बेंगलुरु जेल घोटाला: फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से उम्रकैदी की रिहाई, DIG सोमशेखर सहित तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस ने 6 अक्टूबर 2026 को जेल विभाग के नॉर्थ जोन के डीआईजी सोमशेखर, उम्रकैदी शंकर ए. और जेल कर्मचारी श्रीकांत एस. को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की फर्जी प्रति के आधार पर शंकर को 13 नवंबर 2018 को अवैध रूप से रिहा किया गया और इस पूरी साजिश के बदले उसकी पत्नी का कथित तौर पर यौन शोषण किया गया। यह मामला तब उजागर हुआ जब रिहाई के बाद शंकर ने अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरी महिला से शादी कर ली, जिसके बाद पीड़ित महिला ने जेल विभाग में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई।
मुख्य घटनाक्रम
शंकर ए. को चिक्कपेट पुलिस थाने में दर्ज एक मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 364(A) और 120(B) के तहत दोषी पाया गया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 ने 12 जुलाई 2004 को उसे उम्रकैद की सजा और ₹10,000 का जुर्माना सुनाया था। कर्नाटक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने उसकी सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा था।
जांच के अनुसार, श्रीकांत ने 2 नवंबर 2018 की एक कथित आपराधिक अपील याचिका से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेश की फर्जी प्रति तैयार की। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर 13 नवंबर 2018 को शंकर को बेंगलुरु सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया।
यौन शोषण के आरोप और साजिश की परतें
पुलिस के अनुसार, पीड़ित महिला अपने पति से मिलने के लिए नियमित रूप से जेल जाती थी। इसी दौरान उसकी तत्कालीन चीफ सुपरिंटेंडेंट/डीआईजी सोमशेखर से पहचान हुई। आरोप है कि सोमशेखर ने पति की रिहाई में मदद करने का भरोसा दिलाकर महिला का कथित यौन शोषण किया। इसके अलावा आरोप है कि वे महिला को वीडियो कॉल करते थे और उससे कपड़े उतारने के लिए कहते थे।
जांचकर्ताओं ने कथित वीडियो हासिल कर उन्हें फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच के लिए भेजा है। इसके बाद श्रीकांत — जो उस समय सेकेंड डिवीजन असिस्टेंट (SDA) के पद पर था और वर्तमान में कन्विक्ट प्रिजनर सेक्शन में फर्स्ट डिवीजन असिस्टेंट है — भी इस साजिश में शामिल हो गया और फर्जी अदालती दस्तावेज तैयार करने में मदद की।
शिकायत से जांच तक
मामले की औपचारिक जांच 20 मई 2026 को बेंगलुरु सेंट्रल जेल के प्रभारी अधीक्षक कर्ण बी. क्षेत्री की शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया था कि शंकर ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की फर्जी प्रति प्रस्तुत की और इसी के आधार पर उसे रिहा किया गया था। इसके बाद परप्पना अग्रहारा पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ।
गौरतलब है कि यह शिकायत तब सामने आई जब पीड़ित महिला ने जेल विभाग को बताया कि रिहाई के बाद शंकर ने उसे छोड़कर दूसरी महिला से विवाह कर लिया। यह ऐसे समय में आया है जब जेलों में भ्रष्टाचार और अवैध रिहाई के मामलों पर देशभर में सवाल उठ रहे हैं।
गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
शंकर और श्रीकांत को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहाँ से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। डीआईजी सोमशेखर को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ के लिए 9 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
जांच इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन के डीसीपी एम. नारायण की निगरानी में चल रही है। एसीपी सतीश के.एम., पुलिस निरीक्षक पी.जी. नवीन कुमार, पीएसआई महादेवय्या और कलावती सहित अन्य पुलिसकर्मी इस मामले की जांच और गिरफ्तारियों में शामिल रहे।
आगे की जांच का दायरा
पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि क्या इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य कैदियों को अवैध रूप से रिहा कराने के लिए भी किया गया था। यदि ऐसा साबित होता है, तो यह मामला बेंगलुरु की जेल व्यवस्था के भीतर एक व्यापक भ्रष्टाचार के नेटवर्क की ओर इशारा करेगा। मामले में आगे की जांच जारी है।