4 अगस्त 2026
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जयशंकर-सैदोव वार्ता: भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा, ऊर्जा-व्यापार पर फोकस

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जयशंकर-सैदोव वार्ता: भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा, ऊर्जा-व्यापार पर फोकस

सारांश

भारत-उज्बेकिस्तान संबंध एक नए मोड़ पर हैं — ऊर्जा, रक्षा और खनन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बात हो रही है और व्यापार $1 अरब के करीब पहुँच चुका है। सैदोव की तीन दिवसीय यात्रा यह संकेत देती है कि भारत अपनी 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति को ठोस आकार देने में गंभीर है।

मुख्य बातें

जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की।
सैदोव भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं; बैठक में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, शिक्षा और संस्कृति पर चर्चा हुई।
दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 अरब डॉलर तक पहुँचा; भारत ने खनन क्षेत्र में सहयोग की इच्छा जताई।
उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।
दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय चुनौतियों और बहुपक्षीय सहयोग पर विचार साझा किए।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का व्यापक मूल्यांकन किया गया। सैदोव इन दिनों भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं, और यह बैठक उस यात्रा की केंद्रीय कड़ी रही।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

वार्ता में ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया और बहुपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर राय साझा की।

बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, "अपने मित्र और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव से मिलकर खुशी हुई। हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी की विस्तार से समीक्षा की, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया गया। हमने क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी चर्चा की और बहुपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया।"

जयशंकर ने उज्बेकिस्तान को बताया 'विस्तारित पड़ोस' का हिस्सा

बैठक के उद्घाटन संबोधन में जयशंकर ने भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में बनी सकारात्मक गति की सराहना की। उन्होंने कहा, "भारत में हम उज्बेकिस्तान को अपने विस्तारित पड़ोस का हिस्सा मानते हैं। दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और वस्तुओं का आदान-प्रदान हमेशा होता रहा है। हमारे बीच बहुत पुराने और गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।"

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कई नए क्षेत्रों तक विस्तृत हो चुके हैं।

व्यापार और खनन में बढ़ोतरी की संभावना

जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब लगभग 1 अरब डॉलर के करीब पहुँच चुका है, लेकिन इसमें अभी और बढ़ोतरी की पर्याप्त गुंजाइश है। उन्होंने खनन (माइनिंग) क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की भारत की इच्छा भी व्यक्त की, जो मध्य एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक रुचि को दर्शाता है।

राष्ट्रपति मुर्मु से भी मिले सैदोव

इससे पहले सैदोव ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात की। राष्ट्रपति सचिवालय ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु ने दोनों देशों के बीच "गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों" का उल्लेख किया, जिनकी जड़ें प्राचीन व्यापार मार्गों से जुड़ी हैं। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि यह यात्रा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान और पारस्परिक रूप से लाभदायक साझेदारी को मज़बूत करने का अवसर है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब भारत मध्य एशिया में अपनी कनेक्टिविटी और आर्थिक उपस्थिति को व्यापक बनाने में जुटा है। गौरतलब है कि उज्बेकिस्तान भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति में एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है। सैदोव की यात्रा के शेष दिनों में और भी द्विपक्षीय बैठकें होने की संभावना है, जिनसे साझेदारी को और ठोस रूप मिल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे परिप्रेक्ष्य में रखना ज़रूरी है — भारत का चीन के साथ व्यापार इससे सौ गुना अधिक है। खनन और ऊर्जा में सहयोग की बात बार-बार होती है, पर ठोस समझौतों की कमी बनी रहती है। मध्य एशिया में भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति वर्षों से घोषणाओं तक सीमित रही है; सैदोव की यात्रा तभी सार्थक होगी जब इससे मापनीय परियोजनाएँ सामने आएँ, न कि केवल साझा बयान।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और बख्तियार सैदोव की बैठक में क्या हुआ?
3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों विदेश मंत्रियों ने भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी की विस्तृत समीक्षा की। ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और क्षेत्रीय चुनौतियाँ प्रमुख एजेंडा रहे।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच अभी कितना व्यापार होता है?
जयशंकर के अनुसार दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 अरब डॉलर के करीब पहुँच चुका है। उन्होंने कहा कि इसमें अभी और बढ़ोतरी की काफी संभावना है।
उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या है?
बख्तियार सैदोव तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत आए हैं। इस यात्रा का मकसद द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना और मौजूदा साझेदारी को मज़बूत बनाना है।
क्या सैदोव ने राष्ट्रपति मुर्मु से भी मुलाकात की?
हाँ, उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति मुर्मु ने दोनों देशों के प्राचीन व्यापार मार्गों से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख किया।
भारत उज्बेकिस्तान के साथ किन नए क्षेत्रों में सहयोग चाहता है?
जयशंकर ने खनन (माइनिंग) क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की विशेष इच्छा जताई। इसके अलावा निर्माण, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य और ऊर्जा भी प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं।
राष्ट्र प्रेस
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