17 सितंबर 2026
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सेमीकॉन इंडिया 2026: मोदी बोले — 'भारत की चिप्स दुनिया भर में जाएंगी', GDP वृद्धि दर 7.8% रही

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सेमीकॉन इंडिया 2026: मोदी बोले — 'भारत की चिप्स दुनिया भर में जाएंगी', GDP वृद्धि दर 7.8% रही

सारांश

वैश्विक अनिश्चितता के बीच 7.8% की विकास दर, 3,000 किमी का फ्रेट कॉरिडोर, और 'भारत की चिप्स दुनिया भर में जाएंगी' — सेमीकॉन इंडिया 2026 में PM मोदी ने भारत को सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनाने का रोडमैप पेश किया। सेमीकॉन 2.0 के तहत 200 स्टार्टअप्स और 4 साल में 70,000 इंजीनियर — संख्याएँ बोल रही हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2026 को सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के बाद भारत की चिप इंडस्ट्री को वैश्विक निर्यातक बनाने का संकल्प दोहराया।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की।
सेमीकॉन 2.0 के तहत सरकार कम से कम 200 चिप-डिज़ाइन स्टार्टअप्स को समर्थन देगी; पहले चरण के 20 स्टार्टअप्स ने ₹800 करोड़ की वेंचर फंडिंग जुटाई।
भारत ने 10 साल के लक्ष्य के विरुद्ध 4 साल में ही 70,000 चिप डिज़ाइन इंजीनियर तैयार किए; 400+ विश्वविद्यालयों में EDA टूल्स उपलब्ध।
लगभग 3,000 किमी लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने से लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को आम सहमति से अपनाया गया, जिसे मोदी ने वैश्विक भरोसे का प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2026 को सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के बाद कहा कि भारत की चिप इंडस्ट्री तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है और भारतीय सेमीकंडक्टर दुनिया भर में निर्यात होंगे। वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की है।

मुख्य घोषणाएँ और संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सेमीकॉन इंडिया 2026 मंच से कहा, 'भारत की चिप्स दुनिया भर में जाएंगी।' उन्होंने पिछले 15 दिनों में देश में हुई महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी गतिविधियों का उल्लेख किया। इनमें मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट शामिल था, जहाँ एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइज़ेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के माध्यम से सभी नागरिकों को वित्तीय सेवाएँ पहुँचाने पर चर्चा हुई।

मोदी ने लगभग 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने का भी जिक्र किया। उनके अनुसार ये फ्रेट कॉरिडोर देश भर में माल की आवाजाही को तेज करेंगे, लॉजिस्टिक्स की लागत घटाएंगे और मैन्युफैक्चरिंग को नई गति देंगे।

सॉवरेन रेटिंग और ब्रिक्स: वैश्विक भरोसे के संकेत

प्रधानमंत्री ने एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते वैश्विक विश्वास का प्रमाण है। इसके साथ ही उन्होंने भारत की मेजबानी में हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि आम सहमति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाना भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव का संकेत है।

सेमीकॉन 2.0: छह स्तंभों पर टिका इकोसिस्टम

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 'सेमीकॉन 2.0' कार्यक्रम छह स्तंभों पर भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करेगा — चिप डिजाइन, मशीन और मटेरियल, फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और टैलेंट विकास। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर प्रोग्राम के पहले चरण में 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने भाग लिया, जिनमें से करीब 20 स्टार्टअप्स ने ₹800 करोड़ की वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल की।

सेमीकॉन 2.0 के तहत सरकार का लक्ष्य कम से कम 200 चिप-डिजाइन स्टार्टअप्स और कंपनियों को समर्थन देना है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है और ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देश इस दौड़ में आगे हैं।

इंजीनियरिंग प्रतिभा: लक्ष्य से चार साल पहले उपलब्धि

वैष्णव ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि का खुलासा किया — भारत ने 10 साल में 85,000 डिजाइन इंजीनियर तैयार करने के प्रारंभिक लक्ष्य के मुकाबले, मात्र चार वर्षों में ही 70,000 इंजीनियर तैयार कर लिए हैं। गौरतलब है कि अब देश भर की 400 से अधिक विश्वविद्यालयों में इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जो चिप डिज़ाइन में प्रतिभा की नींव मजबूत कर रहे हैं।

भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा अब सिर्फ नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं रही — स्टार्टअप फंडिंग, विश्वविद्यालय स्तर पर बुनियादी ढाँचा और वैश्विक निवेशकों की रुचि, तीनों मिलकर इस क्षेत्र को नई दिशा दे रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि भारत चिप डिज़ाइन इंजीनियरिंग की क्षमता को वास्तविक घरेलू विनिर्माण में कितनी तेज़ी से बदल पाता है। ताइवान और दक्षिण कोरिया दशकों की संचित तकनीक और पूँजी के दम पर इस क्षेत्र में अग्रणी हैं — भारत के 70,000 इंजीनियर और 105 स्टार्टअप्स शानदार आरंभ हैं, पर फैब्रिकेशन में निवेश और वैश्विक ऑर्डर हासिल करना अभी बाकी है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और फिनटेक फेस्ट जैसी उपलब्धियाँ व्यापक आर्थिक ताने-बाने को मज़बूत करती हैं, लेकिन सेमीकॉन 2.0 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि 'सेमीकॉन 2.0' के छह स्तंभ वादे से जमीनी हकीकत में कितनी तेज़ी से तब्दील होते हैं।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन इंडिया 2026 में PM मोदी ने क्या घोषणा की?
PM मोदी ने 17 सितंबर 2026 को सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के बाद कहा कि भारत की चिप इंडस्ट्री तेज़ रफ्तार से बढ़ रही है और 'भारत की चिप्स दुनिया भर में जाएंगी।' उन्होंने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर का भी उल्लेख किया।
सेमीकॉन 2.0 क्या है और इसके मुख्य लक्ष्य क्या हैं?
सेमीकॉन 2.0 भारत सरकार का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकास कार्यक्रम है जो छह स्तंभों — चिप डिज़ाइन, मशीन और मटेरियल, फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और टैलेंट — पर आधारित है। इसका लक्ष्य कम से कम 200 चिप-डिज़ाइन स्टार्टअप्स और कंपनियों को समर्थन देना है।
भारत ने चिप डिज़ाइन इंजीनियर तैयार करने में कितनी प्रगति की है?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार भारत ने 10 साल में 85,000 डिज़ाइन इंजीनियर तैयार करने के लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 4 वर्षों में 70,000 इंजीनियर तैयार कर लिए हैं। देश भर की 400 से अधिक विश्वविद्यालयों में अब इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स उपलब्ध हैं।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से भारत को क्या फायदा होगा?
PM मोदी ने कहा कि लगभग 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने से माल की आवाजाही तेज होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और मैन्युफैक्चरिंग को नई गति मिलेगी। यह देश की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' का क्या महत्व है?
PM मोदी ने बताया कि भारत की मेजबानी में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को आम सहमति से अपनाया गया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक भरोसे का एक और प्रमाण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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