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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का अमेरिका दौरा: सिख-अमेरिकी नेता जस्सी ने बताया संवाद का अवसर

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का अमेरिका दौरा: सिख-अमेरिकी नेता जस्सी ने बताया संवाद का अवसर

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का अमेरिका दौरा महज़ एक सामुदायिक कार्यक्रम नहीं — यह भारतीय प्रवासी राजनीति का एक नया अध्याय है। सिख-अमेरिकी नेता जसदीप सिंह जस्सी का स्वागत और संवाद की माँग यह दर्शाती है कि अल्पसंख्यक समुदाय इस दौरे को टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के मंच के रूप में देख रहे हैं।

मुख्य बातें

आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को सिख-अमेरिकी नेता जसदीप सिंह जस्सी ने ऐतिहासिक रूप से सबसे चर्चित यात्रा बताया।
भागवत मैडिसन स्क्वायर गार्डन सहित कई कार्यक्रमों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय से मिलेंगे।
जस्सी ने दौरे को अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं पर सीधे संवाद का अवसर बताया।
जस्सी ने कहा कि अवसर मिलने पर वे सिख समुदाय के मुद्दे सीधे भागवत के सामने उठाएँगे।
विरोध प्रदर्शन की संभावना स्वीकार करते हुए जस्सी ने संवाद को टकराव से बेहतर बताया।
आरएसएस की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी; 2025 में संगठन ने 100 वर्ष पूरे किए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को सिख-अमेरिकी समुदाय के प्रमुख नेता जसदीप सिंह जस्सी ने अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं पर सीधी बातचीत के एक दुर्लभ अवसर के रूप में देखा है। 26 अगस्त को वॉशिंगटन से बोलते हुए जस्सी ने कहा कि भागवत का यह दौरा उनकी स्मृति में सबसे हाई-प्रोफाइल अमेरिकी यात्राओं में से एक है।

दौरे की विशेषता और कार्यक्रम

जस्सी के अनुसार, मोहन भागवत इस यात्रा के दौरान मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ एक बड़े आयोजन में हिस्सा लेंगे, इसके अलावा कई अन्य कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी निर्धारित है। जस्सी ने कहा, 'जहाँ तक मुझे याद है, इससे पहले मोहन भागवत जी का अमेरिका का इतना बड़ा और इतना ज़्यादा चर्चित दौरा मैंने नहीं देखा।' उन्होंने इस यात्रा को अमेरिका में भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच आरएसएस की बढ़ती उपस्थिति का संकेत बताया।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बहुमत का स्वागत

जस्सी ने इस दौरे को अमेरिकी लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक के रूप में भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, अमेरिका उन संगठनों का भी स्वागत करता है जिनके विचारों से सभी सहमत न हों। उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिका में कुछ समूह और व्यक्ति आरएसएस की विचारधारा को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, लेकिन उनका मानना है कि टकराव की बजाय संवाद अधिक फलदायी होता है।

भागवत से अपेक्षाएँ और सिख समुदाय के मुद्दे

जस्सी ने उम्मीद जताई कि भागवत अपने दौरे के दौरान आरएसएस के बारे में प्रचलित गलत धारणाओं को दूर करेंगे और संगठन के उद्देश्य व विचारधारा को सीधे अमेरिकी जनता के सामने स्पष्ट करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें अवसर मिला, तो वे भागवत के सामने सिख अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों को उठाएँगे। जस्सी के शब्दों में, 'अगर मुझे बातचीत का कोई अवसर मिलता है, तो मैं निश्चित रूप से मोहन भागवत के सामने सिख अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों को उठाऊँगा।'

विरोध प्रदर्शन की संभावना

जस्सी ने माना कि भागवत के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं और अमेरिका में इसकी पूरी आज़ादी है। हालाँकि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से संवाद को प्राथमिकता दी और कहा कि कई मुद्दों का समाधान बातचीत के ज़रिए निकाला जा सकता है।

आरएसएस: एक परिचय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी और संगठन ने 2025 में अपने 100 वर्ष पूरे किए। समय के साथ आरएसएस ने सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय कई सहयोगी संगठनों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया है। मोहन भागवत 2009 से आरएसएस के सरसंघचालक के पद पर कार्यरत हैं। यह दौरा भारत-अमेरिका प्रवासी संबंधों और संगठन की वैश्विक पहुँच के नज़रिए से आने वाले दिनों में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक गहरी रणनीतिक समझ है — अमेरिका में आरएसएस की बढ़ती उपस्थिति को नज़रअंदाज़ करने की बजाय उसे संवाद के दायरे में लाना। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका संबंधों में सिख अलगाववाद और खालिस्तान के मुद्दे कूटनीतिक तनाव पैदा कर चुके हैं। मैडिसन स्क्वायर गार्डन जैसे प्रतीकात्मक मंच पर आरएसएस की उपस्थिति भारतीय प्रवासी राजनीति में एक नई परत जोड़ती है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर केवल 'हिंदू राष्ट्रवाद बनाम विरोध' के ढाँचे में सीमित कर देती है। असली सवाल यह है कि क्या भागवत अल्पसंख्यक समुदायों की ठोस शिकायतों पर कोई ठोस जवाब देंगे, या यह दौरा महज़ एक प्रवासी जनसंपर्क अभियान बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत का अमेरिका दौरा क्यों चर्चा में है?
सिख-अमेरिकी नेता जसदीप सिंह जस्सी के अनुसार, यह उनकी स्मृति में आरएसएस प्रमुख की सबसे बड़ी और सबसे चर्चित अमेरिकी यात्रा है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर बड़े सामुदायिक आयोजन के कारण यह दौरा व्यापक ध्यान आकर्षित कर रहा है।
सिख-अमेरिकी नेता जसदीप सिंह जस्सी ने भागवत के दौरे पर क्या कहा?
जस्सी ने दौरे का स्वागत करते हुए इसे अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं पर सीधे संवाद का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यदि अवसर मिला तो वे सिख समुदाय से जुड़े मुद्दे सीधे भागवत के सामने रखेंगे।
क्या भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन होंगे?
जस्सी ने माना कि विरोध प्रदर्शन होने की संभावना है और अमेरिका में इसकी पूरी स्वतंत्रता है। हालाँकि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से संवाद को अधिक फलदायी बताया।
आरएसएस क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी और 2025 में इसने 100 वर्ष पूरे किए। यह सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और राजनीतिक क्षेत्रों में काम करने वाले कई सहयोगी संगठनों का व्यापक नेटवर्क संचालित करता है।
मोहन भागवत कब से आरएसएस के सरसंघचालक हैं?
मोहन भागवत 2009 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक के पद पर कार्यरत हैं। उनका यह अमेरिका दौरा इस कार्यकाल के दौरान सबसे हाई-प्रोफाइल विदेश यात्राओं में से एक माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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