाड़ियों को अनुचित लाभ दे सकता है, क्योंकि उन्हें लंबे मैचों में अपनी फिटनेस साबित करने की जरूरत नहीं होगी।
विश्व के नंबर-2 खिलाड़ी एंडर्स एंटोनसेन (Anders Antonsen) ने भी इसी भावना को दोहराया। उनका मानना है कि यह प्रणाली शारीरिक रूप से कम मजबूत खिलाड़ियों के पक्ष में झुकी हुई है। दूसरी ओर, उभरते और निचली रैंकिंग वाले खिलाड़ियों ने इस बदलाव का स्वागत किया है — उनका तर्क है कि इससे प्रतिस्पर्धा अधिक संतुलित होगी।
खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और करियर पर दीर्घकालिक असर
BWF ने तर्क दिया है कि छोटे मैचों से खिलाड़ियों की शारीरिक थकान कम होगी, रिकवरी टाइम बेहतर होगा और संभावित रूप से उनके करियर की अवधि भी बढ़ सकती है। यह तर्क विशेष रूप से उन खिलाड़ियों के लिए प्रासंगिक है जो टूर्नामेंट-भारी सीज़न में एकाधिक श्रेणियों (singles, doubles, mixed) में खेलते हैं।
इसके अलावा, टूर्नामेंट शेड्यूलिंग आसान होगी और टेलीविजन व OTT ब्रॉडकास्टर्स को निश्चित समय-स्लॉट में कवरेज देना सुविधाजनक होगा — जो खेल की कमर्शियल वैल्यू बढ़ाने के लिए जरूरी है।
ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि बैडमिंटन में स्कोरिंग का मौजूदा 3x21 सिस्टम खुद 2006 में लागू हुआ था, जब BWF ने पुराने 15-पॉइंट सर्विस-बेस्ड सिस्टम को बदला था। अर्थात यह पहली बार नहीं है जब BWF ने खेल के मूलभूत ढांचे में बदलाव किया हो। उस समय भी विवाद हुआ था, लेकिन अंततः खेल उस बदलाव के साथ ढल गया।
यह बदलाव उस व्यापक वैश्विक रुझान का भी हिस्सा है जिसमें खेल संगठन — चाहे क्रिकेट हो, टेनिस हो या वॉलीबॉल — अपने फॉर्मेट को छोटा और तेज बना रहे हैं ताकि Gen-Z दर्शकों का ध्यान खींचा जा सके जिनकी attention span सीमित मानी जाती है।
जनवरी 2027 से जब यह सिस्टम लागू होगा, तब दुनिया भर के बैडमिंटन प्रेमी और खिलाड़ी इसके वास्तविक प्रभाव को मैदान पर देखेंगे। तब तक BWF को उम्मीद है कि और अधिक परीक्षण इवेंट्स इस संक्रमण को सुगम बनाएंगे।