विक्रम मिस्री से मिले नेपाली पत्रकार, भारत-नेपाल सीमा पर कस्टम ड्यूटी विवाद के बीच बड़ी बैठक
सारांश
Key Takeaways
- 25 अप्रैल 2025 को नेपाल के पत्रकारों के एक समूह ने नई दिल्ली में विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात की।
- बालेंद्र शाह सरकार ने नियम लागू किया है कि 100 नेपाली रुपये से अधिक का भारतीय सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी देनी होगी।
- विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि निजी इस्तेमाल के सामान पर रोक नहीं लगेगी।
- नेपाल के सीमावर्ती जिलों के लाखों लोग राशन, दवाई और घरेलू सामान के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं।
- भारत-नेपाल के बीच वार्षिक व्यापार 8 अरब डॉलर से अधिक का है और भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, यह विरोध केवल कस्टम ड्यूटी तक नहीं बल्कि आर्थिक कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोपों तक फैला हुआ है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल: भारत-नेपाल सीमा पर कस्टम ड्यूटी विवाद के बीच नेपाल के पत्रकारों के एक प्रतिनिधि समूह ने 25 अप्रैल 2025 को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से नई दिल्ली में मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा भारत से आने वाले सामान पर लगाए गए नए कस्टम नियमों के खिलाफ नेपाल में व्यापक जन-आक्रोश फैला हुआ है। इस मुलाकात को भारत-नेपाल संबंधों के संवेदनशील दौर में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश सचिव ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नेपाली पत्रकारों के समूह को भारत और नेपाल के बीच विभिन्न क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति तथा भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों के सकारात्मक दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से अवगत कराया।
यह बातचीत केवल औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं थी — बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारत सरकार नेपाल में उठ रहे जन-असंतोष और सीमावर्ती तनाव को लेकर सक्रिय रूप से संवाद बनाए रखना चाहती है।
कस्टम ड्यूटी विवाद की पूरी पृष्ठभूमि
बालेंद्र शाह सरकार ने हाल ही में एक नियम लागू किया है जिसके तहत भारत से नेपाल में प्रवेश करने वाले यात्री यदि 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य का सामान साथ लाते हैं तो उन्हें कस्टम ड्यूटी चुकानी होगी। सरकार का तर्क है कि यह कदम अनौपचारिक व्यापार और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है।
हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि नेपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि निजी उपयोग के लिए घरेलू सामान ले जाने वाले यात्रियों को नहीं रोका जाएगा। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत इस नियम को नेपाल की आंतरिक व्यवस्था के संदर्भ में समझता है।
सीमावर्ती जनता पर गहरा असर
भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर बसे लाखों लोगों की दैनिक जरूरतें एक-दूसरे के बाजारों पर निर्भर हैं। नेपाल के सीमावर्ती जिलों — विशेषकर रूपनदेही, कपिलवस्तु, बाँके और कंचनपुर — के निवासी राशन, दवाइयाँ, कपड़े और घरेलू सामान के लिए भारतीय बाजारों पर बड़े पैमाने पर निर्भर हैं।
इस नए नियम ने उन परिवारों की जेब पर सीधी चोट की है जो सीमा पार करके रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते थे। द संडे गार्डियन के अनुसार, यह विरोध केवल कस्टम ड्यूटी तक सीमित नहीं है — बल्कि आर्थिक कुप्रबंधन, शासन की विफलता और भ्रष्टाचार के आरोपों ने जनता के गुस्से को और भड़काया है।
भारत-नेपाल संबंधों का व्यापक संदर्भ
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में कई बड़े समझौते प्रगति पर हैं। पावर ट्रेड एग्रीमेंट और रेल लिंक परियोजनाओं के बीच इस तरह का सीमा-विवाद दोनों देशों के आम नागरिकों के लिए कठिनाइयाँ पैदा करता है।
गौरतलब है कि भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार करीब 8 अरब डॉलर से अधिक का है। ऐसे में कस्टम ड्यूटी जैसे एकतरफा फैसले न केवल आम जनता बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक समुदाय को भी प्रभावित करते हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नेपाल सरकार जन-दबाव और कूटनीतिक संवाद के बीच इस नीति में कोई संशोधन करती है या नहीं। विक्रम मिस्री और नेपाली पत्रकारों के बीच यह बैठक इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।