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सेमीकॉन इंडिया 2026: अश्विनी वैष्णव बोले — नींव बन चुकी, अब सेमीकंडक्टर उद्योग को रफ्तार देने का वक्त

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सेमीकॉन इंडिया 2026: अश्विनी वैष्णव बोले — नींव बन चुकी, अब सेमीकंडक्टर उद्योग को रफ्तार देने का वक्त

सारांश

सेमीकॉन इंडिया 2026 के मंच पर अश्विनी वैष्णव का संदेश साफ था — नींव रखना पर्याप्त नहीं, अब रफ्तार चाहिए। 40,000 प्रतिनिधि, 52 देश और 600 से अधिक कंपनियाँ — इस आयोजन की भव्यता ही बताती है कि भारत को वैश्विक चिप मानचित्र पर कितनी गंभीरता से लिया जाने लगा है।

मुख्य बातें

अश्विनी वैष्णव ने 17 सितंबर 2026 को सेमीकॉन इंडिया 2026 में घोषित किया कि भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की नींव पक्की हो चुकी है।
सेमीकॉन 2.0 छह स्तंभों पर आधारित है: डिजाइन, मशीनरी और मटेरियल्स, अधिक फैब इकाइयाँ, ATMP/OSAT, R&D और प्रतिभा विकास।
सेमीकॉन 1.0 में 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने भाग लिया; लगभग 20 को ₹800 करोड़ की वेंचर कैपिटल फंडिंग मिली।
इस वर्ष के आयोजन में 40,000 प्रतिनिधि , 600 से अधिक कंपनियाँ और 52 देशों की भागीदारी रही; 300 से अधिक विदेशी कंपनियाँ प्रदर्शनी में शामिल हुईं।
परियोजनाओं की अवधि सामान्यतः छह वर्ष ; योजना तीन वर्षों तक आवेदन के लिए खुली रहेगी।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) नोडल एजेंसी होगी; तीन वर्ष बाद मध्यावधि समीक्षा का प्रावधान।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'सेमीकॉन इंडिया 2026' के दौरान कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की बुनियाद तैयार हो चुकी है और अब इस क्षेत्र को अगले स्तर तक ले जाने का समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'सेमीकॉन 2.0' के अंतर्गत भारत की चिप इकोसिस्टम रणनीति छह प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगी।

सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ

वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 के तहत जिन छह क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, वे हैं — डिजाइन, मशीनरी और मटेरियल्स, अधिक फैब इकाइयों की स्थापना, ATMP/OSAT उद्योग को सुदृढ़ करना, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा प्रतिभा विकास। उन्होंने कहा, "चाहे सामग्री हो, मशीनरी हो, नए फैब संयंत्र हों, ATMP इकाइयाँ हों, डिजाइन हो या प्रतिभा विकास — हमारा प्रयास इन सभी को भारत में विकसित करने का है।"

सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के सभी छह स्तंभों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। यह योजना पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन — चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, उपकरण, मटेरियल्स, R&D और प्रतिभा विकास — को वित्तीय एवं बुनियादी ढाँचागत समर्थन प्रदान करेगी।

सेमीकॉन 1.0 की उपलब्धियाँ

वैष्णव ने सेमीकॉन 1.0 की सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा, "सेमीकॉन 1.0 में हमारे पास बड़ी संख्या में स्टार्टअप्स थे जो चिप डिजाइनिंग की संभावनाएँ तलाश रहे थे। इसमें हमें अच्छी सफलता मिली। 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने भाग लिया और उनमें से लगभग 20 को करीब ₹800 करोड़ की वेंचर कैपिटल फंडिंग भी हासिल हुई। यह तो सिर्फ शुरुआत थी।"

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विविधीकरण की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और अमेरिका, यूरोप तथा जापान जैसे देश भारत को चीन के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

सेमीकॉन इंडिया 2026 का व्यापक पैमाना

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि इस वर्ष का आयोजन पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक बड़ा रहा। उन्होंने कहा, "करीब 40,000 प्रतिनिधियों ने पंजीकरण कराया है। प्रदर्शनी में 600 से अधिक कंपनियाँ भाग ले रही हैं। 52 देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो रहे हैं और प्रदर्शनी में भाग लेने वाली 300 से अधिक कंपनियाँ विदेशी हैं।"

कृष्णन के अनुसार यह आँकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि सेमीकंडक्टर निर्माण के गंतव्य के रूप में दुनिया का भारत पर भरोसा तेज़ी से बढ़ा है। गौरतलब है कि यह इस आयोजन का अब तक का सबसे बड़ा संस्करण है।

योजना की संरचना और नोडल एजेंसी

सरकार के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 के तहत समर्थित परियोजनाओं की अवधि सामान्यतः छह वर्ष तक होगी, जबकि यह योजना शुरुआती तौर पर तीन वर्षों तक आवेदन के लिए खुली रहेगी। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) इस योजना की नोडल एजेंसी होगी जो आवेदन आमंत्रित करने, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन करने, चयनित आवेदकों की सिफारिश करने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी का काम करेगी।

इसके अलावा, तीन वर्ष बाद मध्यावधि समीक्षा भी की जाएगी ताकि योजना के प्रभाव का आकलन हो सके और आवश्यकतानुसार संशोधन या विस्तार पर विचार किया जा सके।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकॉन 2.0 भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करने का अवसर है। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कुशल कार्यबल, घरेलू R&D क्षमता और वैश्विक उद्योग साझेदारी — तीनों मोर्चों पर एक साथ प्रयास की ज़रूरत होगी। आने वाले महीनों में ISM के आवेदन पोर्टल के खुलने पर इस योजना की वास्तविक रफ्तार का पहला संकेत मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — जहाँ भारत की औद्योगिक नीतियाँ अक्सर घोषणा और ज़मीनी नतीजों के बीच खाई छोड़ती रही हैं। 105 स्टार्टअप्स और ₹800 करोड़ की VC फंडिंग उत्साहजनक शुरुआत है, पर वैश्विक फैब क्षमता के सामने यह अभी बहुत छोटी है। 52 देशों और 300 विदेशी कंपनियों की उपस्थिति संकेत देती है कि वैश्विक रुचि वास्तविक है — पर रुचि को निवेश में बदलने के लिए ISM को पारदर्शी मूल्यांकन और तेज़ मंजूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करनी होगी, जो अभी तक भारतीय नीति का कमज़ोर पक्ष रहा है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन 2.0 क्या है और यह सेमीकॉन 1.0 से कैसे अलग है?
सेमीकॉन 2.0 भारत सरकार की अद्यतन सेमीकंडक्टर नीति है जो सेमीकॉन 1.0 की उपलब्धियों को आगे बढ़ाती है। जहाँ सेमीकॉन 1.0 मुख्यतः चिप डिजाइन स्टार्टअप्स पर केंद्रित था, वहीं सेमीकॉन 2.0 डिजाइन, फैब, ATMP/OSAT, मशीनरी, R&D और प्रतिभा विकास — छह स्तंभों पर एक साथ काम करेगा।
सेमीकॉन 2.0 के तहत आवेदन कब तक किए जा सकते हैं?
सरकार के अनुसार यह योजना शुरुआती तौर पर तीन वर्षों तक आवेदन के लिए खुली रहेगी। परियोजनाओं की कार्यान्वयन अवधि सामान्यतः छह वर्ष तक होगी और तीन वर्ष बाद मध्यावधि समीक्षा का भी प्रावधान है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की भूमिका क्या होगी?
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) सेमीकॉन 2.0 की नोडल एजेंसी होगी। यह आवेदन आमंत्रित करना, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन, चयनित आवेदकों की सिफारिश और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी — ये सभी ज़िम्मेदारियाँ निभाएगी।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में कितने देशों और कंपनियों ने भाग लिया?
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, इस आयोजन में 52 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, 600 से अधिक कंपनियाँ प्रदर्शनी में भाग लेंगी जिनमें से 300 से अधिक विदेशी हैं, और करीब 40,000 प्रतिनिधियों ने पंजीकरण कराया है।
सेमीकॉन 1.0 में स्टार्टअप्स को कितनी फंडिंग मिली?
अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सेमीकॉन 1.0 में 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने भाग लिया और उनमें से लगभग 20 स्टार्टअप्स को करीब ₹800 करोड़ की वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल हुई।
राष्ट्र प्रेस
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