उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव नई दिल्ली पहुंचे, जयशंकर और राष्ट्रपति मुर्मु से होगी मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव सोमवार, 3 अगस्त 2026 को आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। भारत सरकार के निमंत्रण पर यह यात्रा 3 से 5 अगस्त तक चलेगी, जिसका उद्देश्य भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी को व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में और गहरा करना है।
स्वागत और राजनयिक औपचारिकताएँ
सैदोव के आगमन पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव का नई दिल्ली में आधिकारिक दौरे पर आने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत है।' यह संदेश दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का प्रतीक है।
दौरे के दौरान सैदोव राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
बिजनेस फोरम और आर्थिक एजेंडा
सैदोव नई दिल्ली में आयोजित एक बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगे, जहाँ दोनों देशों के उद्यमी और नीति-निर्माता व्यापार एवं वाणिज्यिक सहयोग के नए अवसरों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह मंच निवेश, शिक्षा और मध्य एशियाई कनेक्टिविटी जैसे विषयों पर ठोस साझेदारी की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि: पहले से चली आ रही कूटनीतिक सक्रियता
यह दौरा अचानक नहीं आया। विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने 20 जुलाई को सैदोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी, जिसमें व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के उपायों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने उस बातचीत के बाद कहा था कि वार्ता 'व्यापार, निवेश और दूसरे क्षेत्र में हमारे द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित थी।'
सैदोव ने भी उस बातचीत को 'अहम' बताते हुए कहा था कि दोनों पक्ष अपने विदेश मंत्रालयों के बीच 'नियमित और भरोसे पर आधारित बातचीत' जारी रखने पर सहमत हुए हैं। गौरतलब है कि दोनों देशों ने मई 2026 में नई दिल्ली में फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन का 17वाँ दौर आयोजित किया था, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
रणनीतिक महत्व: मध्य एशिया में भारत की पकड़
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत मध्य एशिया में अपनी उपस्थिति को व्यापक बनाने की कोशिश में है। उज्बेकिस्तान इस क्षेत्र का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और भारत के लिए ऊर्जा, व्यापार मार्गों और शैक्षणिक सहयोग के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण साझेदार बनता जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार की वास्तविक मात्रा अभी भी दोनों देशों की क्षमता से काफी कम है, और इस दौरे से ठोस समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है।
आगे क्या
सैदोव का यह दौरा 5 अगस्त को समाप्त होगा। उम्मीद है कि वार्ताओं के बाद दोनों देश व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में नए समझौतों या संयुक्त वक्तव्य की घोषणा कर सकते हैं, जो भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देंगे।