6 अक्टूबर 2026
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फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से उम्रकैद कैदी रिहा: कर्नाटक जेल विभाग के डीआईजी सोमशेखर गिरफ्तार

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फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से उम्रकैद कैदी रिहा: कर्नाटक जेल विभाग के डीआईजी सोमशेखर गिरफ्तार

सारांश

बेंगलुरु में एक चौंकाने वाला मामला — हत्या में उम्रकैद का कैदी 2018 में फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश के बल पर जेल से बाहर निकल गया। अब उस जेल के तत्कालीन अधीक्षक और मौजूदा डीआईजी सोमशेखर समेत तीन लोग गिरफ्तार। कर्नाटक की जेल व्यवस्था में भ्रष्टाचार की यह परत कितनी गहरी है — जाँच जारी है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा पुलिस ने 5 अक्टूबर 2026 को जेल विभाग के उत्तरी क्षेत्र के डीआईजी सोमशेखर को गिरफ्तार किया।
आरोप है कि 13 नवंबर 2018 को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी शंकर को फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश के आधार पर रिहा किया गया।
एसडीए श्रीकांत पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप; इस मामले में अब तक 3 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
घटना के समय सोमशेखर परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक थे।
पुलिस जाँच कर रही है कि क्या इसी तरह अन्य कैदियों को भी अवैध रूप से रिहा किया गया।
कर्नाटक में 88 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज होने के आँकड़े सरकार ने खुद साझा किए थे।

बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा पुलिस ने 5 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक जेल विभाग के उत्तरी क्षेत्र के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) सोमशेखर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश के आधार पर हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी शंकर को 13 नवंबर 2018 को परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल से अवैध रूप से रिहा किया गया था। यह मामला न केवल जेल प्रशासन की चूक को उजागर करता है, बल्कि न्यायिक दस्तावेजों की जालसाजी के गंभीर पहलू को भी सामने रखता है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, सेकंड डिवीजन असिस्टेंट (एसडीए) श्रीकांत ने कथित तौर पर वह फर्जी दस्तावेज तैयार किया था जो सुप्रीम कोर्ट के वैध आदेश जैसा दिखता था। इस दस्तावेज के आधार पर 2018 में कैदी शंकर को रिहा किया गया। इस मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं — डीआईजी सोमशेखर, कैदी शंकर और एसडीए श्रीकांत।

गौरतलब है कि घटना के समय सोमशेखर परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक के पद पर तैनात थे। यानी फर्जी आदेश की जाँच किए बिना रिहाई की मंजूरी देने की जिम्मेदारी सीधे उनके कार्यालय पर बनती है।

जाँच का दायरा

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार हुआ और जेल प्रशासन की सत्यापन प्रक्रिया को किस प्रकार दरकिनार किया गया। जाँच अधिकारी इस पहलू की भी गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों के जरिये अन्य कैदियों को भी अवैध रूप से रिहा किया गया है। सोमशेखर और अन्य आरोपियों से पूछताछ अभी जारी है।

यह ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक पुलिस और जेल विभाग पहले से ही आंतरिक जवाबदेही को लेकर सवालों के घेरे में हैं।

कर्नाटक पुलिस पर व्यापक संदर्भ

तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर की ओर से साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में कथित संलिप्तता के चलते 88 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।

सिद्धारमैया ने पुलिसकर्मियों के आपराधिक मामलों में शामिल होने को 'शर्मनाक और अक्षम्य' बताया था। परमेश्वर ने राज्य विधानसभा सत्र में आधिकारिक आँकड़े पेश करते हुए पुलिस बल के भीतर जवाबदेही की तत्काल ज़रूरत पर बल दिया था।

सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में हुई एक चर्चित एटीएम कैश वैन लूट का भी जिक्र किया था, जिसमें कथित तौर पर एक हेड कांस्टेबल को मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित किया गया था। उन्होंने ड्रग्स से जुड़े ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया जिनका भंडाफोड़ स्थानीय पुलिस की बजाय दूसरे राज्यों की पुलिस ने किया।

सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने कहा था कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानूनी उपायों पर विचार किया जा रहा है और विभाग के भीतर अधिक सतर्कता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

यह मामला कर्नाटक में पुलिस-जेल विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है — विशेषकर तब, जब न्यायालयीन दस्तावेजों की सत्यता जाँचने का कोई मज़बूत तंत्र न हो।

क्या होगा आगे

जाँच एजेंसियाँ यह निर्धारित करने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस षड्यंत्र में और लोग शामिल थे। यदि जाँच में अन्य फर्जी रिहाइयों के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला राज्य की जेल प्रणाली में प्रणालीगत सुधार की माँग को और बल दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक पैटर्न का हिस्सा लगती है। सवाल यह है कि क्या जाँच केवल इन तीन आरोपियों तक सिमट जाएगी या पूरी रिहाई प्रक्रिया की प्रणालीगत समीक्षा होगी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में डीआईजी सोमशेखर को क्यों गिरफ्तार किया गया?
डीआईजी सोमशेखर पर आरोप है कि उन्होंने 2018 में फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश के आधार पर हत्या के दोषी उम्रकैद कैदी शंकर को परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल से रिहा कराने में भूमिका निभाई। उस समय वे इसी जेल के अधीक्षक थे।
फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश किसने तैयार किया?
पुलिस के अनुसार, सेकंड डिवीजन असिस्टेंट (एसडीए) श्रीकांत ने कथित तौर पर वह फर्जी दस्तावेज तैयार किया था जो सुप्रीम कोर्ट के वास्तविक आदेश जैसा दिखता था। श्रीकांत को भी इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
कैदी शंकर को कब और कैसे रिहा किया गया था?
हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे शंकर को 13 नवंबर 2018 को कथित फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश के आधार पर परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल से रिहा किया गया था। उसे भी अब इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।
क्या इस तरह अन्य कैदियों को भी रिहा किया गया हो सकता है?
जाँच अधिकारी इस संभावना की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर अन्य कैदियों को भी अवैध रूप से रिहा किया गया हो। अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जाँच जारी है।
कर्नाटक में पुलिस और जेल विभाग के अधिकारियों पर आपराधिक मामलों की क्या स्थिति है?
तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में कथित संलिप्तता के चलते 88 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। सिद्धारमैया ने इसे शर्मनाक और अक्षम्य बताया था।
राष्ट्र प्रेस
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