6 अक्टूबर 2026
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बेंगलुरु जेल घोटाला: फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से उम्रकैदी की रिहाई, DIG सोमशेखर सहित तीन गिरफ्तार

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बेंगलुरु जेल घोटाला: फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से उम्रकैदी की रिहाई, DIG सोमशेखर सहित तीन गिरफ्तार

सारांश

बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल में उम्रकैदी की पत्नी के कथित यौन शोषण और फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से 2018 में अवैध रिहाई का चौंकाने वाला मामला — डीआईजी सोमशेखर सहित तीन गिरफ्तार, FSL जांच जारी।

मुख्य बातें

डीआईजी सोमशेखर , उम्रकैदी शंकर ए.
और जेल कर्मचारी श्रीकांत एस.
को 6 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
शंकर को 13 नवंबर 2018 को बेंगलुरु सेंट्रल जेल से सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश के आधार पर अवैध रूप से रिहा किया गया था।
शंकर को 12 जुलाई 2004 को फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 ने IPC धारा 364(A) और 120(B) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
डीआईजी सोमशेखर पर महिला को वीडियो कॉल के ज़रिये कथित यौन शोषण का आरोप; कथित वीडियो FSL जांच के लिए भेजा गया।
पूरा मामला पीड़ित महिला की उस शिकायत से उजागर हुआ जो उसने रिहाई के बाद पति द्वारा छोड़े जाने पर जेल विभाग में दर्ज कराई।
पुलिस जांच कर रही है कि क्या इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों से अन्य कैदियों को भी रिहा कराया गया।

बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस ने 6 अक्टूबर 2026 को जेल विभाग के नॉर्थ जोन के डीआईजी सोमशेखर, उम्रकैदी शंकर ए. और जेल कर्मचारी श्रीकांत एस. को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की फर्जी प्रति के आधार पर शंकर को 13 नवंबर 2018 को अवैध रूप से रिहा किया गया और इस पूरी साजिश के बदले उसकी पत्नी का कथित तौर पर यौन शोषण किया गया। यह मामला तब उजागर हुआ जब रिहाई के बाद शंकर ने अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरी महिला से शादी कर ली, जिसके बाद पीड़ित महिला ने जेल विभाग में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई।

मुख्य घटनाक्रम

शंकर ए. को चिक्कपेट पुलिस थाने में दर्ज एक मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 364(A) और 120(B) के तहत दोषी पाया गया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 ने 12 जुलाई 2004 को उसे उम्रकैद की सजा और ₹10,000 का जुर्माना सुनाया था। कर्नाटक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने उसकी सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा था।

जांच के अनुसार, श्रीकांत ने 2 नवंबर 2018 की एक कथित आपराधिक अपील याचिका से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेश की फर्जी प्रति तैयार की। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर 13 नवंबर 2018 को शंकर को बेंगलुरु सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया।

यौन शोषण के आरोप और साजिश की परतें

पुलिस के अनुसार, पीड़ित महिला अपने पति से मिलने के लिए नियमित रूप से जेल जाती थी। इसी दौरान उसकी तत्कालीन चीफ सुपरिंटेंडेंट/डीआईजी सोमशेखर से पहचान हुई। आरोप है कि सोमशेखर ने पति की रिहाई में मदद करने का भरोसा दिलाकर महिला का कथित यौन शोषण किया। इसके अलावा आरोप है कि वे महिला को वीडियो कॉल करते थे और उससे कपड़े उतारने के लिए कहते थे।

जांचकर्ताओं ने कथित वीडियो हासिल कर उन्हें फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच के लिए भेजा है। इसके बाद श्रीकांत — जो उस समय सेकेंड डिवीजन असिस्टेंट (SDA) के पद पर था और वर्तमान में कन्विक्ट प्रिजनर सेक्शन में फर्स्ट डिवीजन असिस्टेंट है — भी इस साजिश में शामिल हो गया और फर्जी अदालती दस्तावेज तैयार करने में मदद की।

शिकायत से जांच तक

मामले की औपचारिक जांच 20 मई 2026 को बेंगलुरु सेंट्रल जेल के प्रभारी अधीक्षक कर्ण बी. क्षेत्री की शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया था कि शंकर ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की फर्जी प्रति प्रस्तुत की और इसी के आधार पर उसे रिहा किया गया था। इसके बाद परप्पना अग्रहारा पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ।

गौरतलब है कि यह शिकायत तब सामने आई जब पीड़ित महिला ने जेल विभाग को बताया कि रिहाई के बाद शंकर ने उसे छोड़कर दूसरी महिला से विवाह कर लिया। यह ऐसे समय में आया है जब जेलों में भ्रष्टाचार और अवैध रिहाई के मामलों पर देशभर में सवाल उठ रहे हैं।

गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत

शंकर और श्रीकांत को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहाँ से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। डीआईजी सोमशेखर को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ के लिए 9 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

जांच इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन के डीसीपी एम. नारायण की निगरानी में चल रही है। एसीपी सतीश के.एम., पुलिस निरीक्षक पी.जी. नवीन कुमार, पीएसआई महादेवय्या और कलावती सहित अन्य पुलिसकर्मी इस मामले की जांच और गिरफ्तारियों में शामिल रहे।

आगे की जांच का दायरा

पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि क्या इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य कैदियों को अवैध रूप से रिहा कराने के लिए भी किया गया था। यदि ऐसा साबित होता है, तो यह मामला बेंगलुरु की जेल व्यवस्था के भीतर एक व्यापक भ्रष्टाचार के नेटवर्क की ओर इशारा करेगा। मामले में आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ एक महिला की असहायता को हथियार बनाया गया। डीआईजी स्तर के अधिकारी की कथित संलिप्तता यह सवाल उठाती है कि क्या जेल की आंतरिक निगरानी प्रणाली पूरी तरह विफल हो चुकी है। यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी उम्रकैदी की फर्जी रिहाई का मामला सामने आया हो; लेकिन इसमें जोड़ा गया यौन शोषण का आयाम इसे न्यायिक और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के लिहाज से अत्यंत गंभीर बनाता है। सबसे अहम सवाल यह है कि FSL जांच के नतीजे और न्यायिक प्रक्रिया क्या सुनिश्चित करती है — क्योंकि बिना पारदर्शी जांच के ऐसे मामले दब जाने का इतिहास रहा है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु जेल घोटाले में क्या हुआ?
बेंगलुरु सेंट्रल जेल में उम्रकैद काट रहे शंकर ए. को 13 नवंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के एक फर्जी आदेश के आधार पर अवैध रूप से रिहा किया गया था। इस साजिश में जेल कर्मचारी श्रीकांत एस. ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और डीआईजी सोमशेखर पर शंकर की पत्नी के कथित यौन शोषण का आरोप है।
इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
6 अक्टूबर 2026 को जेल विभाग के नॉर्थ जोन के डीआईजी सोमशेखर, उम्रकैदी शंकर ए. और जेल कर्मचारी श्रीकांत एस. को गिरफ्तार किया गया। शंकर और श्रीकांत को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि सोमशेखर को 9 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में रखा गया है।
पीड़ित महिला ने शिकायत क्यों दर्ज कराई?
रिहाई के बाद शंकर ने कथित तौर पर अपनी पत्नी को छोड़ दिया और दूसरी महिला से विवाह कर लिया। इसके बाद पीड़ित महिला ने जेल विभाग में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने यौन शोषण और पति की अवैध रिहाई से जुड़ी परिस्थितियों का विस्तृत ब्यौरा दिया।
डीआईजी सोमशेखर पर क्या आरोप हैं?
आरोप है कि डीआईजी सोमशेखर ने महिला को पति की रिहाई में मदद करने का भरोसा दिलाकर उसका कथित यौन शोषण किया। यह भी आरोप है कि वे महिला को वीडियो कॉल पर कपड़े उतारने के लिए कहते थे; इससे संबंधित कथित वीडियो फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच के लिए भेजे गए हैं।
क्या इस तरह के और मामले सामने आ सकते हैं?
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य कैदियों की अवैध रिहाई के लिए भी किया गया। जांच इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन के डीसीपी एम. नारायण की निगरानी में जारी है और आगे और गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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