ब्रिक्स सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव विश्व कल्याण में योगदान देगा: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में राम कथा के भूमि पूजन कार्यक्रम में शिरकत की और इस अवसर पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में पारित यह प्रस्ताव वैश्विक स्तर पर कल्याण और शांति में योगदान देगा।
राम कथा आयोजन और सांस्कृतिक संकल्प
शेखावत ने भूमि पूजन के दौरान बताया कि सनातन संस्कारम के अंतर्गत इस वर्ष भी 'श्री राम कथा' का आयोजन किया जा रहा है। उनके अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को भारत की सनातन सभ्यता, संस्कृति और विचारों से जोड़ना है।
मंत्री ने कहा, 'यह भव्य और दिव्य आयोजन और इसके जरिए बनने वाला सांस्कृतिक माहौल, निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी और मौजूदा पीढ़ी को भारत की सनातन सभ्यता, संस्कृति और विचारों से जोड़ने के संकल्प को पूरा करेगा।'
ब्रिक्स प्रस्ताव पर सरकार का पक्ष
शेखावत ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और आतंकवाद के विरुद्ध जारी ब्रिक्स घोषणा को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि जी-20 के बाद ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालना और इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना भारत के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
मंत्री के अनुसार, 'भारत ने आतंकवाद, आतंकी घटनाओं, अवैध हथियारों और नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ वैश्विक मंचों पर हमेशा मजबूती से अपना पक्ष रखा है।' उन्होंने यह भी कहा कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल और तनाव के दौर में ब्रिक्स जैसे मंच बातचीत का रास्ता बनाते हैं।
दिल्ली घोषणा: पहलगाम हमले की निंदा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली घोषणा को अपनाने का प्रस्ताव रखा। इस घोषणा में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की गई।
घोषणा में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी उद्देश्य से, कहीं भी और किसी के भी द्वारा किए गए आतंकवादी कृत्य आपराधिक और अनुचित हैं तथा उनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। साथ ही, आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आह्वान किया गया।
आतंकवाद पर ब्रिक्स की प्रतिबद्धता
ब्रिक्स देशों ने एकमत होकर कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। घोषणा पत्र में आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने वालों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई का आह्वान किया गया।
इसके अलावा, आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों और उनके समर्थकों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत न्याय के कटघरे में लाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई।
संस्कृति और पर्यटन: शांति के सेतु
शेखावत ने जोर देकर कहा कि संस्कृति और पर्यटन दो ऐसे महत्त्वपूर्ण माध्यम हैं जिनके जरिए देश आपसी मतभेदों और तनावों को कम कर सकते हैं। उनके अनुसार, सभ्यता और संस्कृति देशों को एकजुट करने का स्वाभाविक रास्ता बनाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में तेज़ उथल-पुथल देखी जा रही है, और बहुपक्षीय मंचों की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है।