जयशंकर-सैदोव वार्ता: भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा, ऊर्जा-व्यापार पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का व्यापक मूल्यांकन किया गया। सैदोव इन दिनों भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं, और यह बैठक उस यात्रा की केंद्रीय कड़ी रही।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
वार्ता में ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया और बहुपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर राय साझा की।
बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, "अपने मित्र और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव से मिलकर खुशी हुई। हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी की विस्तार से समीक्षा की, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया गया। हमने क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी चर्चा की और बहुपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया।"
जयशंकर ने उज्बेकिस्तान को बताया 'विस्तारित पड़ोस' का हिस्सा
बैठक के उद्घाटन संबोधन में जयशंकर ने भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में बनी सकारात्मक गति की सराहना की। उन्होंने कहा, "भारत में हम उज्बेकिस्तान को अपने विस्तारित पड़ोस का हिस्सा मानते हैं। दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और वस्तुओं का आदान-प्रदान हमेशा होता रहा है। हमारे बीच बहुत पुराने और गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।"
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कई नए क्षेत्रों तक विस्तृत हो चुके हैं।
व्यापार और खनन में बढ़ोतरी की संभावना
जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब लगभग 1 अरब डॉलर के करीब पहुँच चुका है, लेकिन इसमें अभी और बढ़ोतरी की पर्याप्त गुंजाइश है। उन्होंने खनन (माइनिंग) क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की भारत की इच्छा भी व्यक्त की, जो मध्य एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक रुचि को दर्शाता है।
राष्ट्रपति मुर्मु से भी मिले सैदोव
इससे पहले सैदोव ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात की। राष्ट्रपति सचिवालय ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु ने दोनों देशों के बीच "गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों" का उल्लेख किया, जिनकी जड़ें प्राचीन व्यापार मार्गों से जुड़ी हैं। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि यह यात्रा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान और पारस्परिक रूप से लाभदायक साझेदारी को मज़बूत करने का अवसर है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब भारत मध्य एशिया में अपनी कनेक्टिविटी और आर्थिक उपस्थिति को व्यापक बनाने में जुटा है। गौरतलब है कि उज्बेकिस्तान भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति में एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है। सैदोव की यात्रा के शेष दिनों में और भी द्विपक्षीय बैठकें होने की संभावना है, जिनसे साझेदारी को और ठोस रूप मिल सकता है।