मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार नाकाम: कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी का मोहन यादव पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को 'नाकाम सरकार' करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार को ढाई साल से अधिक का समय बीत चुका है, फिर भी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की नौबत आना सरकार की विफलता का प्रमाण है।
मुख्य आरोप: परफॉर्मेंस टेस्ट नहीं, पोस्टमार्टम
चौधरी ने तीखे शब्दों में कहा कि सीएम हाउस में इस समय 'परफॉर्मेंस टेस्ट नहीं, बल्कि भाजपा सरकार की नाकामी का पोस्टमार्टम' चल रहा है। उनके अनुसार, ढाई साल बाद भी सरकार को अपने मंत्रियों की मैदानी मौजूदगी और कामकाज पर भरोसा नहीं रहा।
चौधरी ने सवाल उठाया कि यदि जनता को राहत मिली होती, किसान संतुष्ट होते, युवाओं को रोज़गार मिला होता और कानून-व्यवस्था मज़बूत होती, तो बंद कमरों में मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड माँगने की ज़रूरत क्यों पड़ती?
प्रशासनिक विफलता के उदाहरण
कांग्रेस नेता ने हाल की कई घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा में नकली कफ सिरप से हुई मौतें, इंदौर में दूषित पानी पीने से लोगों की जान जाना, एमवाय हॉस्पिटल में बच्चों की मौतें और जबलपुर क्रूज हादसा — ये सभी घटनाएँ प्रशासनिक विफलता की गवाही दे रही हैं।
चौधरी के अनुसार, इन सबके बावजूद सरकार की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि 'इमेज मैनेजमेंट और फोटोशूट' है।
समीक्षा बैठक का संदर्भ
उल्लेखनीय है कि इन दिनों मोहन यादव सरकार के मंत्रियों के कामकाज की आंतरिक समीक्षा का दौर चल रहा है। इस बैठक में सत्ता पक्ष और संगठन के प्रमुख नेता शामिल हैं। कांग्रेस ने इसी समीक्षा प्रक्रिया को अपने हमले का आधार बनाया है।
जनता परिणाम चाहती है: चौधरी
चौधरी ने स्पष्ट कहा कि मध्य प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री मोहन यादव से 'परफॉर्मेंस टेस्ट नहीं, परिणाम' माँग रही है। उनका कहना है कि सरकारी समीक्षाएँ तब तक अर्थहीन हैं जब तक ज़मीनी स्तर पर नागरिकों की स्थिति में ठोस सुधार न हो।