वैश्विक चिप उद्योग में 10 लाख पेशेवरों की कमी, अश्विनी वैष्णव बोले — भारत बन सकता है सेमीकंडक्टर हब
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 19 जून 2026 को पटना स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) केंद्र में कहा कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग इस समय लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी से जूझ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संकट भारत के लिए एक असाधारण अवसर है — देश इस क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन का वैश्विक केंद्र बनने की स्थिति में है।
वैश्विक सेमीकंडक्टर बाज़ार का आकार और संभावना
वैष्णव ने बताया कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का मौजूदा आकार लगभग 800 अरब डॉलर है और अगले एक वर्ष के भीतर यह 1 ट्रिलियन डॉलर के पार जाने की संभावना है। उन्होंने कहा, "वर्ष 2032 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 10 लाख नई नौकरियाँ पैदा होने की उम्मीद है। वहीं उद्योग को करीब 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है।" यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में चिप आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने की होड़ मची है।
भारत की रणनीति: डिजाइन और निर्माण पर दोहरा फोकस
मंत्री के अनुसार, इस अवसर का लाभ उठाने के लिए भारत को दो मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा — सेमीकंडक्टर डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण। सरकार देश में विश्वस्तरीय डिजाइन क्षमता विकसित करने की दिशा में सक्रिय है और यह सुनिश्चित करने पर ज़ोर दे रही है कि भारतीय छात्र दुनिया के सबसे बेहतर प्रशिक्षित पेशेवरों में गिने जाएँ। वैष्णव ने कहा, "जब छात्र सेमीकंडक्टर डिजाइन कौशल के साथ स्नातक होकर निकलें, तो उन्हें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं में गिना जाए और उन्हें तुरंत उद्योग में अवसर मिलें।"
75 हजार से 5 लाख छात्रों का लक्ष्य
वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर डिजाइन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के ज़रिए अब तक लगभग 75 हजार छात्रों को आकर्षक अवसर मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य इस संख्या को 75 हजार से बढ़ाकर 5 लाख छात्रों तक पहुँचाना है।" गौरतलब है कि भारत अपनी सेमीकंडक्टर मिशन योजना के तहत डिजाइन, निर्माण और पैकेजिंग तीनों क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है और देश भर में कई परियोजनाएँ इस समय क्रियान्वयन के चरण में हैं।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्टार्टअप विस्तार
STPI पटना केंद्र के दौरे के दौरान मंत्री ने देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को महानगरों की सीमाओं से बाहर ले जाने की सरकार की प्राथमिकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों में STPI केंद्रों को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। इस अवसर पर वैष्णव ने युवा उद्यमियों से सीधी बातचीत की और स्टार्टअप तथा तकनीक-आधारित उद्यमों के लिए सरकारी सहायता को और प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
आगे की राह
जैसे-जैसे भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे निर्माण से जुड़े कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार किए जाएँगे। यदि भारत इस प्रतिभा-अंतर को भरने में सफल रहा, तो वह वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में एक अपरिहार्य भागीदार के रूप में उभर सकता है।