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भारत 85,000 सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों को तैयार करने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रहा है: अश्विनी वैष्णव

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भारत 85,000 सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों को तैयार करने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रहा है: अश्विनी वैष्णव

सारांश

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत 'चिप्स टू स्टार्टअप्स' पहल के तहत 85,000 सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य तेजी से हासिल कर रहा है। यह प्रतिभा विकास में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

85,000 सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य।
भारत में 315 शैक्षणिक संस्थानों में प्रशिक्षण।
विश्व स्तरीय ईडीए टूल्स की उपलब्धता।
उद्योग में 20 लाख कुशल पेशेवरों की मांग।
'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' का विस्तार।

नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि भारत 'चिप्स टू स्टार्टअप्स (सी2एस)' पहल के तहत 85,000 सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर तैयार करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से प्रगति कर रहा है। मंत्री ने बताया कि सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिभा विकास और कौशल वृद्धि पर विशेष ध्यान दे रही है।

यह कार्यक्रम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रशिक्षण, कौशल विकास और कार्यबल निर्माण करके देश के उभरते चिप उद्योग के लिए एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार करना है। वैष्णव ने कहा कि 10 साल के सी2एस कार्यक्रम के पहले चार वर्षों में ही उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

उन्होंने बताया कि सिनोप्सिस, कैडेंस डिजाइन सिस्टम्स, सीमेंस, रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स, एएनसिस और एएमडी जैसी अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों के विश्व स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स भारत के 315 शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध कराए गए हैं।

मंत्री के अनुसार इन टूल्स का उपयोग करके छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो रहा है।

छात्रों द्वारा डिजाइन की गई चिप्स को मोहालीसेमीकंडक्टर लैबोरेटरी (एससीएल) में तैयार और परीक्षण किया जा रहा है। इससे छात्रों को डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग तक की संपूर्ण प्रक्रिया का अनुभव मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि यह पहल अब दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एक्सेस ईडीए प्रोग्राम बन गई है, जिसमें अब तक 1.85 करोड़ घंटे से ज्यादा ईडीए टूल्स का उपयोग चिप डिजाइन प्रशिक्षण के लिए किया जा चुका है।

देश भर के संस्थानों के छात्र, असम से लेकर गुजरात और जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडु तक, अब सक्रिय रूप से सेमीकंडक्टर डिजाइन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।

वैष्णव ने वैश्विक उद्योग रुझानों का जिक्र करते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र का आकार वर्तमान 800-900 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे दुनिया भर में लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की मांग पैदा होगी और भारत के युवाओं के लिए बड़े रोजगार अवसर उत्पन्न होंगे।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' के तहत इस कार्यक्रम का विस्तार 315 से बढ़ाकर 500 शैक्षणिक संस्थानों तक किया जाएगा, जिससे सेमीकंडक्टर डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग के क्षेत्र में पूरे देश में टैलेंट को और सशक्त किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों की संख्या कितनी होगी?
भारत 85,000 सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर तैयार करने की योजना बना रहा है।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिभा विकास और कौशल वृद्धि करना है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का क्या महत्व है?
यह मिशन चिप उद्योग के लिए एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार करने का लक्ष्य रखता है।
इस कार्यक्रम में कितने शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं?
वर्तमान में 315 शैक्षणिक संस्थान इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र का भविष्य क्या है?
सेमीकंडक्टर क्षेत्र का आकार 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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