यूपी में औद्योगिक भूखंडों पर समयबद्ध उद्योग स्थापना अनिवार्य, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने दिए सख्त निर्देश

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यूपी में औद्योगिक भूखंडों पर समयबद्ध उद्योग स्थापना अनिवार्य, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने दिए सख्त निर्देश

सारांश

यूपी सरकार ने औद्योगिक भूखंडों पर उद्योग स्थापना में देरी बर्दाश्त न करने का संकेत दे दिया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने उद्योग बंधु समिति की बैठक में नोएडा-ग्रेटर नोएडा सहित पूरे प्रदेश में समयबद्ध उत्पादन शुरू कराने और देरी पर कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए।

मुख्य बातें

गोयल ने 18 मई 2025 को लखनऊ में राज्यस्तरीय उद्योग बंधु समिति की बैठक की अध्यक्षता की।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा सहित प्रदेशभर में आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर निर्धारित समय-सीमा में उद्योग स्थापना अनिवार्य की गई।
देरी करने वाले निवेशकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
भारत सरकार की 'विनियमन चरण-1' पहल के तहत 7 विभागों और 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में अनुपालन सुधारों की समीक्षा हुई।
इन्वेस्ट यूपी ने बीआरएपी, डीबीआरएपी और विनियमन चरण-2 रोडमैप की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 मई 2025 को औद्योगिक भूखंडों पर उद्योग स्थापना में हो रही देरी के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने लखनऊ में आयोजित राज्यस्तरीय उद्योग बंधु समिति की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा सहित पूरे प्रदेश में आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर उत्पादन इकाइयाँ अवश्य स्थापित की जाएँ। देरी करने वाले निवेशकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए।

बैठक में क्या निर्देश दिए गए

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने कहा कि औद्योगिक भूखंड आवंटन का उद्देश्य केवल भूमि उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उस पर शीघ्र उत्पादन आरंभ कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी आवंटित भूखंडों पर प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और जिन परियोजनाओं पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है, उनसे जवाब-तलब किया जाए।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि निवेशकों को उद्योग स्थापना से जुड़ी समस्त अनुमतियाँ, आधारभूत सुविधाएँ और प्रशासनिक सहयोग समय पर उपलब्ध कराया जाए। गोयल ने कहा कि उद्योग स्थापना की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा नहीं आनी चाहिए और सभी विभाग आपसी समन्वय मज़बूत करते हुए लंबित मामलों का तय समय में निस्तारण करें।

निवेशक-अनुकूल माहौल पर ज़ोर

मुख्य सचिव ने अधिकारियों से प्रदेश के निवेशक-अनुकूल वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे और समग्र औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से निवेश आकर्षित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से बड़े निवेश वादे भी जुटाए गए हैं। ऐसे में आवंटित भूखंडों पर वास्तविक उत्पादन सुनिश्चित करना सरकार की विश्वसनीयता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

अनुपालन सुधार और नियामक सरलीकरण

बैठक में भारत सरकार की 'विनियमन चरण-1' पहल के अंतर्गत सात विभागों और 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुपालन सरलीकरण सुधारों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इन्वेस्ट यूपी की ओर से राज्य और ज़िला स्तर पर बीआरएपी, डीबीआरएपी तथा विनियमन चरण-2 के रोडमैप से जुड़ी अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की गई।

अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे

बैठक में जल आवंटन, भूमि मानचित्रण में अतिक्रमण, मास्टर प्लान की विसंगतियों और पीएसपी परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन सभी विषयों पर संबंधित विभागों को समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

आने वाले हफ्तों में विभागीय समन्वय और परियोजना प्रगति की अगली समीक्षा के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि सरकार का यह सख्त रुख ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभावी सिद्ध होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या देरी की जड़ निवेशकों की अनिच्छा में है या प्रशासनिक अनुमतियों और आधारभूत सुविधाओं की धीमी आपूर्ति में। जब तक इस कारण-श्रृंखला की पड़ताल पारदर्शी तरीके से नहीं होती, तब तक 'कार्रवाई' का बोझ एकतरफा निवेशकों पर डालना न्यायसंगत नहीं होगा।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी सरकार ने औद्योगिक भूखंडों पर क्या सख्त कदम उठाए हैं?
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने 18 मई 2025 को निर्देश दिए कि प्रदेश में आवंटित सभी औद्योगिक भूखंडों पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर उत्पादन इकाइयाँ स्थापित की जाएँ। देरी करने वाले निवेशकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उद्योग बंधु समिति की बैठक में कौन-से मुद्दे उठाए गए?
बैठक में औद्योगिक भूखंडों पर समयबद्ध उद्योग स्थापना के साथ-साथ जल आवंटन, भूमि मानचित्रण में अतिक्रमण, मास्टर प्लान की विसंगतियों और पीएसपी परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। 'विनियमन चरण-1' के तहत 7 विभागों और 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में अनुपालन सुधारों की प्रगति भी समीक्षा में रही।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक भूखंडों पर क्या स्थिति है?
बैठक में नोएडा और ग्रेटर नोएडा को विशेष रूप से चिह्नित किया गया, जहाँ आवंटित भूखंडों पर उद्योग स्थापना में देरी की शिकायतें सामने आई हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इन क्षेत्रों में प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और रुकी हुई परियोजनाओं से जवाब-तलब किया जाए।
'विनियमन चरण-1' पहल क्या है और इसका उद्योगों पर क्या असर होगा?
भारत सरकार की 'विनियमन चरण-1' पहल के अंतर्गत 7 विभागों और 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उद्योगों को मिलने वाली अनुमतियों और नियामक मंज़ूरियों में लगने वाला समय घटाना है, जिससे नई इकाइयाँ जल्दी उत्पादन शुरू कर सकें।
इन्वेस्ट यूपी की बैठक में क्या प्रस्तुति दी गई?
इन्वेस्ट यूपी ने राज्य और ज़िला स्तर पर बीआरएपी, डीबीआरएपी और विनियमन चरण-2 के रोडमैप से जुड़ी अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की। यह प्रस्तुति प्रदेश में व्यापार सुगमता सुधारों की वर्तमान स्थिति और आगे की योजना को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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