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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में मुस्लिम पक्ष को क्यों दिया झटका?

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में मुस्लिम पक्ष को क्यों दिया झटका?

सारांश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल मस्जिद समिति की याचिका खारिज कर दी है, जिससे मस्जिद, मैरिज हॉल और अस्पताल के ध्वस्तीकरण पर रोक नहीं लगी। यह निर्णय प्रशासन के ध्वस्तीकरण अभियान के बीच आया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

याचिका खारिज होने से प्रशासन को ध्वस्तीकरण में मदद मिली।
मस्जिद समिति को स्थगन याचिका के लिए निचली अदालत का रुख करने का निर्देश दिया गया।
कड़ी सुरक्षा के बीच ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया।
मस्जिद के कुछ हिस्से कथित रूप से सरकारी जमीन पर बने थे।
अधिवक्ताओं ने न्यायालय में अपनी बात रखी।

प्रयागराज, 4 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शनिवार को याचिकाकर्ताओं को झटका देते हुए संभल मस्जिद समिति द्वारा दायर एक तत्काल याचिका खारिज कर दी, जिसमें अधिकार से संबंधित एक मस्जिद, मैरिज हॉल और अस्पताल के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने मस्जिद शरीफ गौसुल वारा रवा बुजुर्ग और उसके मुतवल्ली मिंजर की याचिका पर सुनवाई की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया और मस्जिद समिति को निर्देश दिया कि वह स्थगन याचिका के साथ सक्षम निचली अदालत का रुख करे।

याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत 2 सितंबर को पारित आदेश को चुनौती दी थी।

उन्होंने तर्क दिया कि 2 अक्टूबर को चार बुलडोजरों से ध्वस्त किया गया मैरिज हॉल तालाब की जमीन पर बना था, लेकिन उन्होंने दावा किया कि गांधी जयंती और दशहरा के दिन विध्वंस करने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है।

प्रशासन ने मस्जिद को भी नोटिस जारी किया था, जिसके कुछ हिस्से कथित तौर पर सरकारी जमीन पर बने हैं और समिति को चार दिन की समय-सीमा दी गई थी।

समय-सीमा समाप्त होने से पहले ही, मस्जिद समिति के सदस्यों ने कथित तौर पर दीवार के कुछ हिस्सों को खुद ही गिराना शुरू कर दिया।

दशहरे के दिन, संभल जिला प्रशासन ने अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाया और रावा बुजुर्ग गांव में सरकारी जमीन पर बने एक मैरिज हॉल को गिरा दिया गया।

गुरुवार सुबह चलाए गए इस अभियान के तहत, इलाके को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में बदल दिया गया, जहां लगभग 200 पुलिस और प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) के जवान तैनात थे। इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया।

शुक्रवार को पिछली सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से जमीन के रिकॉर्ड जमा करने को कहा था। याचिका में राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक संभल, एडीएम, तहसीलदार और ग्राम सभा को पक्षकार बनाया गया था।

अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक श्री त्रिपाठी ने मस्जिद समिति का प्रतिनिधित्व किया, जबकि मुख्य स्थायी वकील जेएन मौर्य और स्थायी अधिवक्ता आशीष मोहन श्रीवास्तव शनिवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में विधि का शासन बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने याचिका क्यों खारिज की?
याचिका खारिज करने का कारण यह था कि याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत का रुख करने के लिए कहा गया था।
संभल मस्जिद का ध्वस्तीकरण कब किया गया?
मैरिज हॉल का ध्वस्तीकरण 2 अक्टूबर को किया गया था।
इस मामले में प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाया और सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया।
राष्ट्र प्रेस
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