अयोध्या दीपोत्सव 2026: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन होंगे शामिल, 10वीं वर्षगांठ पर 33 लाख दीए जलाने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन शनिवार, 8 नवंबर 2026 को अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव 2026 में सम्मिलित होंगे। यह भव्य उत्सव इस वर्ष अपनी 10वीं वर्षगांठ मना रहा है और दीपावली से एक दिन पहले आयोजित किया जा रहा है।
उपराष्ट्रपति का कार्यक्रम
अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन राम जन्मभूमि मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। वे श्री राम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह में भी भाग लेंगे और इस अवसर पर सम्मानित संतों का सम्मान करेंगे।
गौरतलब है कि दीपोत्सव अयोध्या की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का एक अभिन्न अंग बन चुका है, जो हर वर्ष बड़े पैमाने पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
उत्सव की विशेषताएँ
आयोजकों के बयान के अनुसार इस बार 56 घाटों पर 30 से 33 लाख से अधिक मिट्टी के दीए एक साथ प्रज्वलित किए जाएँगे। उत्सव के प्रमुख केंद्र 'राम की पैड़ी' और सरयू नदी के तट होंगे। यह प्रयास एक बार फिर रोशनी का नया कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में देखा जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरी है और दीपोत्सव का राष्ट्रीय महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
उपराष्ट्रपति का अक्षय ऊर्जा पर बयान
इससे पहले गुरुवार को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में आयोजित 'भारत अक्षय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो 2026' के समापन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रगति न केवल देश के लिए, बल्कि 'ग्लोबल साउथ' के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल है।
राधाकृष्णन ने बताया कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता 300 गीगावाट को पार कर चुकी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने 2025 में ही अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर लिया — यह उपलब्धि निर्धारित लक्ष्य से पाँच साल पहले प्राप्त हुई।
सौर ऊर्जा में उल्लेखनीय छलाँग
उपराष्ट्रपति ने बताया कि पिछले एक दशक में देश की सौर ऊर्जा क्षमता 3 गीगावाट से कम से बढ़कर 170 गीगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा, जो कभी कोयले से उत्पन्न बिजली की तुलना में कई गुना महँगी थी, अब भारत में बिजली के सबसे सस्ते स्रोतों में से एक बन चुकी है।
राधाकृष्णन ने इस बदलाव का श्रेय बेहतर नीतियों, निजी उद्यमों और राज्यों तथा नागरिकों के सामूहिक प्रयासों को दिया। उन्होंने यह भी बताया कि 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के अंतर्गत 65 लाख से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अभियान से जुड़ चुके हैं, जिससे उन्हें किफायती और स्वच्छ ऊर्जा का लाभ मिल रहा है।
आगे क्या
दीपोत्सव की 10वीं वर्षगांठ के साथ इस उत्सव का सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व स्पष्ट रूप से बढ़ा है। आने वाले वर्षों में अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।