सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्त: जिला अदालत के आदेश पर बुलडोजर, सांसद इकरा हसन को रोका गया
सारांश
मुख्य बातें
सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद को 6 सितंबर 2026 (शनिवार) को प्रशासन ने छह बुलडोजर लगाकर ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत द्वारा 2 सितंबर को मस्जिद पक्ष की अपील खारिज किए जाने के बाद की गई। भारी पुलिस बल, पीएसी और आरआरएफ के जवानों की तैनाती के बीच किसी भी व्यक्ति को मस्जिद के आसपास जाने की अनुमति नहीं दी गई।
मुख्य घटनाक्रम
नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध निर्माण करार देते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। साथ ही कब्जेदारों से ₹6.41 करोड़ की क्षतिपूर्ति वसूलने और 30 दिन का समय देने के निर्देश भी दिए गए थे। मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई को जिला अदालत में अपील दाखिल की, जिसे 2 सितंबर को खारिज कर दिया गया — और इसके चार दिन बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई।
इस विवाद की शुरुआत 10 फरवरी 2025 को हुई थी, जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जिलाधिकारी को शिकायत देकर मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत में मस्जिद परिसर में बने कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का भी आरोप लगाया गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच कराई गई और प्रशासन का दावा है कि जांच में निर्माण सरकारी जमीन पर पाया गया। इसके बाद 24 मार्च 2025 को नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दाखिल की गई।
प्रशासन का पक्ष
सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई से पहले नोटिस, सुनवाई और अपील की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी। गौरतलब है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से एक रात पहले — शुक्रवार की रात — अफवाह फैलने के बाद बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट के पास जुट गए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने हटाया।
सांसद इकरा हसन की प्रतिक्रिया
कैराना से समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर ही रोक दिया गया। पुलिस से हुई बातचीत का वीडियो सामने आया है जिसमें पुलिसकर्मी उनसे यात्रा न करने की अपील कर रहे हैं। इकरा हसन ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा, 'लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता।' उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक निर्वाचित सांसद को अपने क्षेत्र के मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना भी अपराध हो गया है।
इकरा हसन की मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन भी उनके आवास पर मौजूद रहीं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका परिवार किसी दबाव से डरने वाला नहीं है।
विपक्षी नेताओं की आपत्तियाँ
सपा एमएलसी शाहनवाज खान ने पत्रकारों से कहा कि पिछले महीने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ अदालत से स्टे मिला था और स्थिति सामान्य थी। उन्होंने कहा, 'हायर कोर्ट में चैलेंज देने के लिए फैसले में 30 दिनों के लिए राहत दी गई थी, लेकिन आज अचानक मस्जिद को शहीद किया जा रहा है।' उन्होंने यह भी बताया कि जब वे कलेक्ट्रेट पहुंचे तो दोनों दरवाजे बंद थे। बाद में जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद उन्होंने शहर की अमन-शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि जो भी होगा कानून के दायरे में होगा।
पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने भी आपत्ति जताई कि मस्जिद पक्ष हाईकोर्ट जाने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही प्रशासन ने ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया।
आगे की स्थिति
यह मामला अब उच्च न्यायालय में पहुंचने की संभावना है, क्योंकि मस्जिद पक्ष जिला अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में था। सहारनपुर में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है — खासकर तब, जब विपक्षी दल इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।