ओम बिरला: विकसित भारत के लिए जन-भागीदारी और मजबूत विधायिकाएँ अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 8 जून 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीजन जोन-दो (उत्तर क्षेत्र) सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कहा कि विकसित भारत का संकल्प तभी साकार होगा जब जन-भागीदारी को विस्तार दिया जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की विधायिकाओं की भूमिका केवल कानून-निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी उनकी जिम्मेदारी है।
सम्मेलन का उद्देश्य और संदर्भ
यह दो दिवसीय सम्मेलन विभिन्न राज्यों के विधायी प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। बिरला ने कहा कि हरियाणा नैतिक चेतना और कर्तव्यबोध की भूमि है और सभी राज्यों को सामूहिक प्रयासों के जरिये विकास की राह पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने इस सम्मेलन को विकसित भारत के संकल्प को ज़मीनी स्तर पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
विधायिकाओं की जिम्मेदारी और जनप्रतिनिधियों की भूमिका
लोकसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में विकास और बदलाव लाने का सबसे प्रभावी माध्यम होते हैं। उन्होंने कहा कि विधायिकाओं में सार्थक चर्चा, संवाद और विचार-विमर्श की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा, ताकि देश और समाज के हित में बेहतर नीतियाँ और कानून बन सकें। बिरला के अनुसार, आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह सशक्त नहीं बनाया जा सकता।
युवा शक्ति और कौशल विकास पर जोर
बिरला ने देश की युवा आबादी को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, ताकि वे राष्ट्र-निर्माण में अधिक प्रभावी और उत्पादक योगदान दे सकें। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार कौशल विकास से जुड़ी कई योजनाओं पर काम कर रही है।
वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की स्थिर शासन व्यवस्था
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान में दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता का माहौल है, लेकिन भारत मजबूत और स्थिर शासन व्यवस्था के साथ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि देश के मजबूत लोकतंत्र की शक्ति ने सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की नई दिशा तय की है और इसका लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँच रहा है।
सम्मेलन से अपेक्षाएँ
बिरला ने उम्मीद जताई कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में जन-भागीदारी बढ़ाने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने पर सार्थक विमर्श होगा। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे सामूहिक संकल्प के साथ इस दिशा में आगे बढ़ें। आने वाले दिनों में इस सम्मेलन में लिए गए निर्णय और सुझाव विधायी कार्यप्रणाली को नई दिशा देने में सहायक हो सकते हैं।