'मेट्रो मंडे' की शुरुआत: CM रेखा गुप्ता मेट्रो से पहुंचीं दिल्ली सचिवालय, प्रदूषण-जाम से मुक्ति का आह्वान

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'मेट्रो मंडे' की शुरुआत: CM रेखा गुप्ता मेट्रो से पहुंचीं दिल्ली सचिवालय, प्रदूषण-जाम से मुक्ति का आह्वान

सारांश

'मेट्रो मंडे' सिर्फ एक सांकेतिक यात्रा नहीं — दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने मेट्रो और इलेक्ट्रिक बस से सचिवालय पहुंचकर निजी वाहन-निर्भरता तोड़ने का आह्वान किया। DMRC ने एक्स्ट्रा ट्रिप 6 से 24 कीं। प्रदूषण और जाम से जूझती राजधानी के लिए यह पहल कितनी दूर तक जाएगी, यह नागरिक भागीदारी पर निर्भर करेगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 18 मई 2026 को ' मेट्रो मंडे ' पहल की शुरुआत मेट्रो से दिल्ली सचिवालय पहुंचकर की।
मंत्री प्रवेश वर्मा और मंत्री इंद्राज सिंह भी मेट्रो से कार्यालय पहुंचे; मेट्रो के बाद इलेक्ट्रिक बस का उपयोग किया गया।
यह पहल ' मेरा भारत, मेरा योगदान ' अभियान के तहत सार्वजनिक परिवहन, ईंधन संरक्षण और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुई।
DMRC ने 17 मई को अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप 6 से बढ़ाकर 24 कर दिए और मेट्रो स्टेशनों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए।
CM ने दिल्लीवासियों से अपील की कि निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं, जिससे प्रदूषण और ट्रैफिक जाम दोनों में राहत मिलेगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार, 18 मई 2026 को 'मेट्रो मंडे' पहल की औपचारिक शुरुआत की — मेट्रो में सवार होकर दिल्ली सचिवालय स्थित अपने कार्यालय पहुंचकर उन्होंने राजधानी के नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने का संदेश दिया। उनके साथ दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा और मंत्री इंद्राज सिंह भी मेट्रो से सफर करते नजर आए।

पहल का स्वरूप और संदेश

यह पहल 'मेरा भारत, मेरा योगदान' अभियान के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन देना, ईंधन की खपत घटाना और नागरिकों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना जगाना है। मेट्रो से उतरने के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रीगण इलेक्ट्रिक बस से कार्यालय पहुंचे, जो पूरी तरह शून्य-उत्सर्जन यात्रा का प्रतीक बना।

मुख्यमंत्री के इस आह्वान के बाद दिल्ली सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों ने भी उसी दिन निजी वाहन छोड़कर मेट्रो से कार्यालय पहुंचने का फैसला किया।

मुख्यमंत्री की अपील — प्रदूषण और जाम से निजात

पत्रकारों से बातचीत में रेखा गुप्ता ने कहा, 'अगर आप सार्वजनिक वाहनों पर अपनी निर्भरता बढ़ाएंगे, तो दिल्ली के लोगों को कई तरह के फायदे मिलेंगे। पहला — प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी। इसके अलावा, ट्रैफिक जाम की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलेगी।' उन्होंने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन उपयोग के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा, 'हमने पूरी रूपरेखा निर्धारित कर ली है और उसी के अनुरूप काम कर रहे हैं।'

DMRC की तैयारी — एक्स्ट्रा ट्रिप और सुरक्षा बल

इस पहल से एक दिन पहले, 17 मई को दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप की संख्या 6 से बढ़ाकर 24 कर दी थी। DMRC के अनुसार, यात्री संख्या में अपेक्षित वृद्धि को देखते हुए यह कदम उठाया गया है और मेट्रो स्टेशन परिसरों पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं, ताकि भीड़ प्रबंधन सुचारु रहे।

DMRC ने अपने बयान में कहा था कि अतिरिक्त ट्रिप शुरू होने के बाद यात्री संख्या में इजाफा स्वाभाविक है और इसके लिए पूरी परिचालन तैयारी पहले से कर ली गई है।

आम जनता और दिल्ली पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल नियमित रूप से जारी रही और नागरिकों में इसे लेकर जागरूकता बढ़ी, तो दिल्ली की वायु गुणवत्ता और सड़क यातायात दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गौरतलब है कि दिल्ली लगातार देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल रहती है और सड़कों पर निजी वाहनों की अधिकता इसका एक प्रमुख कारण मानी जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'मेट्रो मंडे' को एक शुभ संकेत के रूप में देखा जा रहा है और उन्हें उम्मीद है कि यह आंदोलन आगे और व्यापक रूप लेगा।

आगे क्या

फिलहाल 'मेट्रो मंडे' एक साप्ताहिक पहल के रूप में शुरू हुई है। यदि इसे नागरिकों का व्यापक समर्थन मिला, तो सरकार इसे अन्य दिनों तक विस्तार देने पर विचार कर सकती है। DMRC की बढ़ी हुई ट्रिप सेवा और स्टेशनों पर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था इस दिशा में पहला ठोस कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दिल्ली की सड़कों पर असली बदलाव तब आएगा जब यह पहल सिर्फ मंत्रियों की एक-दिवसीय सवारी से आगे बढ़े। राजधानी में निजी वाहनों की संख्या एक करोड़ से ऊपर है और मेट्रो की पहुंच अभी भी कई इलाकों तक सीमित है — यह संरचनात्मक खाई प्रतीकात्मक आह्वान से नहीं भरती। DMRC का एक्स्ट्रा ट्रिप बढ़ाना सकारात्मक है, पर असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार 'मेट्रो मंडे' को नीतिगत प्रोत्साहन — जैसे पार्किंग शुल्क वृद्धि या कॉर्पोरेट कम्यूट सब्सिडी — से जोड़ती है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मेट्रो मंडे' पहल क्या है?
'मेट्रो मंडे' दिल्ली सरकार की एक साप्ताहिक पहल है जिसमें मुख्यमंत्री और मंत्री हर सोमवार मेट्रो से कार्यालय पहुंचकर नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इसकी शुरुआत 18 मई 2026 को CM रेखा गुप्ता ने की।
इस पहल का दिल्ली के प्रदूषण और ट्रैफिक पर क्या असर होगा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, यदि नागरिक निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन अपनाएं तो प्रदूषण और ट्रैफिक जाम दोनों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। हालांकि, इसका दीर्घकालिक प्रभाव नागरिक भागीदारी की व्यापकता पर निर्भर करेगा।
DMRC ने 'मेट्रो मंडे' के लिए क्या तैयारी की है?
DMRC ने 17 मई को अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप 6 से बढ़ाकर 24 कर दिए और मेट्रो स्टेशन परिसरों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं। यह कदम बढ़ती यात्री संख्या को सुचारु रूप से संभालने के लिए उठाया गया है।
CM रेखा गुप्ता के साथ और कौन-कौन मेट्रो से आए?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा और मंत्री इंद्राज सिंह भी मेट्रो से कार्यालय पहुंचे। इसके अलावा कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भी उसी दिन मेट्रो से यात्रा की।
यह पहल किस बड़े अभियान का हिस्सा है?
'मेट्रो मंडे' को 'मेरा भारत, मेरा योगदान' अभियान के अंतर्गत शुरू किया गया है, जो सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, ईंधन संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारी पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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