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केदारनाथ डोली यात्रा का शुभारंभ, हजारों श्रद्धालु हिमालयी तीर्थस्थल की यात्रा में शामिल हुए

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केदारनाथ डोली यात्रा का शुभारंभ, हजारों श्रद्धालु हिमालयी तीर्थस्थल की यात्रा में शामिल हुए

सारांश

केदारनाथ डोली यात्रा का आरंभ हो चुका है, जिसमें हजारों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। 22 अप्रैल को भगवान शिव के द्वार खुलेंगे, जो इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है।

मुख्य बातें

डोली यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल को हुआ।
हजारों श्रद्धालु इस यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं।
22 अप्रैल को भगवान शिव के द्वार खुलेंगे।
यह यात्रा हिमालयी परंपरा का प्रतीक है।
भक्तों ने सामुदायिक भोज का आयोजन किया।

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। रविवार को उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की पारंपरिक डोली (पालकी) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो हिमालय में स्थित पूजनीय केदारनाथ धाम की वार्षिक यात्रा की शुरुआत है।

उखीमठ में मौजूद अपने शीतकालीन निवास पर विराजमान भगवान केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को वैदिक मंत्रों, भक्ति गीतों और भक्तों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ एक भव्य जुलूस में ले जाया गया। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया था, जिसमें लगभग 8 क्विंटल विभिन्न प्रकार के फूलों का उपयोग किया गया था, जिससे एक आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण हुआ। भक्तों ने उत्सव के मौके पर सामुदायिक भोज (भंडारा) का आयोजन भी किया।

राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए अनुष्ठानों से जुड़े एक पुजारी ने कहा कि यह हिमालय की एक दिव्य परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है। इस क्षेत्र में महादेव पूजा की गहरी संस्कृति है। तीन दिन बाद, 22 अप्रैल को भगवान शिव के शुभ द्वार खुलेंगे। डोली के रूप में बनी यह मूर्ति अपनी पदयात्रा पर निकल पड़ी है।

देश भर से श्रद्धालु इस पवित्र प्रस्थान को देखने के लिए एकत्रित हुए। एक श्रद्धालु ने कहा कि मैं पहली बार इस डोली यात्रा के लिए आया हूं। मेरी यह इच्छा थी, और अब मैं बाबा की डोली के साथ केदारनाथ तक जाऊंगा।

67 वर्षीय एक श्रद्धालु, जो पांचवीं बार डोली यात्रा में भाग ले रहे हैं, ने बताया कि यह उनकी पांचवीं डोली यात्रा है। अनुभव अद्भुत है। टीवी या यूट्यूब पर देखना अलग बात है, लेकिन यहां आकर इसे अनुभव करना सचमुच खास है।

डोली पहली रात फाटा में ठहरेगी और सोमवार को गौरीकुंड पहुंचकर एक और पड़ाव डालेगी। यह 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी, जहां प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। मंदिर के द्वार 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे पूर्ण वैदिक रीति-रिवाजों के साथ खुलेंगे, जो ग्रीष्मकालीन तीर्थयात्रा के प्रारंभ का प्रतीक है।

देश भर से हजारों श्रद्धालु आशीर्वाद लेने के लिए एकत्रित हुए हैं, जो इस यात्रा के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है।

भारतीय सेना, विशेष रूप से गढ़वाल राइफल्स के एक बैंड ने जुलूस के दौरान एक महत्वपूर्ण औपचारिक भूमिका निभाई, जिसमें सैन्य परंपरा और गहरी आध्यात्मिक रीति-रिवाजों का अद्भुत संगम देखने को मिला।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक भी है। श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि केदारनाथ धाम हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोली यात्रा कब शुरू हुई?
डोली यात्रा 19 अप्रैल को उखीमठ से शुरू हुई।
डोली यात्रा में कितने श्रद्धालु शामिल हुए?
हजारों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में शामिल हुए हैं।
डोली यात्रा का मुख्य आकर्षण क्या है?
22 अप्रैल को भगवान शिव के द्वार का खुलना इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है।
डोली यात्रा में क्या विशेषताएँ हैं?
इस यात्रा में भव्य जुलूस, वैदिक मंत्र, सामुदायिक भोज और आध्यात्मिक वातावरण शामिल हैं।
डोली यात्रा का महत्व क्या है?
यह यात्रा भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
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