निफ्टी 50 रीबैलेंसिंग: बीएसई की एंट्री, विप्रो की विदाई संभव; ₹5,500 करोड़ से अधिक निवेश प्रवाह का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
एक्सिस कैपिटल की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, आगामी निफ्टी 50 इंडेक्स रीबैलेंसिंग में बीएसई लिमिटेड को शामिल किया जा सकता है, जबकि आईटी दिग्गज विप्रो लिमिटेड के बाहर होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इस संभावित बदलाव से करीब 65.7 करोड़ डॉलर (लगभग ₹5,500 करोड़) का निष्क्रिय निवेश प्रवाह आने का अनुमान है।
रीबैलेंसिंग की समयसीमा और प्रक्रिया
घरेलू ब्रोकरेज फर्म एक्सिस कैपिटल के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा इंडेक्स रीबैलेंसिंग की आधिकारिक घोषणा अगस्त 2026 के दूसरे पखवाड़े में होने की उम्मीद है। नए बदलाव 30 सितंबर 2026 से प्रभावी हो सकते हैं।
योग्यता का मूल्यांकन 1 फरवरी से 31 जुलाई 2026 तक के छह महीने के औसत आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। हालाँकि, ब्रोकरेज के मौजूदा अनुमान 15 मई 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं।
बीएसई की दावेदारी और विप्रो की स्थिति
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, बीएसई लिमिटेड का औसत फ्लोट मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (AFMC) फिलहाल विप्रो के AFMC से 1.5 गुना से अधिक है। इंडेक्स में बदलाव का नियम यही है — जब कोई योग्य कंपनी का AFMC इंडेक्स की सबसे छोटी कंपनी से 1.5 गुना अधिक हो जाए, तब अदला-बदली की जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब बीएसई के शेयरों में पिछले एक वर्ष में उल्लेखनीय तेज़ी देखी गई है, जिससे उसका बाज़ार पूंजीकरण तेज़ी से बढ़ा है। वहीं, विप्रो की बाज़ार हिस्सेदारी आईटी क्षेत्र में अपेक्षाकृत कमज़ोर रही है।
निफ्टी नेक्स्ट 50 में संभावित बदलाव
रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी नेक्स्ट 50 इंडेक्स में पाँच बदलाव संभव हैं। शामिल होने वाली संभावित कंपनियों में पॉलीकैब इंडिया, हिताची एनर्जी इंडिया, इंडसइंड बैंक और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के नाम सामने आए हैं।
वहीं, बाहर होने की संभावना वाली कंपनियों में इंडियन होटल्स कंपनी, आरईसी लिमिटेड, श्री सीमेंट, ज़ाइडस लाइफसाइंसेज़ और मैक्रोटेक डेवलपर्स के नाम हैं। निफ्टी बैंक इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान है।
निवेश प्रवाह और निकासी का अनुमान
एक्सिस कैपिटल ने यह अनुमान 45 अरब डॉलर की बेंचमार्क फंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के आधार पर लगाया है। यदि निफ्टी 50 में केवल एक कंपनी की अदला-बदली होती है, तो अनुमानित एकतरफा निष्क्रिय निवेश प्रवाह करीब 63.9 करोड़ डॉलर हो सकता है।
गौरतलब है कि इस रीबैलेंसिंग के कारण भारतीय शेयर बाज़ार से लगभग 22.5 करोड़ डॉलर की संभावित निकासी भी हो सकती है, जो उन कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना सकती है जो इंडेक्स से बाहर होंगी।
बाज़ार की मौजूदा स्थिति
18 मई 2026 को कारोबार के दौरान शेयर बाज़ार के प्रमुख सूचकांक शुरुआती गिरावट से उबरते हुए लगभग सपाट रहे। सेंसेक्स 77.05 अंक यानी 0.10% की मामूली बढ़त के साथ 75,315.04 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 6.45 अंक यानी 0.03% की बढ़त के साथ 23,649.95 पर क्लोज़ हुआ। दिन की शुरुआत में दोनों सूचकांक करीब 1% तक फिसल गए थे, लेकिन बाद में नुकसान की भरपाई कर ली गई।
अंतिम घोषणा अगस्त 2026 में आने की उम्मीद है, जिसके बाद निष्क्रिय फंडों में वास्तविक खरीद-बिक्री का सिलसिला शुरू होगा।