सेबी प्रमुख तुहिन कांता पांडे की चेतावनी: एआई-आधारित साइबर खतरे भारतीय वित्तीय बाजारों की विश्वसनीयता के लिए सबसे बड़ा जोखिम

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सेबी प्रमुख तुहिन कांता पांडे की चेतावनी: एआई-आधारित साइबर खतरे भारतीय वित्तीय बाजारों की विश्वसनीयता के लिए सबसे बड़ा जोखिम

सारांश

सेबी प्रमुख तुहिन कांता पांडे ने साफ कहा — भारतीय बाजारों के लिए असली खतरा अब एल्गो ट्रेडिंग नहीं, एआई-सक्षम साइबर हमले हैं। थर्ड-पार्टी सॉफ्टवेयर की कमजोरियाँ और Mythos AI जैसे मॉडल नियामकीय रडार पर हैं। यह चेतावनी बाजार की विश्वसनीयता के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।

मुख्य बातें

सेबी चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने 18 मई 2025 को एआई-आधारित साइबर खतरों को भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया।
उनके अनुसार, एआई टूल्स को लेकर मुख्य चिंता बाजार हेरफेर या एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग नहीं , बल्कि साइबर सुरक्षा कमजोरियाँ हैं।
थर्ड-पार्टी वेंडर्स के सॉफ्टवेयर सिस्टम के लिए आक्रामक पैच मैनेजमेंट और निरंतर सुरक्षा ऑडिट की जरूरत पर जोर दिया गया।
कथित तौर पर Anthropic के Mythos AI मॉडल की ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउज़र कमजोरियाँ खुद पहचानने की क्षमता को लेकर नियामकीय चिंता बढ़ी है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी इससे पहले Mythos AI के संभावित खतरों पर चिंता जता चुकी हैं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने 18 मई 2025 को मुंबई में स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित साइबर सुरक्षा खतरे भारत के वित्तीय बाजारों के समक्ष उभरने वाले सबसे गंभीर जोखिमों में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने बाजार अवसंरचना में उपयोग होने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आक्रामक और निरंतर सुरक्षा उपाय अपनाने की आवश्यकता रेखांकित की।

मुख्य चिंता: बाजार हेरफेर नहीं, साइबर कमजोरियाँ

पांडे ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि एआई टूल्स को लेकर फिलहाल सबसे बड़ी चिंता बाजार में हेरफेर या एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा की कमजोरियाँ हैं। उनके अनुसार, वित्तीय बाजार बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर सिस्टम पर निर्भर हैं और यदि इन सिस्टम में कोई खामी रह जाती है तो उसका दुरुपयोग बाजार की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

पांडे ने कहा, 'हाल के समय में एआई टूल्स को लेकर ज्यादातर चिंताएं साइबर सुरक्षा से जुड़ी हैं। जैसा कि आप जानते हैं, बाजार काफी हद तक सॉफ्टवेयर सिस्टम पर निर्भर करते हैं। अगर साइबर सुरक्षा कमजोर पड़ती है या सॉफ्टवेयर में खामियां मिलती हैं, तो साइबर हमलों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे हमले सफल होने पर बाजार की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।'

थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

सेबी प्रमुख ने विशेष रूप से थर्ड-पार्टी वेंडर्स द्वारा उपलब्ध कराए गए सॉफ्टवेयर सिस्टम की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नियामकों और बाजार से जुड़े सभी पक्षों को मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, आक्रामक पैच मैनेजमेंट और लगातार कमजोरियों की जांच सुनिश्चित करनी होगी।

पांडे ने आगे कहा, 'हमें पहले से ही यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन भी सॉफ्टवेयर सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, वे पूरी तरह सुरक्षित हों। इसके लिए कमजोरियों की पहचान करने वाले पारंपरिक सुरक्षा टूल्स का व्यापक इस्तेमाल और समय-समय पर सुरक्षा अपडेट बेहद जरूरी हैं।'

वैश्विक संदर्भ: तेजी से विकसित होते एआई सिस्टम

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दुनिया भर में तेजी से विकसित हो रहे एआई सिस्टम को लेकर चिंता बढ़ रही है। माना जा रहा है कि ये सिस्टम सॉफ्टवेयर की कमजोरियों की स्वतः पहचान कर उनका फायदा उठाने में सक्षम होते जा रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में Anthropic के Mythos AI मॉडल को लेकर भी नियामकीय स्तर पर चिंता बढ़ी है, जो कथित तौर पर प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और इंटरनेट ब्राउज़र्स में मौजूद कमजोरियों की स्वयं पहचान कर उनका फायदा उठाने में सक्षम बताया जा रहा है।

वित्त मंत्री की पूर्व चिंता और व्यापक नीतिगत संदर्भ

इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी Mythos AI से जुड़े संभावित खतरों को लेकर चिंता जाहिर कर चुकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार और वित्तीय नियामक संस्थाएं एआई के नियमन और जिम्मेदार उपयोग को लेकर नीतिगत ढाँचा तैयार करने में जुटी हैं।

सेबी प्रमुख की यह चेतावनी स्पष्ट संकेत देती है कि भारतीय वित्तीय बाजारों की साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नियामकीय प्राथमिकता बन चुकी है। आने वाले समय में सेबी द्वारा इस दिशा में नए दिशानिर्देश या अनिवार्य ऑडिट की रूपरेखा सामने आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही अब सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बन रहा है। Mythos AI जैसे मॉडलों का उल्लेख यह दर्शाता है कि नियामक अब केवल सैद्धांतिक जोखिमों की नहीं, बल्कि ठोस और पहचाने गए खतरों की बात कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या सेबी के पास इस तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में वास्तविक समय में जवाब देने की क्षमता और नियामकीय उपकरण मौजूद हैं।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी प्रमुख ने एआई को लेकर क्या चेतावनी दी है?
सेबी चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि एआई-आधारित साइबर सुरक्षा खतरे भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए सबसे बड़े जोखिमों में से एक बन चुके हैं। उनके अनुसार, बाजार की सॉफ्टवेयर-निर्भरता को देखते हुए साइबर हमले सफल होने पर बाजार की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।
क्या एआई से बाजार में हेरफेर का खतरा है?
सेबी प्रमुख के अनुसार, फिलहाल एआई को लेकर प्राथमिक चिंता बाजार हेरफेर या एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि असली जोखिम सॉफ्टवेयर सिस्टम की साइबर सुरक्षा कमजोरियों से है, जिनका दुरुपयोग किया जा सकता है।
Mythos AI मॉडल को लेकर क्यों चिंता बढ़ी है?
कथित तौर पर Anthropic का Mythos AI मॉडल प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और इंटरनेट ब्राउज़र्स में मौजूद कमजोरियों की स्वयं पहचान कर उनका फायदा उठाने में सक्षम बताया जा रहा है। इसी को लेकर सेबी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोनों ने नियामकीय चिंता जाहिर की है।
सेबी ने बाजार प्रतिभागियों को क्या करने की सलाह दी है?
सेबी प्रमुख ने नियामकों और बाजार से जुड़े सभी पक्षों को मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, आक्रामक पैच मैनेजमेंट और निरंतर कमजोरियों की जांच सुनिश्चित करने की सलाह दी है। थर्ड-पार्टी वेंडर्स के सॉफ्टवेयर सिस्टम की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इससे पहले ही Mythos AI से जुड़े संभावित खतरों को लेकर चिंता जाहिर कर चुकी हैं। यह दर्शाता है कि एआई-आधारित साइबर जोखिम अब नीति-निर्माताओं के उच्चतम स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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