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PM मोदी का ताशकंद दौरा: राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा, SCO समिट भी एजेंडे में

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PM मोदी का ताशकंद दौरा: राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा, SCO समिट भी एजेंडे में

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी की ताशकंद यात्रा महज एक राजनयिक शिष्टाचार नहीं — यह मध्य एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक पकड़ का संकेत है। व्यापार, खनिज, अंतरिक्ष और डिजिटल कनेक्टिविटी पर केंद्रित यह दौरा 'विकसित भारत 2047' को वैश्विक धरातल देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

PM मोदी 30 अगस्त को ताशकंद की दो दिवसीय द्विपक्षीय यात्रा पर रवाना होंगे — यह उनका उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा है।
राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, जरूरी खनिज और अंतरिक्ष पर प्रतिनिधिमंडल-स्तर की वार्ता होगी।
'विकसित भारत 2047' और 'उज्बेकिस्तान-2030' के साझा विकास लक्ष्यों पर भी विचार-विमर्श होगा।
मोदी शास्त्री मेमोरियल और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में महात्मा गांधी सेंटर का दौरा करेंगे।
31 अगस्त को मोदी बिश्केक में 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे; इस वर्ष SCO की 25वीं वर्षगांठ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर शनिवार, 30 अगस्त को ताशकंद की दो दिवसीय द्विपक्षीय यात्रा पर रवाना होंगे। यह मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाई देने की दृष्टि से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यात्रा का एजेंडा और प्रमुख क्षेत्र

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों नेता प्रतिनिधिमंडल-स्तर की वार्ता में व्यापार और निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा जरूरी खनिज, हेल्थकेयर, अंतरिक्ष और टेक्नोलॉजी भी बातचीत के एजेंडे में शामिल हैं।

दोनों नेता 'विकसित भारत 2047' और 'उज्बेकिस्तान-2030' के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श करेंगे — यह संकेत है कि दोनों देश दीर्घकालिक आर्थिक रोडमैप को साझा आधार पर खड़ा करना चाहते हैं।

सांस्कृतिक और शैक्षणिक जुड़ाव

ताशकंद प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी शास्त्री मेमोरियल और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थित महात्मा गांधी सेंटर का दौरा करेंगे। वे वहाँ इंडोलॉजिस्ट और विद्वानों से भी संवाद करेंगे।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा, "यह मुलाकात भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों को उजागर करने का मौका देगी। साथ ही, यह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने में एकेडमिक और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान की अहम भूमिका को भी रेखांकित करेगी।"

दोनों देशों के संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर वर्षों से व्यापक संबंध रहे हैं। मोदी ने 2015 में मध्य एशिया दौरे के तहत उज्बेकिस्तान की यात्रा की थी, इसके बाद 2016 और 2022 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलनों के अवसर पर वहाँ गए। उज्बेक राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने 2018 में भारत का राजकीय दौरा किया था और 2019 के वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में भी भाग लिया था।

दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात 2025 में चीन के तियानजिन में हुए SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इससे पहले वे 2023 में दुबई में COP 28 और 2024 में कजान में BRICS समिट के दौरान मिले थे।

SCO समिट और बिश्केक यात्रा

उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुँचेंगे, जहाँ वे 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस वर्ष SCO की 25वीं वर्षगांठ है और समिट का विषय है — 'SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर'

31 अगस्त को स्वागत भोज और 1 सितंबर को समिट की मुख्य बैठक निर्धारित है, जिसमें मोदी संबोधन देंगे। बिश्केक में कई द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित करने की योजना है।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को लगातार सुदृढ़ करने में जुटा है — और SCO मंच पर भारत की भूमिका का विस्तार इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्राथमिकता मानता है। जरूरी खनिजों और डिजिटल कनेक्टिविटी का एजेंडे में होना बताता है कि यह यात्रा परंपरागत कूटनीति से आगे आपूर्ति श्रृंखला की राजनीति में प्रवेश कर रही है। हालाँकि, SCO मंच पर चीन और पाकिस्तान की उपस्थिति के बीच भारत की भूमिका की सीमाएँ भी स्पष्ट हैं — बिश्केक में मोदी का संबोधन इसी कसौटी पर परखा जाएगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा का उद्देश्य क्या है?
यह राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर दो दिवसीय द्विपक्षीय यात्रा है, जिसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और जरूरी खनिजों पर सहयोग की समीक्षा और नए रास्ते तलाशे जाएंगे। दोनों देश 'विकसित भारत 2047' और 'उज्बेकिस्तान-2030' के साझा लक्ष्यों पर भी चर्चा करेंगे।
मोदी का उज्बेकिस्तान का यह कौन सा दौरा है?
यह प्रधानमंत्री मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा है। इससे पहले वे 2015 में मध्य एशिया यात्रा के तहत, और 2016 तथा 2022 में SCO शिखर सम्मेलनों के अवसर पर ताशकंद गए थे।
26वाँ SCO शिखर सम्मेलन कब और कहाँ होगा?
26वाँ SCO शिखर सम्मेलन 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होगा। इस वर्ष SCO की 25वीं वर्षगांठ है और समिट का विषय 'SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर' है।
ताशकंद में मोदी किन सांस्कृतिक स्थलों का दौरा करेंगे?
मोदी ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में महात्मा गांधी सेंटर का दौरा करेंगे। वे वहाँ इंडोलॉजिस्ट और विद्वानों से भी संवाद करेंगे।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध कैसे रहे हैं?
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर वर्षों से मजबूत संबंध हैं। उज्बेक राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने 2018 में भारत का राजकीय दौरा किया था और 2019 के वाइब्रेंट गुजरात समिट में भी भाग लिया था। दोनों नेता 2023 में COP 28, 2024 में BRICS समिट और 2025 में SCO तियानजिन समिट के दौरान मिल चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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