आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का अमेरिका दौरा: सिख-अमेरिकी नेता जस्सी ने बताया संवाद का अवसर
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को सिख-अमेरिकी समुदाय के प्रमुख नेता जसदीप सिंह जस्सी ने अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं पर सीधी बातचीत के एक दुर्लभ अवसर के रूप में देखा है। 26 अगस्त को वॉशिंगटन से बोलते हुए जस्सी ने कहा कि भागवत का यह दौरा उनकी स्मृति में सबसे हाई-प्रोफाइल अमेरिकी यात्राओं में से एक है।
दौरे की विशेषता और कार्यक्रम
जस्सी के अनुसार, मोहन भागवत इस यात्रा के दौरान मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ एक बड़े आयोजन में हिस्सा लेंगे, इसके अलावा कई अन्य कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी निर्धारित है। जस्सी ने कहा, 'जहाँ तक मुझे याद है, इससे पहले मोहन भागवत जी का अमेरिका का इतना बड़ा और इतना ज़्यादा चर्चित दौरा मैंने नहीं देखा।' उन्होंने इस यात्रा को अमेरिका में भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच आरएसएस की बढ़ती उपस्थिति का संकेत बताया।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बहुमत का स्वागत
जस्सी ने इस दौरे को अमेरिकी लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक के रूप में भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, अमेरिका उन संगठनों का भी स्वागत करता है जिनके विचारों से सभी सहमत न हों। उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिका में कुछ समूह और व्यक्ति आरएसएस की विचारधारा को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, लेकिन उनका मानना है कि टकराव की बजाय संवाद अधिक फलदायी होता है।
भागवत से अपेक्षाएँ और सिख समुदाय के मुद्दे
जस्सी ने उम्मीद जताई कि भागवत अपने दौरे के दौरान आरएसएस के बारे में प्रचलित गलत धारणाओं को दूर करेंगे और संगठन के उद्देश्य व विचारधारा को सीधे अमेरिकी जनता के सामने स्पष्ट करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें अवसर मिला, तो वे भागवत के सामने सिख अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों को उठाएँगे। जस्सी के शब्दों में, 'अगर मुझे बातचीत का कोई अवसर मिलता है, तो मैं निश्चित रूप से मोहन भागवत के सामने सिख अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों को उठाऊँगा।'
विरोध प्रदर्शन की संभावना
जस्सी ने माना कि भागवत के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं और अमेरिका में इसकी पूरी आज़ादी है। हालाँकि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से संवाद को प्राथमिकता दी और कहा कि कई मुद्दों का समाधान बातचीत के ज़रिए निकाला जा सकता है।
आरएसएस: एक परिचय
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी और संगठन ने 2025 में अपने 100 वर्ष पूरे किए। समय के साथ आरएसएस ने सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय कई सहयोगी संगठनों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया है। मोहन भागवत 2009 से आरएसएस के सरसंघचालक के पद पर कार्यरत हैं। यह दौरा भारत-अमेरिका प्रवासी संबंधों और संगठन की वैश्विक पहुँच के नज़रिए से आने वाले दिनों में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।