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मोहन भागवत का अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा दौरा: भारत व हिंदुओं के खिलाफ दुष्प्रचार का देंगे जवाब

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मोहन भागवत का अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा दौरा: भारत व हिंदुओं के खिलाफ दुष्प्रचार का देंगे जवाब

सारांश

आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत शीघ्र अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा करेंगे — भारत और हिंदू समाज के विरुद्ध विदेशों में फैले दुष्प्रचार का तथ्यात्मक जवाब देने और 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश विश्व तक पहुँचाने के लिए। यह दौरा संघ के शताब्दी वर्ष की वैश्विक रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जल्द ही अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम का दौरा करेंगे।
दौरे का प्रमुख उद्देश्य भारत, हिंदू समाज और आरएसएस के विरुद्ध विदेशों में फैले दुष्प्रचार और गलतफहमियों का खंडन करना है।
भागवत न्यूयॉर्क में 'यूनिवर्सल वननेस' कार्यक्रम और टोरंटो व लंदन में सामुदायिक नेतृत्व कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
यह दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष में संगठन की वैश्विक पहुँच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
गुदिलोवा (विशाखापत्तनम) में संपन्न तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक में 306 प्रतिनिधि (जिनमें 49 महिलाएँ ) उपस्थित रहे।
बैठक में असम बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा और भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित विकास मॉडल पर चर्चा हुई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत शीघ्र ही अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम का दौरा करेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत, हिंदू समाज और आरएसएस के विरुद्ध विदेशों में फैलाए जा रहे दुष्प्रचार और गलतफहमियों का तथ्यात्मक जवाब देना है। आरएसएस के संयुक्त महासचिव सी.आर. मुकुंद ने 21 अगस्त को विशाखापत्तनम में यह जानकारी दी।

दौरे की पृष्ठभूमि और संदर्भ

सी.आर. मुकुंद ने विशाखापत्तनम के निकट गुदिलोवा में संपन्न हुई आरएसएस और उससे संबद्ध संगठनों की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक के समापन पर मीडिया को संबोधित करते हुए भागवत के प्रस्तावित दौरे का विवरण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष में संगठन की वैश्विक उपस्थिति को सुदृढ़ करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। गौरतलब है कि आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी और संगठन अपने सौवें वर्ष में वैश्विक स्तर पर अपना संदेश प्रसारित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

दौरे के तीन प्रमुख उद्देश्य

मुकुंद के अनुसार, भागवत के इस तीन-देशीय दौरे के स्पष्ट रूप से तीन लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। पहला, दुनिया भर में भारत, हिंदू समाज और आरएसएस के बारे में फैली भ्रांतियों और दुष्प्रचार के विरुद्ध एक तथ्यात्मक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना। दूसरा, भारत के प्राचीन ऋषियों द्वारा प्रतिपादित 'वसुधैव कुटुंबकम' — अर्थात वैश्विक एकता — के संदेश को विश्व के विभिन्न समाजों तक पहुँचाना। तीसरा, विदेशों में रहने वाले हिंदुओं और भारतीय मूल के लोगों के हितों एवं अधिकारों के संदर्भ में वहाँ के मुख्यधारा समाजों के साथ संवाद को प्रोत्साहित करना।

कार्यक्रमों का विवरण

मोहन भागवत इस दौरे में न्यूयॉर्क में आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस' (वैश्विक एकता) कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त वे टोरंटो और लंदन में सामुदायिक नेतृत्व कार्यक्रमों में भी शिरकत करेंगे। ये कार्यक्रम स्थानीय भारतीय समुदाय और व्यापक समाज दोनों को ध्यान में रखकर आयोजित किए जा रहे हैं।

अखिल भारतीय समन्वय बैठक का विवरण

गुदिलोवा में संपन्न इस तीन दिवसीय बैठक में आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले, भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष नितिन नवीन और संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। आमंत्रित 326 प्रतिनिधियों में से 306 ने भाग लिया, जिनमें 49 महिलाएँ शामिल थीं।

बैठक में देश और समाज की वर्तमान स्थिति, विभिन्न संगठनों के कार्यानुभव, भविष्य की चुनौतियाँ और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। असम में आई भीषण बाढ़ के दौरान राष्ट्रीय सेवा भारती, भारतीय किसान संघ, नेशनल मेडिकोज़ ऑर्गनाइज़ेशन (NMO), आरोग्य भारती और BJP कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा भी की गई।

भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित विकास मॉडल

बैठक में भारतीय नजरिए पर आधारित एक वैकल्पिक विकास मॉडल पर भी गहन चर्चा हुई। आर्थिक क्षेत्र में सक्रिय संगठनों के अनुभव साझा किए गए, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विकास आत्मनिर्भर, पर्यावरण-अनुकूल और समाज के सभी वर्गों को समाहित करने वाला हो। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर टिकाऊ विकास की अवधारणा पर बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल भी उठता है कि क्या संघ का यह संदेश उन समाजों में प्रभावी होगा जहाँ भारतीय राजनीति की जटिलताओं को लेकर पहले से ही गहरी धारणाएँ बनी हुई हैं। 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता उस व्यापक संदर्भ पर भी निर्भर करेगी जिसमें इसे प्रस्तुत किया जाएगा।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा क्यों कर रहे हैं?
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का यह दौरा भारत, हिंदू समाज और आरएसएस के विरुद्ध विदेशों में फैले दुष्प्रचार और गलतफहमियों का तथ्यात्मक जवाब देने के लिए है। साथ ही, वे 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश विश्व के विभिन्न समाजों तक पहुँचाएँगे।
भागवत के विदेश दौरे में कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे?
भागवत न्यूयॉर्क में 'यूनिवर्सल वननेस' (वैश्विक एकता) कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके अलावा टोरंटो और लंदन में सामुदायिक नेतृत्व कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे।
यह दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष से कैसे जुड़ा है?
आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी और संगठन अपने शताब्दी वर्ष में वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पर विशेष ध्यान दे रहा है। भागवत का यह दौरा उसी वैश्विक विस्तार रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
विशाखापत्तनम में हुई अखिल भारतीय समन्वय बैठक में क्या हुआ?
गुदिलोवा (विशाखापत्तनम) में तीन दिवसीय बैठक में 306 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 49 महिलाएँ शामिल थीं। बैठक में असम बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा, भविष्य की चुनौतियाँ और भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित विकास मॉडल पर चर्चा हुई।
विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए इस दौरे का क्या महत्व है?
इस दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य विदेशों में रहने वाले हिंदुओं और भारतीय मूल के लोगों के हितों एवं अधिकारों के संदर्भ में वहाँ के मुख्यधारा समाजों के साथ संवाद को प्रोत्साहित करना है। आरएसएस के संयुक्त महासचिव सी.आर. मुकुंद के अनुसार, संगठन विभिन्न देशों के समाजों तक पहुँचकर भारत और हिंदुओं के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण प्रसारित कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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