तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद, डोली 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुँचेगी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड स्थित विश्वप्रसिद्ध तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर 2026 को वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए विधिवत बंद कर दिए गए। इसी के साथ वर्ष 2026 की ग्रीष्मकालीन यात्रा का आधिकारिक समापन हो गया है। कपाट बंद होने के तत्काल बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हो गई।
कपाट बंद होने का विधि-विधान
समुद्रतल से लगभग 3,680 मीटर की ऊँचाई पर स्थित तुंगनाथ धाम में इस अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा वातावरण देखा गया। मंदिर परिसर को भव्य रूप से पुष्पों से सजाया गया था। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और परंपरागत धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए कपाट बंद किए। श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय भीड़ उपस्थित रही और भक्तों ने पूरी श्रद्धा एवं उमंग के साथ भोलेनाथ के जयकारे लगाए।
डोली यात्रा का कार्यक्रम
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, चल विग्रह उत्सव डोली का पहला रात्रि प्रवास चोपता में होगा। 7 नवंबर को डोली भनकुण्ड पहुँचेगी, जबकि 8 नवंबर 2026 को डोली मक्कूमठ स्थित श्री मर्कटेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। इसके उपरांत अगले छह महीने तक शीतकाल में बाबा तुंगनाथ की पूजा-अर्चना मक्कूमठ में ही संपन्न होगी।
तुंगनाथ धाम का धार्मिक महत्त्व
पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजित भगवान तुंगनाथ धाम विश्व के सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिरों में प्रमुख स्थान रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ भगवान शिव की भुजाओं की उपासना की जाती है। गौरतलब है कि पंचकेदार यात्रा उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अभिन्न अंग है, और तुंगनाथ की रुद्रप्रयाग जिले में स्थिति इसे चारधाम यात्रा के समीपवर्ती पर्यटन परिपथ से भी जोड़ती है।
आम भक्तों पर असर
कपाट बंद होने के साथ ही बाबा तुंगनाथ के भक्त अब शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में 8 नवंबर 2026 के बाद दर्शन-पूजन कर सकेंगे। उत्तराखंड में शीतकाल के दौरान अत्यधिक हिमपात के कारण उच्च हिमालयी मंदिरों के कपाट बंद करने और डोली को निचले स्थानों पर स्थानांतरित करने की यह सदियों पुरानी परंपरा है। अगले ग्रीष्मकाल में तुंगनाथ धाम के कपाट पुनः खुलने पर यात्रा शुरू हो सकेगी।