RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क संबोधन की भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने की भूरि-भूरि प्रशंसा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में धार्मिक एवं सामुदायिक नेताओं की एक विशेष बैठक को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने साझा मानवता, जमीनी नेतृत्व तथा परिवार, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण के प्रति प्रवासी भारतीयों की जिम्मेदारी पर जोर दिया। 29 अगस्त को हुई इस बैठक के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रमुख नेताओं ने भागवत के संदेश को असाधारण और प्रेरणादायी बताया।
सबसे यादगार क्षण — जगदीश सेहवानी
अमेरिकन इंडिया पब्लिक अफेयर्स कमेटी (AIPAC) के अध्यक्ष जगदीश सेहवानी ने इस संबोधन को अमेरिका में अपने लगभग चार दशकों के जीवन का सबसे यादगार क्षण करार दिया। सेहवानी ने कहा, 'आज मेरे जीवन का सबसे यादगार दिन है। मैं लगभग 40 साल से यहाँ हूँ और मैंने दुनियाभर के तमाम नेताओं को सुना है।' उन्होंने बताया कि भागवत ने भारत, सनातन परंपराओं, हिंदुत्व और भारतीय प्रवासियों द्वारा अमेरिका में दिए जा सकने वाले योगदान को बेहद सरल और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया।
सेहवानी ने यह भी उल्लेख किया कि कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथि भी संबोधन से गहरे प्रभावित हुए। उन्होंने स्थिरता, पारिवारिक जीवन और व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर संघ प्रमुख की चर्चा को रेखांकित करते हुए कहा, 'ये छोटी-छोटी बातें हैं, लेकिन इनका बहुत महत्व है।'
संघ के कार्य-पद्धति को लेकर भागवत ने स्पष्ट किया कि संगठन कार्यकर्ताओं को तैयार करता है और आगे क्या करना है, यह स्वयं कार्यकर्ताओं पर निर्भर करता है। सेहवानी के अनुसार यह व्याख्या उन श्रोताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी रही जो संघ के बारे में कम जानते थे।
स्वास्थ्य और शिक्षा में सेवा — प्रो. अनुराग मैराल
सेवा बे एरिया चैप्टर के अध्यक्ष और स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर अनुराग मैराल ने भागवत के स्वयंसेवक-निर्माण मॉडल की सराहना की। मैराल ने कहा, 'वे कह रहे थे कि संघ लोगों को तैयार करने पर ध्यान देता है। जो लोग प्रशिक्षित होते हैं और स्वयंसेवक बनते हैं, वे आगे चलकर कई तरह के काम करते हैं।'
उन्होंने स्वास्थ्य असमानता, शिक्षा में समानता और भोजन की कमी जैसे क्षेत्रों में 'सेवा' के स्वयंसेवकों के कार्यों का उल्लेख किया। मैराल ने साझा मानवता के भागवत के संदेश को भारतीय समुदाय से परे सार्वभौमिक महत्व का बताते हुए कहा, 'हमारी संस्कृति अलग हो सकती है, हमारी भाषाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन हम एक ही लोग हैं।'
स्थानीय क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, 'ऊपर से नीचे वाला तरीका हमेशा काम नहीं करता।' उनके अनुसार समुदायों को अपनी समस्याओं का समाधान खुद करने के लिए सशक्त बनाना इस संदेश का मूल सार था।
युवा पीढ़ी तक सांस्कृतिक विरासत — राखी इसरानी
सेवा इंटरनेशनल की पब्लिक अफेयर्स उपाध्यक्ष और कैलिफोर्निया की अटॉर्नी राखी इसरानी ने बताया कि भागवत के भाषण में युवा पीढ़ी तक सांस्कृतिक ज्ञान पहुँचाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा, 'यह हमारा फर्ज है कि हम अपने बच्चों के साथ समय बिताएँ, ताकि वे भी अपनी अहमियत को समझ सकें।'
परिवार, पर्यावरण और दायित्व — नरसिम्हम देशिका
दीर्घकालीन RSS कार्यकर्ता और चिकित्सक नरसिम्हम देशिका ने परिवार, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण के प्रति दायित्वों पर भागवत की टिप्पणियों को संबोधन के सबसे सशक्त अंशों में गिना। उनके अनुसार ये विषय प्रवासी भारतीयों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़े हुए हैं।
आगे क्या
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिकी सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका को लेकर अधिक सक्रिय हो रहा है। गौरतलब है कि संघ प्रमुख की इस तरह की विदेश यात्राएँ और प्रवासी भारतीय समुदायों से सीधा संवाद संगठन की वैश्विक पहुँच को रेखांकित करता है। समुदाय के नेताओं ने संकेत दिया कि इस संवाद की अनुगूँज आने वाले समय में अमेरिका में भारतीय मूल के समुदायों की सेवा-गतिविधियों को और विस्तार दे सकती है।