पुणे के कुडलवाड़ी में 11 अवैध निर्माण ध्वस्त, मस्जिद गिराए जाने पर मुस्लिम समुदाय में रोष
सारांश
मुख्य बातें
पुणे नगर निगम ने 10 जून को कुडलवाड़ी क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई करते हुए 11 अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया, जिनमें कुछ मंदिर और मस्जिदें भी शामिल थीं। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। विवाद तब और गहरा गया जब कुछ निवासियों ने दावा किया कि कार्रवाई न्यायालय का स्टे आदेश मिलने से पहले ही कर दी गई।
मुख्य घटनाक्रम
नगर निगम के अनुसार, कुडलवाड़ी में ध्वस्त किए गए सभी 11 निर्माण अवैध श्रेणी में आते थे। इनमें धार्मिक स्थल भी शामिल थे — कुछ मंदिर और कम से कम एक मस्जिद। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि पहले इलाके का बाज़ार तोड़ा गया और अब मस्जिद को भी ध्वस्त कर दिया गया। उनके अनुसार उन्हें अदालत से स्टे ऑर्डर मिलने वाला था, लेकिन उससे पहले ही कार्रवाई अंजाम दे दी गई।
समुदाय की प्रतिक्रिया
इमाम इरशाद यूनुस अंसारी ने कहा कि वे पिछले 26 वर्षों से इस मस्जिद से जुड़े हुए हैं और यहाँ बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग पाँच वक्त की नमाज़ अदा करते थे। उन्होंने कहा, 'मस्जिद केवल इबादत की जगह नहीं होती, बल्कि लोगों को इंसानियत और आपसी भाईचारे का संदेश भी देती है।' उन्होंने मस्जिद तोड़े जाने की कार्रवाई को पूरी तरह गलत बताया।
एक मौलाना ने बताया कि जिस भवन को ध्वस्त किया गया, वह पिछले 30 से 35 वर्षों से मौजूद था और उसी समय से वहाँ नमाज़ अदा की जा रही थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित भवन का नियमित रूप से कर (टैक्स) भी जमा किया जाता था।
आरोप और विवाद
सामाजिक कार्यकर्ता राजन नायर ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर एक खास समुदाय को निशाना बना रहा है। उनके अनुसार निर्माणों को अवैध बताकर तोड़ा जा रहा है, लेकिन इसके पीछे की ठोस वजह स्पष्ट नहीं की जा रही। मौलाना ने भी आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष से बाहरी लोगों को परेशान किया जा रहा है और उन पर क्षेत्र छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अवैध निर्माणों के नाम पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर न्यायिक और राजनीतिक बहस जारी है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही बुलडोजर कार्रवाइयों पर दिशानिर्देश जारी कर चुका है।
सरकार की स्थिति
पुणे नगर निगम की ओर से अब तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है। प्रशासन ने कार्रवाई को अवैध निर्माण हटाने की नियमित प्रक्रिया बताया है, लेकिन स्टे ऑर्डर के दावे पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
आगे की स्थिति
मौलाना ने सरकार से माँग की है कि यदि निर्माण तोड़ा गया है तो उसकी स्पष्ट और ठोस वजह जनता के सामने रखी जाए। स्थानीय निवासियों ने न्यायिक राहत की उम्मीद जताई है। आने वाले दिनों में यह मामला अदालत में पहुँच सकता है।