ब्रिक्स समिट सफल रही, राहुल गांधी के नॉनवेज बयान पर रामदास आठवले का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 13 सितंबर 2026 को मुरादाबाद में मीडिया से बातचीत में नई दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को पूर्णतः सफल बताया और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'नॉनवेज' संबंधी बयान को सम्मेलन के संदर्भ में अप्रासंगिक करार दिया। आठवले ने स्पष्ट किया कि शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी हुई, एक साझा घोषणापत्र जारी किया गया और पहलगाम आतंकी हमले की निंदा में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया।
राहुल गांधी के बयान की पृष्ठभूमि
दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा कि '80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं' और भारतीय मांसाहारी खाना स्वादिष्ट होता है — साथ ही अपनी बहन के छोले-भटूरे का भी उल्लेख किया। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ब्रिक्स समिट के दौरान विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित रात्रि भोज के एक दिन बाद आया, जिसमें कथित तौर पर केवल शाकाहारी व्यंजन परोसे गए थे और उस भोज का मेन्यू सार्वजनिक हो चुका था।
आठवले का पलटवार
रामदास आठवले ने सीधे शब्दों में कहा कि राहुल गांधी नॉनवेज खाते होंगे, परंतु ब्रिक्स समिट का विषय नॉनवेज से कतई जुड़ा हुआ नहीं है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी कुछ भी बोलते रहें, लेकिन इस सम्मेलन में किसी भी तरह का नॉनवेज का प्रश्न नहीं उठता।' आठवले के अनुसार, सभी देशों के प्रमुखों ने आपसी सहयोग और समर्थन पर बल दिया और समिट हर दृष्टि से सफल रही।
आकाश आनंद पर बसपा का आंतरिक मामला
रामदास आठवले ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह बसपा का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद को बार-बार पार्टी से बाहर किया जा रहा है, इसलिए उन्होंने उन्हें खुला आमंत्रण दिया है कि यदि वे चाहें तो उनके साथ आ सकते हैं।
गरबा विवाद पर संतुलित रुख
महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान गरबा उत्सव में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर जारी बयानबाज़ी पर भी आठवले ने अपना पक्ष रखा। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने कहा था कि गरबा उत्सव किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होना चाहिए। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता नितेश राणे ने गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुसलमानों की भागीदारी पर प्रतिबंध लगाने की बात करते हुए विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के रुख का समर्थन किया था।
आठवले ने स्पष्ट किया कि वे नितेश राणे के बयान से सहमत नहीं हैं और अमृता फडणवीस की बात से इत्तेफाक रखते हैं। उन्होंने कहा कि गरबा पंडालों में सभी का स्वागत होना चाहिए। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक सौहार्द के संदेश का हवाला देते हुए कहा कि समाज में भाईचारे और प्रेम का वातावरण बनाए रखना ज़रूरी है।
आगे क्या
ब्रिक्स समिट के बाद जारी साझा घोषणापत्र और पहलगाम हमले की निंदा के प्रस्ताव की कूटनीतिक प्रतिध्वनि आने वाले दिनों में देखी जाएगी। वहीं, राहुल गांधी के बयान और आठवले के पलटवार ने राजनीतिक बहस को एक बार फिर खान-पान की पहचान और सांस्कृतिक राजनीति के इर्द-गिर्द केंद्रित कर दिया है, जो निकट भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है।