5 सितंबर 2026
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सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्त: जिला अदालत के आदेश पर 6 बुलडोजर से कार्रवाई, सांसद नजरबंद

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सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्त: जिला अदालत के आदेश पर 6 बुलडोजर से कार्रवाई, सांसद नजरबंद

सारांश

सहारनपुर कलेक्ट्रेट के भीतर दशकों से खड़ी मस्जिद को जिला अदालत के आदेश पर 6 बुलडोजर से गिरा दिया गया। सांसद इकरा हसन नजरबंद, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वक्फ बोर्ड को पक्षकार न बनाने और खसरा रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। भूमि स्वामित्व का यह विवाद अब उच्च न्यायालय तक पहुँच सकता है।

मुख्य बातें

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को 5 सितंबर 2026 को 6 बुलडोजर से ध्वस्त किया गया।
जिला अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के बेदखली आदेश को बरकरार रखा; मस्जिद कमेटी की अपील खारिज।
डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई; अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ तैनात।
कैराना सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोककर नजरबंद किया गया; माँ तबस्सुम हसन ने कार्रवाई की आलोचना की।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वक्फ बोर्ड को पक्षकार न बनाने और खसरा रिकॉर्ड में वहीद खान व याकूब खान के नाम दर्ज होने का हवाला देकर कार्रवाई को संविधान-विरोधी बताया।

सहारनपुर में 5 सितंबर 2026 को भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच जिला प्रशासन ने 6 बुलडोजर की मदद से सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित एक मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई जिला अदालत के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट के बेदखली आदेश को बरकरार रखते हुए उक्त निर्माण को सरकारी भूमि पर अवैध घोषित किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया, 'सहारनपुर जिले में जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर सरकारी जमीन पर एक अवैध निर्माण पाया गया था, जिसके बारे में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील दायर की थी। उनकी अपील खारिज कर दी गई है और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया है। इसी आदेश के तहत, इस अवैध निर्माण को गिराने का काम किया जा रहा है।'

डीआईजी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन ने अपनी समस्त कानूनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी की हैं और यह पूरी कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही संचालित की जा रही है। त्योहारी मौसम को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ बल तैनात किया गया है।

सांसद की नजरबंदी और परिजनों की प्रतिक्रिया

कैराना की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने उस समय नजरबंद कर दिया, जब वे इस मुद्दे पर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनकी माँ और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि उनका परिवार जनता की सेवा के प्रति प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि इस तरह की नजरबंदी संवेदनशील मामलों में विपक्षी नेताओं की पहुँच रोकने की एक परिचित प्रशासनिक रणनीति रही है।

विपक्ष के कानूनी सवाल

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ध्वस्तीकरण पर तीखी आपत्ति जताते हुए कहा, 'देखिए, बात सिर्फ मस्जिद की नहीं है, देश के कानून और संविधान का उल्लंघन हो रहा है। आप यह साबित नहीं कर सकते कि जमीन आपकी है। खसरा रिकॉर्ड के आधार पर आपने दावा किया है कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है। लेकिन कलेक्ट्रेट की जमीन आज भी वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है, जिनकी जमींदारी के भीतर मस्जिद बनाई गई थी।'

मसूद ने वक्फ कानून का हवाला देते हुए आगे कहा, 'मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत है, लेकिन वक्फ बोर्ड को इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया। जहाँ तक वक्फ बाय यूजर का सवाल है, यह स्थापित करता है कि यह एक मस्जिद है, जहाँ लगातार नमाज अदा की जाती रही है।' मसूद के अनुसार, वे इस विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य भी रह चुके हैं।

भूमि स्वामित्व का विवाद

इस मामले का केंद्र भूमि के स्वामित्व का विवाद है। प्रशासन का पक्ष है कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है और उस पर हुआ निर्माण अवैध है। वहीं, विपक्षी पक्ष का दावा है कि खसरा रिकॉर्ड अभी भी पूर्व जमींदार वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में वक्फ संपत्तियों और धार्मिक स्थलों के स्वामित्व को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद तेज हुए हैं।

आगे क्या होगा

मस्जिद कमेटी की पहली अपील खारिज होने के बाद यह देखना होगा कि वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाती है या नहीं। वक्फ बोर्ड को पक्षकार न बनाए जाने के मसूद के तर्क को यदि न्यायालय में चुनौती दी जाती है, तो यह मामला और लंबा खिंच सकता है। फिलहाल, सहारनपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकारी भूमि अभिलेखों और धार्मिक स्थलों के स्वामित्व को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में चल रहा है। इमरान मसूद का यह सवाल कि वक्फ बोर्ड को पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया, प्रक्रियागत दृष्टि से महत्वपूर्ण है और उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दी जा सकती है। खसरा रिकॉर्ड में पूर्व जमींदारों के नाम का बना रहना भूमि स्वामित्व के दावे को जटिल बनाता है। सांसद की नजरबंदी यह भी दर्शाती है कि प्रशासन इस मुद्दे को राजनीतिक रंग लेने से रोकने के प्रति सतर्क है — लेकिन इस तरह की कार्रवाई अक्सर उलटा असर करती है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद को क्यों गिराया गया?
जिला अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के उस बेदखली आदेश को बरकरार रखा जिसमें इस मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण घोषित किया गया था। मस्जिद कमेटी की अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने 5 सितंबर 2026 को 6 बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
क्या इस मामले में वक्फ बोर्ड की भूमिका थी?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के अनुसार, मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत है और वक्फ बाय यूजर के तहत वहाँ लगातार नमाज अदा होती रही है। उनका आरोप है कि इस कानूनी कार्रवाई में वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया, जो प्रक्रियागत खामी है।
सांसद इकरा हसन को क्यों नजरबंद किया गया?
कैराना की सांसद इकरा हसन कलेक्ट्रेट मस्जिद के मुद्दे पर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर दिया। उनकी माँ और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने इस कदम की आलोचना की।
भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद क्या है?
प्रशासन का दावा है कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है, जबकि विपक्ष का कहना है कि खसरा रिकॉर्ड अभी भी पूर्व जमींदार वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है, जिनकी जमींदारी के भीतर मस्जिद बनाई गई थी। यह रिकॉर्ड-आधारित विवाद मामले को कानूनी रूप से जटिल बनाता है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
मस्जिद कमेटी की जिला अदालत में अपील खारिज हो चुकी है; अब उनके पास उच्च न्यायालय जाने का विकल्प है। वक्फ बोर्ड को पक्षकार न बनाने के मुद्दे पर भी कानूनी चुनौती संभव है। सहारनपुर में त्योहारी मौसम को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ तैनात रखी है।
राष्ट्र प्रेस
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