यूपी में औद्योगिक भूखंडों पर समयबद्ध उद्योग स्थापना अनिवार्य, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने दिए सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 मई 2025 को औद्योगिक भूखंडों पर उद्योग स्थापना में हो रही देरी के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने लखनऊ में आयोजित राज्यस्तरीय उद्योग बंधु समिति की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा सहित पूरे प्रदेश में आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर उत्पादन इकाइयाँ अवश्य स्थापित की जाएँ। देरी करने वाले निवेशकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए।
बैठक में क्या निर्देश दिए गए
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने कहा कि औद्योगिक भूखंड आवंटन का उद्देश्य केवल भूमि उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उस पर शीघ्र उत्पादन आरंभ कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी आवंटित भूखंडों पर प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और जिन परियोजनाओं पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है, उनसे जवाब-तलब किया जाए।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि निवेशकों को उद्योग स्थापना से जुड़ी समस्त अनुमतियाँ, आधारभूत सुविधाएँ और प्रशासनिक सहयोग समय पर उपलब्ध कराया जाए। गोयल ने कहा कि उद्योग स्थापना की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा नहीं आनी चाहिए और सभी विभाग आपसी समन्वय मज़बूत करते हुए लंबित मामलों का तय समय में निस्तारण करें।
निवेशक-अनुकूल माहौल पर ज़ोर
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से प्रदेश के निवेशक-अनुकूल वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे और समग्र औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से निवेश आकर्षित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से बड़े निवेश वादे भी जुटाए गए हैं। ऐसे में आवंटित भूखंडों पर वास्तविक उत्पादन सुनिश्चित करना सरकार की विश्वसनीयता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
अनुपालन सुधार और नियामक सरलीकरण
बैठक में भारत सरकार की 'विनियमन चरण-1' पहल के अंतर्गत सात विभागों और 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुपालन सरलीकरण सुधारों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इन्वेस्ट यूपी की ओर से राज्य और ज़िला स्तर पर बीआरएपी, डीबीआरएपी तथा विनियमन चरण-2 के रोडमैप से जुड़ी अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की गई।
अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे
बैठक में जल आवंटन, भूमि मानचित्रण में अतिक्रमण, मास्टर प्लान की विसंगतियों और पीएसपी परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन सभी विषयों पर संबंधित विभागों को समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
आने वाले हफ्तों में विभागीय समन्वय और परियोजना प्रगति की अगली समीक्षा के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि सरकार का यह सख्त रुख ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभावी सिद्ध होता है।