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दिल्ली मेट्रो के 10 नए अर्पण सेंटर जनवरी 2027 तक: CM रेखा गुप्ता का ऐलान, 41 टन कपड़े जमा

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दिल्ली मेट्रो के 10 नए अर्पण सेंटर जनवरी 2027 तक: CM रेखा गुप्ता का ऐलान, 41 टन कपड़े जमा

सारांश

दिल्ली मेट्रो के 10 अर्पण केंद्रों ने महज़ कुछ हफ्तों में 41 टन पुराने कपड़े जमा कर लिए — और अब सीएम रेखा गुप्ता इसे जनवरी 2027 तक 10 और स्टेशनों तक फैलाने की तैयारी में हैं। कपड़ों से गलीचे और बैग बना रहे स्वयं-सहायता समूह इसे सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि आजीविका की पहल भी बना रहे हैं।

मुख्य बातें

CM रेखा गुप्ता ने 13 सितंबर 2026 को घोषणा की कि दिल्ली मेट्रो के 10 अर्पण केंद्रों ने 31 अगस्त 2026 तक 41,181.59 किलोग्राम (लगभग 41 टन ) कपड़े जमा किए।
कुल 3,940 लोगों ने इन केंद्रों पर कपड़े जमा किए; बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल सेंटर सबसे आगे रहा — 9,861.40 किलोग्राम ।
4,266 किलोग्राम सामान पुनर्उपयोग/अपसाइकिलिंग के लिए और 29,424 किलोग्राम रीसाइकिलिंग के लिए अलग किया गया।
स्वयं-सहायता समूह पुराने कपड़ों से गलीचे, पाउच, बैग जैसी वस्तुएँ बना रहे हैं; अब तक ₹27,036 की बिक्री हो चुकी है।
जनवरी 2027 तक 10 नए अर्पण केंद्र खुलेंगे — मॉडल टाउन, INA, ग्रेटर कैलाश, राजौरी गार्डन सहित अन्य स्टेशनों पर।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 13 सितंबर 2026 को घोषणा की कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के स्टेशनों पर स्थापित 'अर्पण केंद्रों' ने 31 अगस्त 2026 तक 41 टन से अधिक इस्तेमाल किए गए कपड़े एकत्र किए हैं। सरकार अब जनवरी 2027 तक 10 और अर्पण सेंटर खोलने की योजना बना रही है, जिससे इस पहल का दायरा दिल्ली के और अधिक इलाकों तक फैलेगा।

अर्पण सेंटर क्या है और कैसे काम करता है

दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बने ये केंद्र उन नागरिकों के लिए एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभरे हैं जो पुराने कपड़ों को सही तरीके से ठिकाने लगाना चाहते हैं। कोई भी व्यक्ति यहाँ वे कपड़े जमा कर सकता है जिनकी उसे अब आवश्यकता नहीं है।

जमा किए गए कपड़ों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है — पुनर्उपयोग (Reuse), अपसाइकिलिंग और रीसाइक्लिंग31 अगस्त 2026 तक लगभग 4,266 किलोग्राम सामान पुनर्उपयोग व अपसाइकिलिंग के लिए और 29,424 किलोग्राम सामान रीसाइक्लिंग के लिए अलग किया जा चुका था।

आँकड़े: कहाँ कितना जमा हुआ

31 अगस्त 2026 तक कुल 3,940 लोगों ने 10 अर्पण सेंटरों पर 41,181.59 किलोग्राम कपड़े जमा किए। केंद्रवार आँकड़े इस प्रकार हैं:

सबसे अधिक 9,861.40 किलोग्राम बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल सेंटर पर जमा हुए, इसके बाद शालीमार बाग में 9,761.03 किलोग्राम, पंजाबी बाग वेस्ट में 6,534.98 किलोग्राम और शाहदरा में 6,386.08 किलोग्राम रहे। अन्य केंद्रों पर मात्रा इस प्रकार रही: मयूर विहार-I में 5,189.40 किलोग्राम, हौज़ खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारका-काकरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम

गौरतलब है कि पाँच केंद्र 3 अगस्त को शुरू हुए थे, जबकि शेष केंद्र 12 और 17 अगस्त को चालू हुए।

स्वयं-सहायता समूहों की भूमिका और बिक्री

स्वयं-सहायता समूह (Self-Help Groups) इन पुराने कपड़ों से गलीचे, फोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसी उपयोगी वस्तुएँ तैयार कर रहे हैं। ये उत्पाद अर्पण केंद्रों पर प्रदर्शित और बेचे भी जा रहे हैं। 10 केंद्रों पर अब तक कुल ₹27,036 की बिक्री दर्ज की गई है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब शहरी कचरा प्रबंधन और सर्कुलर इकॉनमी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत जोर बढ़ रहा है। यह पहल न केवल पर्यावरणीय लाभ देती है, बल्कि महिला स्वयं-सहायता समूहों को आजीविका का अवसर भी प्रदान करती है।

जनवरी 2027 तक 10 नए केंद्रों की योजना

अर्पण नेटवर्क के विस्तार के तहत जनवरी 2027 तक 10 नए मेट्रो स्टेशनों पर केंद्र खोले जाने का प्रस्ताव है। इनमें मॉडल टाउन, INA, IP एक्सटेंशन, पश्चिम विहार वेस्ट, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी वेस्ट, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर 10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हमारी कोशिश है कि लोग आसानी से पुराने कपड़े दान कर सकें और उनका ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल हो, जिससे दिल्ली को साफ़, सुंदर और हरा-भरा बनाने की कोशिशें और मजबूत हों।' नई 20-केंद्रों की श्रृंखला के साथ यह पहल दिल्ली के टेक्सटाइल वेस्ट प्रबंधन में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

036 की बिक्री — आँकड़े छोटे लग सकते हैं, लेकिन यह पहल उस बड़े सवाल का जवाब खोजने की कोशिश है जिसे दिल्ली वर्षों से टालती रही है: टेक्सटाइल वेस्ट का व्यवस्थित प्रबंधन। असली परीक्षा जनवरी 2027 में होगी जब 10 नए केंद्र चालू होंगे — तब यह देखना होगा कि क्या स्वयं-सहायता समूहों की क्षमता इस बढ़े हुए दायरे के साथ कदम मिला पाती है। अभी तक बिक्री का आँकड़ा बेहद मामूली है, और अगर इसे टिकाऊ बनाना है तो प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और बाज़ार-संपर्क दोनों को मजबूत करना होगा।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली मेट्रो का अर्पण केंद्र क्या है?
अर्पण केंद्र दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर स्थापित संग्रह बिंदु हैं जहाँ नागरिक अपने पुराने या अनुपयोगी कपड़े दान कर सकते हैं। इन कपड़ों को बाद में पुनर्उपयोग, अपसाइकिलिंग या रीसाइकिलिंग के लिए भेजा जाता है।
अर्पण केंद्रों पर अब तक कितने कपड़े जमा हुए हैं?
31 अगस्त 2026 तक 10 केंद्रों पर 3,940 लोगों ने कुल 41,181.59 किलोग्राम (लगभग 41 टन) कपड़े जमा किए। बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल सेंटर पर सर्वाधिक 9,861.40 किलोग्राम जमा हुए।
नए अर्पण केंद्र कब और कहाँ खुलेंगे?
10 नए अर्पण केंद्र जनवरी 2027 तक खोले जाने का प्रस्ताव है। इनमें मॉडल टाउन, INA, IP एक्सटेंशन, पश्चिम विहार वेस्ट, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी वेस्ट, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर 10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।
जमा कपड़ों से क्या बनाया जा रहा है?
स्वयं-सहायता समूह इन कपड़ों से गलीचे, फोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसी उपयोगी वस्तुएँ बना रहे हैं। ये उत्पाद अर्पण केंद्रों पर बेचे भी जा रहे हैं और अब तक ₹27,036 की बिक्री हो चुकी है।
अर्पण केंद्रों में कपड़े कैसे दान करें?
दिल्ली मेट्रो के मौजूदा 10 केंद्रों — जिनमें शालीमार बाग, पंजाबी बाग वेस्ट, शाहदरा, मयूर विहार-I, हौज़ खास, द्वारका-काकरोला, मालवीय नगर, लाजपत नगर और मोहन एस्टेट शामिल हैं — पर जाकर सीधे अनुपयोगी कपड़े जमा किए जा सकते हैं। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
राष्ट्र प्रेस
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