भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को मिली ₹11,700 करोड़ की इक्विटी फंडिंग, 2025 के बाद निवेश में 36% CAGR की रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। ट्रैक्सन की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश के सेमीकंडक्टर क्षेत्र ने अब तक 281 वित्तपोषित कंपनियों के ज़रिए कुल 1.4 अरब डॉलर (लगभग ₹11,700 करोड़) की इक्विटी फंडिंग जुटाई है। इनमें से 701 मिलियन डॉलर — यानी कुल निवेश का लगभग आधा — 2025 के बाद प्राप्त हुआ है, जो क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते भरोसे का स्पष्ट संकेत है।
उद्योग का मौजूदा आकार और फंडिंग की रफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फिलहाल 3,557 सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियाँ कार्यरत हैं। इनमें से 281 कंपनियों को फंडिंग मिली है और 142 कंपनियों ने इक्विटी निवेश जुटाने में सफलता पाई है। केवल वर्ष 2026 में अब तक इस उद्योग ने 228 मिलियन डॉलर की फंडिंग आकर्षित की है।
वार्षिक फंडिंग के लिहाज से यह वृद्धि और भी उल्लेखनीय है — 2021 में 49 मिलियन डॉलर से बढ़कर यह 2025 में 473 मिलियन डॉलर तक पहुँच गई। इस अवधि में क्षेत्र ने 36% से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की — जो किसी भी उभरते तकनीकी क्षेत्र के लिए असाधारण है।
कौन-से सेगमेंट में सबसे अधिक निवेश
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सबसे अधिक निवेश खींचने वाला सेगमेंट रहा है। 2025 के बाद से इस क्षेत्र में अकेले 313 मिलियन डॉलर का निवेश आ चुका है।
दूसरे स्थान पर एम्बेडेड हार्डवेयर रहा, जिसने 51.9 मिलियन डॉलर जुटाए — और यह पूरी राशि पिछले 12 महीनों में प्राप्त हुई है। इसके अलावा, पावर मैनेजमेंट इंटीग्रेटेड सर्किट्स और फैबलेस सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरर्स भी प्रमुख निवेश श्रेणियों में शामिल रहे।
बेंगलुरु बना देश का सेमीकंडक्टर हब
शहरवार विश्लेषण में बेंगलुरु भारत का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर केंद्र बनकर उभरा है। यहाँ 626 कंपनियाँ स्थित हैं, जो देश की कुल सेमीकंडक्टर कंपनियों का लगभग 18% हैं। फंडिंग के मामले में भी बेंगलुरु शीर्ष पर है — कुल इक्विटी फंडिंग में इसकी हिस्सेदारी 40.1% रही है।
नोएडा, गुरुग्राम, कोच्चि और हैदराबाद अन्य प्रमुख उभरते सेमीकंडक्टर केंद्रों के रूप में सामने आए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कंपनियाँ चीन और ताइवान पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत भारत की ओर रुख कर रही हैं।
निवेशकों के लिए एग्ज़िट मार्ग और समयसीमा
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस क्षेत्र में अधिग्रहण (Acquisition) सबसे लोकप्रिय निकास मार्ग बना हुआ है। अब तक 62 अधिग्रहण दर्ज किए गए हैं, जबकि 42 कंपनियाँ आईपीओ (IPO) के ज़रिए सार्वजनिक बाज़ार तक पहुँची हैं। पहली फंडिंग से अधिग्रहण तक पहुँचने में औसतन 11.8 वर्ष लगे, जबकि IPO का रास्ता अपनाने वाली कंपनियों को औसतन 16.5 वर्ष लगे।
सेमीकॉन इंडिया 2026 और सरकारी नीतियों की भूमिका
यह रिपोर्ट ऐसे नाज़ुक मोड़ पर आई है जब सेमीकॉन इंडिया 2026 सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन 17 से 19 सितंबर के बीच नई दिल्ली में होने वाला है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। उद्योग जगत को उम्मीद है कि यह आयोजन भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिज़ाइन केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ, सेमीकंडक्टर मिशन, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की कोशिशें और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में तेज़ी इस उछाल के प्रमुख कारण रहे हैं। गौरतलब है कि 2021 में शुरू हुई सेमीकंडक्टर मिशन से जुड़ी नीतियों ने ही निवेश के इस प्रवाह को संस्थागत आधार दिया।
आने वाले महीनों में सेमीकॉन इंडिया 2026 के नतीजे और PLI क्रियान्वयन की गति यह तय करेगी कि क्या भारत ताइवान और दक्षिण कोरिया के विकल्प के रूप में खुद को वास्तव में स्थापित कर पाता है।