सेमीकॉन इंडिया 2026: अश्विनी वैष्णव बोले — नींव बन चुकी, अब सेमीकंडक्टर उद्योग को रफ्तार देने का वक्त
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'सेमीकॉन इंडिया 2026' के दौरान कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की बुनियाद तैयार हो चुकी है और अब इस क्षेत्र को अगले स्तर तक ले जाने का समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'सेमीकॉन 2.0' के अंतर्गत भारत की चिप इकोसिस्टम रणनीति छह प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगी।
सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ
वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 के तहत जिन छह क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, वे हैं — डिजाइन, मशीनरी और मटेरियल्स, अधिक फैब इकाइयों की स्थापना, ATMP/OSAT उद्योग को सुदृढ़ करना, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा प्रतिभा विकास। उन्होंने कहा, "चाहे सामग्री हो, मशीनरी हो, नए फैब संयंत्र हों, ATMP इकाइयाँ हों, डिजाइन हो या प्रतिभा विकास — हमारा प्रयास इन सभी को भारत में विकसित करने का है।"
सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के सभी छह स्तंभों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। यह योजना पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन — चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, उपकरण, मटेरियल्स, R&D और प्रतिभा विकास — को वित्तीय एवं बुनियादी ढाँचागत समर्थन प्रदान करेगी।
सेमीकॉन 1.0 की उपलब्धियाँ
वैष्णव ने सेमीकॉन 1.0 की सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा, "सेमीकॉन 1.0 में हमारे पास बड़ी संख्या में स्टार्टअप्स थे जो चिप डिजाइनिंग की संभावनाएँ तलाश रहे थे। इसमें हमें अच्छी सफलता मिली। 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने भाग लिया और उनमें से लगभग 20 को करीब ₹800 करोड़ की वेंचर कैपिटल फंडिंग भी हासिल हुई। यह तो सिर्फ शुरुआत थी।"
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विविधीकरण की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और अमेरिका, यूरोप तथा जापान जैसे देश भारत को चीन के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
सेमीकॉन इंडिया 2026 का व्यापक पैमाना
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि इस वर्ष का आयोजन पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक बड़ा रहा। उन्होंने कहा, "करीब 40,000 प्रतिनिधियों ने पंजीकरण कराया है। प्रदर्शनी में 600 से अधिक कंपनियाँ भाग ले रही हैं। 52 देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो रहे हैं और प्रदर्शनी में भाग लेने वाली 300 से अधिक कंपनियाँ विदेशी हैं।"
कृष्णन के अनुसार यह आँकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि सेमीकंडक्टर निर्माण के गंतव्य के रूप में दुनिया का भारत पर भरोसा तेज़ी से बढ़ा है। गौरतलब है कि यह इस आयोजन का अब तक का सबसे बड़ा संस्करण है।
योजना की संरचना और नोडल एजेंसी
सरकार के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 के तहत समर्थित परियोजनाओं की अवधि सामान्यतः छह वर्ष तक होगी, जबकि यह योजना शुरुआती तौर पर तीन वर्षों तक आवेदन के लिए खुली रहेगी। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) इस योजना की नोडल एजेंसी होगी जो आवेदन आमंत्रित करने, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन करने, चयनित आवेदकों की सिफारिश करने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी का काम करेगी।
इसके अलावा, तीन वर्ष बाद मध्यावधि समीक्षा भी की जाएगी ताकि योजना के प्रभाव का आकलन हो सके और आवश्यकतानुसार संशोधन या विस्तार पर विचार किया जा सके।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकॉन 2.0 भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करने का अवसर है। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कुशल कार्यबल, घरेलू R&D क्षमता और वैश्विक उद्योग साझेदारी — तीनों मोर्चों पर एक साथ प्रयास की ज़रूरत होगी। आने वाले महीनों में ISM के आवेदन पोर्टल के खुलने पर इस योजना की वास्तविक रफ्तार का पहला संकेत मिलेगा।