14 अगस्त 2026
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भारत का सेमीकंडक्टर और स्वदेशी एआई मिशन: ₹1.27 लाख करोड़ के 'सेमिकॉन 2.0' से चिप डिजाइन हब तक का सफर

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भारत का सेमीकंडक्टर और स्वदेशी एआई मिशन: ₹1.27 लाख करोड़ के 'सेमिकॉन 2.0' से चिप डिजाइन हब तक का सफर

सारांश

चिप डिजाइन से लेकर स्वदेशी एआई तक — भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। ₹1.64 लाख करोड़ की 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ, ₹1.27 लाख करोड़ का 'सेमिकॉन 2.0' और 45,000+ GPU की कंप्यूटिंग क्षमता — यह महज नीतिगत घोषणाएँ नहीं, बल्कि वैश्विक चिप दौड़ में भारत की असली दावेदारी है।

मुख्य बातें

भारत में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश के साथ मंजूरी; तीन इकाइयाँ व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।
अप्रैल 2026 तक 75 संस्थाओं द्वारा 211 चिप्स का टेप-आउट; 12 नैनोमीटर समेत 7 चिप्स का सफल निर्माण।
जुलाई 2026 में 'सेमिकॉन 2.0' को मंजूरी — ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान; सेमीकंडक्टर आईपी, चिप डिजाइन और सिस्टम डिजाइन को बढ़ावा।
इंडियाएआई मिशन (परिव्यय ₹10,372 करोड़ ) के तहत जून 2026 तक 45,000+ GPU की साझा कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध।
237 परियोजनाओं को 93.18 लाख GPU घंटे आवंटित — शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को सब्सिडी दर पर एआई कंप्यूटिंग।

भारत सरकार ने 14 अगस्त 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में खुलासा किया कि देश अब सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के हर अहम पड़ाव — चिप डिजाइन, वेफर फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, उपकरण निर्माण और कच्ची सामग्री — में घरेलू क्षमता खड़ी कर रहा है। अब तक 12 नैनोमीटर समेत विभिन्न तकनीकी नोड्स पर सात चिप्स का सफल निर्माण किया जा चुका है, जो भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता का ठोस प्रमाण है।

सेमीकंडक्टर परियोजनाओं की स्थिति

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें कुल निवेश प्रतिबद्धता ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक है। इन परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले निर्माण इकाइयाँ और एडवांस्ड पैकेजिंग सुविधाएँ शामिल हैं। उल्लेखनीय यह है कि इनमें से तीन इकाइयाँ व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर चुकी हैं — यानी भारत अब केवल नीति-निर्माण के स्तर पर नहीं, बल्कि वास्तविक विनिर्माण के मोर्चे पर भी सक्रिय है।

फैक्टशीट के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक देश की 75 संस्थाओं द्वारा 211 चिप्स का टेप-आउट किया जा चुका है। यह संख्या भारत की घरेलू चिप डिजाइन क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित करती है।

सेमिकॉन 2.0: नई छलाँग

सरकार ने जुलाई 2026 में 'सेमिकॉन 2.0' कार्यक्रम को स्वीकृति दी है, जिसके लिए ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस कार्यक्रम का केंद्रीय उद्देश्य सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी), चिप डिजाइन और सिस्टम डिजाइन को प्रोत्साहन देना है। सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन हब के रूप में और सुदृढ़ होगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच चिप आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।

इंडियाएआई मिशन की प्रगति

चिप निर्माण के समानांतर, भारत स्वदेशी एआई मॉडल और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी जोर दे रहा है। इस दिशा में ₹10,372 करोड़ के परिव्यय वाली इंडियाएआई मिशन अग्रणी भूमिका निभा रही है। जून 2026 तक इस मिशन के तहत साझा कंप्यूटिंग क्षमता बढ़कर 45,000 से अधिक जीपीयू (GPU) तक पहुँच गई है।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक 237 परियोजनाओं ने सब्सिडी वाली एआई कंप्यूटिंग सुविधा का उपयोग किया है। इन परियोजनाओं को कुल 93.18 लाख जीपीयू घंटे उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे देश के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं को अपेक्षाकृत कम लागत पर उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग शक्ति मिल रही है।

सेमीकंडक्टर और एआई का गहरा रिश्ता

सरकारी बयान में रेखांकित किया गया है कि सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं — स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, उपग्रह, रक्षा प्रणालियाँ और एआई-आधारित तकनीकें सभी उन्नत चिप्स पर निर्भर हैं। एआई के विस्तार के साथ हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और विशेष प्रोसेसर की माँग तेज़ी से बढ़ रही है, जिससे सेमीकंडक्टर और एआई तकनीकें एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़ती जा रही हैं।

आगे की राह

इन पहलों का घोषित उद्देश्य भारतीय नवाचारकर्ताओं के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करना और देश में एआई अनुसंधान एवं विकास को गति देना है। यदि 'सेमिकॉन 2.0' और इंडियाएआई मिशन के लक्ष्य समयसीमा में पूरे होते हैं, तो भारत वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में एक स्वतंत्र और विश्वसनीय स्तंभ के रूप में उभर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये परियोजनाएँ वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में भारत की वास्तविक हिस्सेदारी कब और कितनी बढ़ाती हैं। 'सेमिकॉन 2.0' का ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान महत्वाकांक्षी है, पर भारत अभी भी उन्नत फैब्रिकेशन में ताइवान और दक्षिण कोरिया से दशकों पीछे है — डिजाइन क्षमता और पूर्ण-स्तरीय विनिर्माण के बीच की यह खाई जल्दी नहीं पटती। इंडियाएआई मिशन के तहत 93.18 लाख GPU घंटे स्टार्टअप्स के लिए उत्साहजनक हैं, लेकिन वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए भारत को न सिर्फ कंप्यूटिंग, बल्कि डेटा गवर्नेंस और प्रतिभा प्रतिधारण की चुनौतियाँ भी एक साथ सुलझानी होंगी।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कितनी सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और निवेश कितना है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश के साथ मंजूरी दी गई है। इनमें से तीन इकाइयाँ व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।
'सेमिकॉन 2.0' क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'सेमिकॉन 2.0' जुलाई 2026 में सरकार द्वारा स्वीकृत एक कार्यक्रम है, जिसके लिए ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी), चिप डिजाइन और सिस्टम डिजाइन को प्रोत्साहन देकर भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन हब बनाना है।
इंडियाएआई मिशन से शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को क्या फायदा मिल रहा है?
₹10,372 करोड़ के इंडियाएआई मिशन के तहत जून 2026 तक 45,000 से अधिक GPU की साझा कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराई गई है। अगस्त 2026 तक 237 परियोजनाओं को कुल 93.18 लाख GPU घंटे सब्सिडी दर पर मिले हैं, जिससे एआई मॉडल के प्रशिक्षण और अनुसंधान की लागत कम हुई है।
भारत में अब तक कितने चिप्स डिजाइन और टेप-आउट हो चुके हैं?
अप्रैल 2026 तक देश की 75 संस्थाओं द्वारा 211 चिप्स का टेप-आउट किया जा चुका है। इसके अलावा, 12 नैनोमीटर समेत विभिन्न तकनीकी नोड्स पर सात चिप्स का सफल निर्माण भी हो चुका है।
सेमीकंडक्टर और एआई तकनीक का आपस में क्या संबंध है?
सरकारी बयान के अनुसार, सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं और एआई के विस्तार के साथ हाई-परफॉर्मेंस चिप्स की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। स्मार्टफोन, रक्षा प्रणालियाँ और एआई मॉडल — सभी उन्नत चिप्स पर निर्भर हैं, इसलिए दोनों तकनीकें एक-दूसरे से अविभाज्य होती जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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