फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से उम्रकैद कैदी रिहा: कर्नाटक जेल विभाग के डीआईजी सोमशेखर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा पुलिस ने 5 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक जेल विभाग के उत्तरी क्षेत्र के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) सोमशेखर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश के आधार पर हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी शंकर को 13 नवंबर 2018 को परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल से अवैध रूप से रिहा किया गया था। यह मामला न केवल जेल प्रशासन की चूक को उजागर करता है, बल्कि न्यायिक दस्तावेजों की जालसाजी के गंभीर पहलू को भी सामने रखता है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, सेकंड डिवीजन असिस्टेंट (एसडीए) श्रीकांत ने कथित तौर पर वह फर्जी दस्तावेज तैयार किया था जो सुप्रीम कोर्ट के वैध आदेश जैसा दिखता था। इस दस्तावेज के आधार पर 2018 में कैदी शंकर को रिहा किया गया। इस मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं — डीआईजी सोमशेखर, कैदी शंकर और एसडीए श्रीकांत।
गौरतलब है कि घटना के समय सोमशेखर परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक के पद पर तैनात थे। यानी फर्जी आदेश की जाँच किए बिना रिहाई की मंजूरी देने की जिम्मेदारी सीधे उनके कार्यालय पर बनती है।
जाँच का दायरा
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार हुआ और जेल प्रशासन की सत्यापन प्रक्रिया को किस प्रकार दरकिनार किया गया। जाँच अधिकारी इस पहलू की भी गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों के जरिये अन्य कैदियों को भी अवैध रूप से रिहा किया गया है। सोमशेखर और अन्य आरोपियों से पूछताछ अभी जारी है।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक पुलिस और जेल विभाग पहले से ही आंतरिक जवाबदेही को लेकर सवालों के घेरे में हैं।
कर्नाटक पुलिस पर व्यापक संदर्भ
तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर की ओर से साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में कथित संलिप्तता के चलते 88 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
सिद्धारमैया ने पुलिसकर्मियों के आपराधिक मामलों में शामिल होने को 'शर्मनाक और अक्षम्य' बताया था। परमेश्वर ने राज्य विधानसभा सत्र में आधिकारिक आँकड़े पेश करते हुए पुलिस बल के भीतर जवाबदेही की तत्काल ज़रूरत पर बल दिया था।
सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में हुई एक चर्चित एटीएम कैश वैन लूट का भी जिक्र किया था, जिसमें कथित तौर पर एक हेड कांस्टेबल को मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित किया गया था। उन्होंने ड्रग्स से जुड़े ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया जिनका भंडाफोड़ स्थानीय पुलिस की बजाय दूसरे राज्यों की पुलिस ने किया।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार ने कहा था कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानूनी उपायों पर विचार किया जा रहा है और विभाग के भीतर अधिक सतर्कता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
यह मामला कर्नाटक में पुलिस-जेल विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है — विशेषकर तब, जब न्यायालयीन दस्तावेजों की सत्यता जाँचने का कोई मज़बूत तंत्र न हो।
क्या होगा आगे
जाँच एजेंसियाँ यह निर्धारित करने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस षड्यंत्र में और लोग शामिल थे। यदि जाँच में अन्य फर्जी रिहाइयों के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला राज्य की जेल प्रणाली में प्रणालीगत सुधार की माँग को और बल दे सकता है।