बेंगलुरु हत्याकांड: कैब चालक इंदुशेखर की नाबालिग बेटी से पूछताछ, 7 परिजनों की हत्या में भूमिका की जांच
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु पुलिस कैब चालक इंदुशेखर की नाबालिग बेटी से पूछताछ कर रही है, जिस पर आरोप है कि उसने अपनी माँ के परिवार के सात सदस्यों की हत्या में अपने पिता की कथित तौर पर मदद की। पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को बताया कि जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इंदुशेखर ने अपनी नाबालिग बेटी को इस अपराध में शामिल होने के लिए किस तरह तैयार किया। यह मामला बेंगलुरु के श्रीरामपुरा क्षेत्र से जुड़ा है और कथित तौर पर 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 के बीच की घटनाओं पर आधारित है।
हत्याकांड का विस्तृत घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, आरोपी इंदुशेखर ने सबसे पहले अपनी 40 वर्षीया पत्नी सुनीता की हत्या की। इसके बाद उसने अपनी 65 वर्षीया सास रूपावती को मार डाला। फिर उसने अपने 30 वर्षीय साले शिवकुमार, उनकी पत्नी दिव्या और उनके 7 वर्षीय बेटे पुनीत की भी हत्या कर दी। आखिरी शिकार 40 वर्षीय साले शंकर और उनकी पत्नी नलिनी बने। गौरतलब है कि शंकर और नलिनी का 10 वर्षीय बेटा इस नृशंस हत्याकांड में जीवित बच गया।
आरोपी के बयान के अनुसार, ये सभी हत्याएं एक साथ नहीं, बल्कि 15 से 20 दिनों की अवधि में अलग-अलग की गईं। पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही है।
नाबालिग बेटी की कथित भूमिका
पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने कहा, 'आरोपी की एक नाबालिग बेटी है। कई व्यक्तिगत और अन्य कारणों की जांच की जानी है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि आरोपी ने कथित तौर पर नाबालिग बेटी की मदद से यह अपराध किया। यह गंभीर मामला है, क्योंकि वह नाबालिग है। हम जांच कर रहे हैं कि उसका ब्रेनवॉश कैसे किया गया, उसे कैसे राजी किया गया और उससे मदद कैसे ली गई।'
पुलिस के अनुसार, नाबालिग लड़की को मामले में दूसरा आरोपी माना जा रहा है। उसने कथित तौर पर सभी हत्याएं होते हुए देखी थीं। आरोप है कि पत्नी की हत्या करने और शव ठिकाने लगाने के बाद इंदुशेखर ने अपनी बेटी के साथ मिलकर अन्य परिजनों को एक-एक करके घर बुलाया और उनकी हत्या की। बाद में शवों को बोरियों में भरकर अलग-अलग स्थानों पर फेंका गया।
संपत्ति विवाद और कथित मकसद
जांचकर्ताओं को संदेह है कि श्रीरामपुरा में स्थित करीब ₹2.5 करोड़ की संपत्ति को लेकर विवाद इन हत्याओं का एक संभावित कारण हो सकता है। यह संपत्ति कथित तौर पर पीड़ितों के नाम पर थी, और पुलिस को आशंका है कि इंदुशेखर ने संपत्ति पर कब्जे के इरादे से योजना बनाई हो सकती है।
रिश्तेदारों से मिली जानकारी के अनुसार, इंदुशेखर ने कथित तौर पर किसी बहाने से अपनी सास के हस्ताक्षर छह स्टांप पेपर पर करवा लिए थे। जब उसकी पत्नी सुनीता को इस बात का पता चला, तो उसने आपत्ति जताते हुए कथित तौर पर सभी स्टांप पेपर वापस ले लिए। पुलिस को संदेह है कि इसी घटना से आरोपी के मन में पत्नी और उसके परिजनों के प्रति नाराजगी पैदा हुई।
पूछताछ के दौरान इंदुशेखर ने यह भी कथित तौर पर दावा किया कि उसकी पत्नी अक्सर उसे 'निकम्मा' कहकर ताना मारती थी, जिससे वह मानसिक तनाव में रहता था। पुलिस संपत्ति विवाद और इस दावे — दोनों पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस को कैसे मिली सुराग
मामला तब सामने आया जब नलिनी की माँ ने श्रीरामपुरा पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच इंदुशेखर ने रिश्तेदारों को संदेश भेजकर यह जताने की कोशिश की थी कि परिवार के सदस्य कहीं घूमने गए हुए हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन ट्रैक किया और पाया कि वह लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहा था। लापता परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन भी उसी के साथ एक ही लोकेशन दिखा रहे थे, जिससे शुरुआत में लगा कि सभी लोग साथ यात्रा कर रहे हैं — लेकिन बाद में इसी से पुलिस को शक हुआ।
इसके बाद पुलिस इंदुशेखर को चिक्कबल्लापुर जिले के नंदी हिल्स इलाके में महाजर और तलाशी अभियान के लिए ले गई, जहाँ से 7 वर्षीय पुनीत का शव बरामद किया गया। अन्य शवों की तलाश अभी भी जारी है। जांचकर्ताओं को ऐसे सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं जिनमें आरोपी कथित रूप से शवों को वाहन में ले जाता दिखाई दे रहा है।
आगे की जांच
पुलिस आयुक्त के अनुसार, जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि हत्याएं किस स्थान पर की गईं — घर में या कहीं और। सत्यापन पूरा होने के बाद पुलिस और जानकारी साझा करेगी। यह मामला न केवल बहु-पीड़ित हत्याकांड के रूप में, बल्कि एक नाबालिग की संभावित संलिप्तता के कारण भी कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत संवेदनशील है।