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सेमीकॉन इंडिया 2026: 56 एमओयू पर हस्ताक्षर, PM मोदी ने ₹1,27,500 करोड़ की सेमीकॉन 2.0 की घोषणा की

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सेमीकॉन इंडिया 2026: 56 एमओयू पर हस्ताक्षर, PM मोदी ने ₹1,27,500 करोड़ की सेमीकॉन 2.0 की घोषणा की

सारांश

सेमीकॉन इंडिया 2026 महज एक उद्योग मेला नहीं था — यह भारत के चिप महत्वाकांक्षा का सबसे बड़ा सार्वजनिक प्रदर्शन था। 56 एमओयू, ₹1,27,500 करोड़ की सेमीकॉन 2.0 और दो नई उत्पादन लाइनों के उद्घाटन के साथ, भारत ने संकेत दिया है कि वह नीति-चर्चा से आगे बढ़कर वास्तविक उत्पादन की दौड़ में शामिल हो चुका है।

मुख्य बातें

सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक प्रदर्शकों , 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और 52 देशों की भागीदारी रही।
56 एमओयू और घोषणाएं डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, AI, R&D, स्किलिंग समेत कई क्षेत्रों में हुईं।
PM मोदी ने ₹1,27,500 करोड़ के बजट वाली सेमीकॉन 2.0 नीति की घोषणा की, जो 6 स्तंभों पर आधारित है।
सीडीआईएल सेमीकंडक्टर, मोहाली और सुची सेमीकॉन, सूरत में दो नई वाणिज्यिक उत्पादन लाइनें वर्चुअली शुरू हुईं।
सेमीकॉन 1.0 के 12 में से 5 प्रोजेक्ट अब पूरी तरह परिचालन में हैं।
इवेंट में 51,656 पंजीकरण और करीब 40,000 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करते हुए ₹1,27,500 करोड़ के बजट वाली सेमीकॉन 2.0 नीति की रूपरेखा प्रस्तुत की और कहा कि भारत अब नीति-चर्चा से आगे बढ़कर वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर उत्पादन के युग में प्रवेश कर चुका है। तीन दिन तक चले इस आयोजन में 600 से अधिक प्रदर्शकों, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और 52 देशों की भागीदारी के साथ 56 एमओयू, घोषणाएं और रणनीतिक पहल सम्पन्न हुईं।

मुख्य घटनाक्रम

सरकारी बयान के अनुसार, यह भारत की पाँचवीं फ्लैगशिप सेमीकंडक्टर कॉन्फ्रेंस थी। इवेंट में कुल 51,656 पंजीकरण हुए और करीब 40,000 प्रतिभागियों की उपस्थिति दर्ज की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने युवा चिप डिज़ाइनर्स और छात्रों से सीधी बातचीत की तथा वर्चुअल माध्यम से दो नई वाणिज्यिक उत्पादन लाइनों का उद्घाटन किया।

ये उत्पादन लाइनें सीडीआईएल सेमीकंडक्टर, मोहाली और सुची सेमीकॉन, सूरत में शुरू हुई हैं। साथ ही सेमीकॉन 1.0 के अंतर्गत स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से 5 यूनिट अब पूरी तरह परिचालन में आ चुकी हैं।

सेमीकॉन 2.0 की रूपरेखा

सेमीकॉन 2.0 को 6 स्तंभों पर बनाया गया है — डिज़ाइन, मशीन और मटेरियल, नई फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च और टैलेंट डेवलपमेंट। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन की हर कड़ी में भारत की क्षमता को मज़बूत करना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधीकरण की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और अमेरिका, जापान व यूरोपीय देश चीन पर अपनी निर्भरता घटाने में जुटे हैं।

अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और पवेलियन

इस बार 6 देशों के पवेलियन लगाए गए — जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन। इसके अतिरिक्त 12 राज्यों के पवेलियन, एक स्टार्टअप पवेलियन, वर्कफोर्स डेवलपमेंट जोन, इनोवेशन शोकेस और स्टूडेंट हैकाथॉन भी आयोजित किए गए, जिनमें सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया गया।

56 एमओयू का दायरा

तीन दिनों में सम्पन्न हुए 56 एमओयू और घोषणाएं सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, उपकरण और सामग्री, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D), लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी कमर्शियलाइज़ेशन, स्किलिंग और वर्कफोर्स डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों को समेटे हुए हैं।

बयान के अनुसार, इन समझौतों में सेमीकंडक्टर निर्माताओं, उपकरण कंपनियों, डिज़ाइन फर्मों, शिक्षण संस्थानों और स्किलिंग संगठनों के बीच सहयोग एवं निवेश योजनाओं की महत्वपूर्ण घोषणाएं शामिल हैं।

क्या होगा आगे

सेमीकॉन 2.0 की नीति और उसके क्रियान्वयन का ढाँचा अब उद्योग जगत की नज़रों में है। विशेषज्ञों के अनुसार, ₹1,27,500 करोड़ के इस बजट का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि डिज़ाइन से लेकर फैब्रिकेशन तक प्रत्येक स्तंभ को किस गति से ज़मीन पर उतारा जाता है। भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए यह आयोजन एक निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

27,500 करोड़ की सेमीकॉन 2.0 और 56 एमओयू एक साहसी दृष्टि का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि फैब्रिकेशन जैसे पूँजी-गहन क्षेत्रों में निजी निवेश को वास्तव में ज़मीन पर कैसे उतारा जाएगा। सेमीकॉन 1.0 के 12 में से केवल 5 यूनिटों का परिचालन में आना यह बताता है कि क्रियान्वयन की रफ़्तार घोषणाओं की रफ़्तार से अक्सर पीछे रहती है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन का यह अवसर क्षणभंगुर है — यदि नीति ढाँचा उद्योग की माँग के अनुरूप नहीं बदला, तो प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाएं इस खाली जगह को भर देंगी। 56 एमओयू की वास्तविक परीक्षा अगले 18 से 24 महीनों में होगी, जब इनका परिणाम नौकरियों और उत्पादन के आँकड़ों में दिखना चाहिए।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन इंडिया 2026 क्या है और इसमें क्या हुआ?
सेमीकॉन इंडिया 2026 भारत की पाँचवीं और सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर कॉन्फ्रेंस है, जो नई दिल्ली में तीन दिनों तक आयोजित हुई। इसमें 52 देशों और 600 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी के साथ 56 एमओयू और रणनीतिक घोषणाएं की गईं।
सेमीकॉन 2.0 नीति क्या है और इसका बजट कितना है?
सेमीकॉन 2.0 भारत सरकार की नई सेमीकंडक्टर नीति है, जिसके लिए ₹1,27,500 करोड़ का बजट रखा गया है। यह 6 स्तंभों — डिज़ाइन, मशीन और मटेरियल, नई फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च और टैलेंट डेवलपमेंट — पर आधारित है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में किन नई उत्पादन लाइनों का उद्घाटन हुआ?
PM मोदी ने वर्चुअल माध्यम से सीडीआईएल सेमीकंडक्टर, मोहाली और सुची सेमीकॉन, सूरत में दो नई वाणिज्यिक उत्पादन लाइनें शुरू कीं। साथ ही सेमीकॉन 1.0 के 12 में से 5 प्रोजेक्ट अब पूरी तरह परिचालन में आ चुके हैं।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में किन देशों ने भाग लिया?
इस आयोजन में कुल 52 देशों की भागीदारी रही। 6 देशों — जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन — के अलग पवेलियन लगाए गए थे।
सेमीकॉन इंडिया 2026 के 56 एमओयू किन क्षेत्रों से जुड़े हैं?
ये एमओयू सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, उपकरण और सामग्री, AI, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, R&D, लॉजिस्टिक्स, स्किलिंग और वर्कफोर्स डेवलपमेंट जैसे विविध क्षेत्रों को कवर करते हैं। इनमें निर्माताओं, डिज़ाइन फर्मों और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग शामिल है।
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