भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम: 12 परियोजनाओं में ₹1.64 लाख करोड़ का निवेश, सेमीकॉन इंडिया 2026 का 17 सितंबर को उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेज़ी से आकार ले रहा है — न केवल चिप निर्माण संयंत्रों के रूप में, बल्कि डिजाइनिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण और सप्लाई चेन के हर स्तर पर। सेमीकॉन इंडिया 2026 से पहले जारी सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और इनमें ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में करेंगे।
सेमीकॉन इंडिया 2026 की थीम और आयोजन
इस वर्ष सेमीकॉन इंडिया की थीम है — 'सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना।' यह थीम उस व्यापक सोच को दर्शाती है जिसमें भारत केवल एक-दो फैब प्लांट लगाकर संतुष्ट नहीं होना चाहता, बल्कि एक संपूर्ण और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला खड़ी करना चाहता है। इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख चिप कंपनियों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और निवेशक हिस्सा लेंगे।
सेमीकॉन 1.0 से 2.0 तक का सफर
2021 में शुरू किए गए सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के पहले चरण — सेमीकॉन 1.0 — के लिए ₹76,000 करोड़ का प्रावधान किया गया था। इसमें चिप डिजाइन और निर्माण से लेकर पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, कच्चे माल और कुशल कार्यबल तक पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया।
जुलाई 2026 में सरकार ने सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी, जिसके लिए ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान है। इसके छह प्रमुख स्तंभ हैं — चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर मशीनरी और सामग्री, चिप निर्माण संयंत्र, आधुनिक पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास, तथा कुशल प्रतिभाओं का निर्माण।
ज़मीन पर क्या हुआ: तीन संयंत्रों में उत्पादन शुरू
अनुमोदित 12 परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट, डिस्प्ले निर्माण इकाइयाँ और आधुनिक पैकेजिंग सुविधाएँ शामिल हैं। गौरतलब है कि इनमें से तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है — जो यह संकेत देता है कि भारत की चिप नीति अब केवल कागज़ तक सीमित नहीं रही।
चिप डिजाइन और प्रतिभा विकास में प्रगति
'चिप्स टू स्टार्टअप' (C2S) कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) सॉफ्टवेयर और उपकरण अब तक 320 शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध कराए गए हैं और 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के तहत 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता और 105 स्टार्टअप व लघु-मझोले उद्यमों को EDA टूल्स के लिए सहायता प्रदान की गई है। अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों ने 211 चिप डिजाइन 'टेप-आउट' चरण तक पहुँचाए — यह दर्शाता है कि देश में चिप डिजाइन क्षमता अब कुछ चुनिंदा संस्थानों तक सीमित नहीं रही।
राष्ट्रीय साझा सुविधा के रूप में स्थापित चिपइन सेंटर से 500 से अधिक संस्थानों के 1 लाख से ज़्यादा इंजीनियर — जिनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं — लाभान्वित हो चुके हैं। इन संस्थानों ने मिलकर 300 से अधिक चिप डिजाइन तैयार किए हैं, जिन्हें मोहाली स्थित SCL और विदेशों की आधुनिक फैब्रिकेशन सुविधाओं में उत्पादन के लिए भेजा गया है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला को लेकर देशों के बीच होड़ तेज़ हो रही है और अमेरिका, यूरोप व ताइवान जैसे क्षेत्र अपनी घरेलू चिप क्षमता बढ़ाने में अरबों डॉलर लगा रहे हैं। भारत की इस रणनीतिक पहल की असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह निवेश प्रतिबद्धताएँ समयबद्ध उत्पादन में तब्दील होती हैं और क्या घरेलू चिप डिजाइन क्षमता वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकती है।