सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्त: जिला अदालत के आदेश पर 6 बुलडोजर से कार्रवाई, सांसद नजरबंद
सारांश
मुख्य बातें
सहारनपुर में 5 सितंबर 2026 को भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच जिला प्रशासन ने 6 बुलडोजर की मदद से सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित एक मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई जिला अदालत के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट के बेदखली आदेश को बरकरार रखते हुए उक्त निर्माण को सरकारी भूमि पर अवैध घोषित किया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया, 'सहारनपुर जिले में जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर सरकारी जमीन पर एक अवैध निर्माण पाया गया था, जिसके बारे में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील दायर की थी। उनकी अपील खारिज कर दी गई है और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया है। इसी आदेश के तहत, इस अवैध निर्माण को गिराने का काम किया जा रहा है।'
डीआईजी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन ने अपनी समस्त कानूनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी की हैं और यह पूरी कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही संचालित की जा रही है। त्योहारी मौसम को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ बल तैनात किया गया है।
सांसद की नजरबंदी और परिजनों की प्रतिक्रिया
कैराना की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने उस समय नजरबंद कर दिया, जब वे इस मुद्दे पर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनकी माँ और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि उनका परिवार जनता की सेवा के प्रति प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि इस तरह की नजरबंदी संवेदनशील मामलों में विपक्षी नेताओं की पहुँच रोकने की एक परिचित प्रशासनिक रणनीति रही है।
विपक्ष के कानूनी सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ध्वस्तीकरण पर तीखी आपत्ति जताते हुए कहा, 'देखिए, बात सिर्फ मस्जिद की नहीं है, देश के कानून और संविधान का उल्लंघन हो रहा है। आप यह साबित नहीं कर सकते कि जमीन आपकी है। खसरा रिकॉर्ड के आधार पर आपने दावा किया है कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है। लेकिन कलेक्ट्रेट की जमीन आज भी वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है, जिनकी जमींदारी के भीतर मस्जिद बनाई गई थी।'
मसूद ने वक्फ कानून का हवाला देते हुए आगे कहा, 'मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत है, लेकिन वक्फ बोर्ड को इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया। जहाँ तक वक्फ बाय यूजर का सवाल है, यह स्थापित करता है कि यह एक मस्जिद है, जहाँ लगातार नमाज अदा की जाती रही है।' मसूद के अनुसार, वे इस विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य भी रह चुके हैं।
भूमि स्वामित्व का विवाद
इस मामले का केंद्र भूमि के स्वामित्व का विवाद है। प्रशासन का पक्ष है कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है और उस पर हुआ निर्माण अवैध है। वहीं, विपक्षी पक्ष का दावा है कि खसरा रिकॉर्ड अभी भी पूर्व जमींदार वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में वक्फ संपत्तियों और धार्मिक स्थलों के स्वामित्व को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद तेज हुए हैं।
आगे क्या होगा
मस्जिद कमेटी की पहली अपील खारिज होने के बाद यह देखना होगा कि वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाती है या नहीं। वक्फ बोर्ड को पक्षकार न बनाए जाने के मसूद के तर्क को यदि न्यायालय में चुनौती दी जाती है, तो यह मामला और लंबा खिंच सकता है। फिलहाल, सहारनपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है।