PM मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा: ताशकंद में कलाकारों और भारतीय समुदाय में दिखा अभूतपूर्व उत्साह
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान ताशकंद में भारत-उज्बेकिस्तान की गहरी सांस्कृतिक मित्रता का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। 30 अगस्त को प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुति देने वाले स्थानीय कलाकारों और वहाँ बसे भारतीय समुदाय के सदस्यों ने इस अवसर को अपने जीवन का सबसे यादगार और गौरवपूर्ण पल बताया।
कलाकारों का अनुभव: सम्मान और रोमांच का मिश्रण
प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष प्रस्तुति देने वाले एक स्थानीय संगीतकार ने कहा कि यह अवसर उनके लिए असाधारण सम्मान और सौभाग्य की बात है। उन्होंने भारत और उज्बेकिस्तान की संस्कृतियों में गहरी समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत में ऐसे सूत्र हैं जो दोनों के लोगों को स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के करीब लाते हैं।
एक अन्य कलाकार ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपने गहरे लगाव का जिक्र किया। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुति देने से पहले वे कुछ घबराए हुए थे, लेकिन जैसे ही प्रदर्शन शुरू हुआ, उनका आत्मविश्वास लौट आया और उन्हें महसूस हुआ कि उनका नृत्य बेहतरीन रहा।
भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया
भारतीय समुदाय से जुड़े एक कलाकार ने प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुति देने के अनुभव को शब्दों में बयाँ कर पाना कठिन बताया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को बेहद सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं — उत्साह और हल्की घबराहट के बीच यह क्षण उनके लिए गर्व का प्रतीक बन गया।
उज्बेकिस्तान में निवास करने वाले एक भारतीय नागरिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट को अपने जीवन का विशेष पल बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से मिलना उनका एक बड़ा सपना था, जो इस यात्रा के दौरान साकार हो गया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दशकों पुराने व्यापारिक संबंध दोनों देशों की साझेदारी को और मज़बूत बनाते हैं।
भारत-उज्बेकिस्तान सांस्कृतिक संबंध
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि दोनों देशों की सभ्यताओं की जड़ें सदियों पुरानी हैं — बौद्ध धर्म, व्यापार मार्गों और साझा ऐतिहासिक विरासत ने इस रिश्ते को गहराई दी है।
प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने सांस्कृतिक कूटनीति को केंद्र में रखा, जो भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति का अभिन्न हिस्सा है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक, व्यापारिक और कूटनीतिक सहयोग को और बल मिलने की उम्मीद है। ताशकंद में उमड़ा यह उत्साह इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी लगाव केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि जन-जन तक पहुँचा है।