30 अगस्त 2026
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भागवत का न्यूयॉर्क में ऐलान: आरएसएस देगा वैश्विक अंतर-धार्मिक पहल को पूरा समर्थन, 30 देशों के 180 प्रतिनिधियों को किया संबोधित

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भागवत का न्यूयॉर्क में ऐलान: आरएसएस देगा वैश्विक अंतर-धार्मिक पहल को पूरा समर्थन, 30 देशों के 180 प्रतिनिधियों को किया संबोधित

सारांश

न्यूयॉर्क के अंतर-धार्मिक मंच पर मोहन भागवत ने आरएसएस को वैश्विक एकता आंदोलन का हिस्सा घोषित किया — 30 देशों के 180 प्रतिनिधियों के सामने। 'विविधता हमारी एकता की सजावट है' — यह संदेश संघ की परंपरागत छवि से परे एक नई कूटनीतिक भाषा है।

मुख्य बातें

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क में 'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' सम्मेलन में वैश्विक अंतर-धार्मिक पहल को संघ का पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
कार्यक्रम में 30 देशों के 180 से अधिक धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
भागवत ने कहा कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।
2018 में दिल्ली में मुस्लिम प्रतिभागियों के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि तब से मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ संवाद जारी है।
संघ प्रमुख ने अंतर-धार्मिक संवाद को ब्लॉक और जिला स्तर तक ले जाने का आह्वान किया, राजनीति पर नहीं बल्कि समाज पर भरोसा जताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित अंतर-धार्मिक सम्मेलन में घोषणा की कि आरएसएस उन धार्मिक नेताओं के साथ पूरी ताकत से खड़ा है जो वैश्विक स्तर पर अंतर-धार्मिक सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर निरंतर प्रयासों से दुनिया में व्याप्त संघर्ष और अविश्वास की दीवारें गिराई जा सकती हैं।

सम्मेलन का मंच और भागीदारी

'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में 30 देशों के 180 से अधिक धार्मिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भागवत ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, 'आरएसएस पूरी ताकत के साथ आपके साथ है, क्योंकि हम एक ही सोच पर हैं।' यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक स्तर पर सांप्रदायिक तनाव और धार्मिक ध्रुवीकरण की चर्चाएँ तेज़ हैं।

विविधता और एकता पर मुख्य संदेश

संघ प्रमुख ने धार्मिक विविधता को मानवता की शक्ति बताया। उन्होंने कहा, 'विविधता हमारी आंतरिक एकता की सजावट है। इसे स्वीकार करना होगा। इसका सम्मान करना होगा। इसकी रक्षा करनी होगी। जैसे मैं अपनी विशिष्ट प्रकृति की रक्षा करता हूँ, वैसे ही मुझे दूसरों की भी रक्षा करनी होगी।' भागवत ने यह भी कहा कि अलग-अलग धर्म एक ही अंतिम सत्य तक पहुँचने के भिन्न-भिन्न मार्ग हैं, और विविधता प्रकृति का नियम है जबकि एकता उसके पीछे का सत्य है।

मुसलमानों पर आरएसएस का स्पष्ट रुख

सम्मेलन में भागवत से आरएसएस के मुसलमानों के प्रति दृष्टिकोण पर भी सवाल पूछे गए। उन्होंने 2018 में दिल्ली में मुस्लिम प्रतिभागियों के साथ हुई एक बैठक का हवाला देते हुए कहा, 'तब मैंने कहा था — नहीं। वह हिंदू नहीं है। अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू होने की शर्त यह है कि व्यक्ति यह माने कि सभी रास्ते एक ही ओर ले जाते हैं और हर इंसान की गरिमा समान है। गौरतलब है कि भागवत ने बताया कि उस 2018 की बैठक के बाद से भारत में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ संवाद निरंतर जारी है।

राजनीति नहीं, समाज से होगी शुरुआत

भागवत ने अंतर-धार्मिक समरसता के लिए राजनीतिक मंचों पर निर्भरता को अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा, 'ये चीजें राजनीति से नहीं होतीं। दुख के साथ कहना पड़ रहा है, लेकिन सच यह है कि राजनीति अब स्वार्थ का खेल बन गई है। हम और हमारा समाज ही समाधान है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब समाज में मजबूत जन-सहमति बनती है, तो लोकतंत्र में राजनेताओं के लिए उसे नजरअंदाज करना कठिन हो जाता है।

स्थानीय स्तर तक संवाद ले जाने का आह्वान

संघ प्रमुख ने अंतर-धार्मिक संवाद को राष्ट्रीय मंचों से आगे ले जाकर प्रांत, जिले और स्थानीय ब्लॉक स्तर तक विस्तारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'अगर हम मिलकर काम करना शुरू करें, तो हम दुनिया की स्थिति को बदल सकते हैं।' साथ ही उन्होंने यह भी चेताया कि इस प्रयास में धैर्य अनिवार्य है, क्योंकि सोच बदलने में समय लगता है। आरएसएस प्रमुख का यह वैश्विक संबोधन भारत के भीतर और बाहर संघ की छवि और कूटनीतिक पहुँच के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इनकी परीक्षा भारत के उन जिलों और कस्बों में होगी जहाँ सांप्रदायिक तनाव की घटनाएँ सामने आती रही हैं। राजनीति को 'स्वार्थ का खेल' कहना और साथ ही यह कहना कि समाज की सहमति राजनीति को प्रभावित करती है — यह विरोधाभास भाषण की सबसे महत्त्वपूर्ण अनकही पंक्ति है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्या घोषणा की?
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क में 'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' सम्मेलन में कहा कि आरएसएस वैश्विक अंतर-धार्मिक सहयोग को बढ़ावा देने वाले धार्मिक नेताओं के साथ पूरी ताकत से खड़ा है। उन्होंने जमीनी स्तर पर निरंतर प्रयासों को दुनिया में संघर्ष और अविश्वास कम करने का मुख्य उपाय बताया।
'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' सम्मेलन में कितने देश शामिल हुए?
इस सम्मेलन में 30 देशों के 180 से अधिक धार्मिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह आयोजन न्यूयॉर्क में हुआ और इसका उद्देश्य अंतर-धार्मिक संवाद और सहयोग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करना था।
भागवत ने मुसलमानों के बारे में आरएसएस का क्या रुख स्पष्ट किया?
भागवत ने 2018 में दिल्ली में मुस्लिम प्रतिभागियों के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि जो हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, वह हिंदू नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि हिंदू होने की शर्त यह है कि सभी मनुष्यों की गरिमा को समान माना जाए और सभी रास्तों को एक ही सत्य की ओर ले जाने वाला समझा जाए।
भागवत ने अंतर-धार्मिक संवाद के लिए राजनीति की बजाय किस पर जोर दिया?
संघ प्रमुख ने कहा कि अंतर-धार्मिक समरसता की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि समाज के भीतर से होनी चाहिए। उन्होंने राजनीति को 'स्वार्थ का खेल' बताया और कहा कि जब समाज में मजबूत जन-सहमति बनती है तो लोकतंत्र में राजनेता उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते।
आरएसएस इस अंतर-धार्मिक संदेश को किस स्तर तक ले जाना चाहता है?
भागवत ने अंतर-धार्मिक संवाद को केवल राष्ट्रीय नेतृत्व के मंचों तक सीमित न रखते हुए प्रांत, जिले और स्थानीय ब्लॉक स्तर तक ले जाने का आह्वान किया। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर जुड़ाव और सामुदायिक सेवा से अविश्वास को दूर किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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