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मुंबई दही-हांडी उत्सव: श्री साई दत्ता मित्र मंडल में महिलाओं की भागीदारी, बोलीं — 'हर साल रहता है इंतजार'

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मुंबई दही-हांडी उत्सव: श्री साई दत्ता मित्र मंडल में महिलाओं की भागीदारी, बोलीं — 'हर साल रहता है इंतजार'

सारांश

मुंबई में दही-हांडी सिर्फ परंपरा नहीं — इस बार यह महिला भागीदारी का मंच बनी। श्री साई दत्ता मित्र मंडल में छह साल से हांडी फोड़ रही महिलाओं ने सशक्तिकरण का संदेश दिया, जबकि इस्कॉन चौपाटी में दो लाख भक्तों ने जन्माष्टमी मनाई।

मुख्य बातें

मुंबई के श्री साई दत्ता मित्र मंडल में 5 सितंबर को दही-हांडी उत्सव आयोजित हुआ।
महिला श्रद्धालु पिछले छह वर्षों से इस उत्सव में हांडी फोड़ने में भाग ले रही हैं।
प्रतिभागी महिलाओं ने लड़कियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
इस्कॉन चौपाटी के श्री श्री राधा गोपीनाथ मंदिर में 40 वर्षों से जन्माष्टमी मनाई जा रही है; हर साल कम से कम दो लाख भक्त दर्शन करते हैं।
गौरंग दास ने महामंत्र जप को ईश्वर के प्रति कृतज्ञता की पद्धति बताया।

मुंबई के श्री साई दत्ता मित्र मंडल में दही-हांडी उत्सव की तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस वर्ष उत्सव में महिला श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिल रही है, जो परंपरागत रूप से पुरुष-प्रधान माने जाने वाले इस आयोजन में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। 5 सितंबर को आयोजित यह उत्सव जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है।

महिलाओं की भागीदारी और उत्साह

उत्सव में शामिल एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि वे पिछले छह वर्षों से श्री साई दत्ता मित्र मंडल की हांडी फोड़ने आ रही हैं। उन्होंने कहा, 'हांडी उत्सव खत्म होते ही अगले साल के इस दिन का इंतजार शुरू हो जाता है।' यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि दही-हांडी अब केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए सामूहिक सशक्तिकरण का प्रतीक भी बन चुकी है।

महिला सशक्तिकरण का संदेश

एक अन्य महिला प्रतिभागी ने कहा कि आज लड़के और लड़कियों में कोई अंतर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अपील की कि जो परिवार अभी भी लड़कियों को आगे बढ़ने से रोकते हैं, वे अपनी सोच बदलें। 'अगर एक लड़की को कुछ करना पसंद है, तो उसका समर्थन करें और उसका मनोबल बढ़ाएँ — महिलाएँ हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं, और दही-हांडी भी इसका अपवाद नहीं है,' उन्होंने कहा।

मुंबई में जन्माष्टमी का उल्लास

इससे एक दिन पूर्व मुंबई में जन्माष्टमी बड़े धूमधाम से मनाई गई। मुंबई गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरंग दास ने बताया कि इस्कॉन चौपाटी का श्री श्री राधा गोपीनाथ मंदिर पिछले 40 वर्षों से जन्माष्टमी मना रहा है। उन्होंने कहा, 'दक्षिण मुंबई एक बेहद अहम इलाका है और हर साल जन्माष्टमी के दौरान कम से कम दो लाख भक्त दर्शन के लिए मंदिर आते हैं।'

आध्यात्मिक संदेश

गौरंग दास ने आगे कहा कि कलियुग में 'हरि नाम संकीर्तन' सबसे बड़ी आध्यात्मिक साधना मानी जाती है। उन्होंने कहा, 'जब कोई हमें एक गिलास पानी भी देता है, तो हम तुरंत धन्यवाद कहते हैं — तो जो ईश्वर हमें वायु, जल और अन्न दे रहे हैं, उन्हें धन्यवाद देना भी हमारा कर्तव्य है। महामंत्र का जप इसी धन्यवाद की पद्धति है।' इस भावना के साथ मुंबई में यह उत्सव आस्था और सामाजिक समरसता का संगम बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

' तो यह महज़ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थान पर दावेदारी का बयान है। यह भी गौरतलब है कि मुंबई जैसे महानगर में इस्कॉन चौपाटी जैसे मंदिर आस्था और सामुदायिक एकजुटता के केंद्र बने हुए हैं — दो लाख भक्तों की उपस्थिति इसकी पुष्टि करती है। उत्सव की असली ताकत उसकी समावेशिता में है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में दही-हांडी उत्सव कब और कहाँ आयोजित हुआ?
यह उत्सव 5 सितंबर को मुंबई के श्री साई दत्ता मित्र मंडल की ओर से आयोजित किया गया। दही-हांडी परंपरागत रूप से जन्माष्टमी के अगले दिन मनाई जाती है।
दही-हांडी उत्सव में महिलाओं की भागीदारी क्यों खास है?
महिला श्रद्धालु पिछले छह वर्षों से इस उत्सव में हांडी फोड़ने में भाग ले रही हैं, जो परंपरागत रूप से पुरुष-प्रधान आयोजन रहा है। प्रतिभागी महिलाओं ने कहा कि यह भागीदारी महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है।
इस्कॉन चौपाटी में जन्माष्टमी कितने वर्षों से मनाई जा रही है?
मुंबई गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरंग दास के अनुसार, इस्कॉन चौपाटी का श्री श्री राधा गोपीनाथ मंदिर पिछले 40 वर्षों से जन्माष्टमी मना रहा है। हर साल कम से कम दो लाख भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
गौरंग दास ने महामंत्र जप के बारे में क्या कहा?
गौरंग दास ने कहा कि कलियुग में 'हरि नाम संकीर्तन' सबसे बड़ी आध्यात्मिक साधना है और महामंत्र का जप ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की पद्धति है। उन्होंने कहा कि जैसे हम किसी के एक गिलास पानी देने पर धन्यवाद कहते हैं, वैसे ही ईश्वर को भी धन्यवाद देना चाहिए।
दही-हांडी उत्सव में भाग लेने वाली महिलाओं ने क्या संदेश दिया?
महिला प्रतिभागियों ने समाज से अपील की कि लड़कियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी लड़की को कुछ करना पसंद है, तो उसका समर्थन और मनोबल बढ़ाना परिवार की जिम्मेदारी है।
राष्ट्र प्रेस
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