मनास्लु फतह करने वाली श्रद्धा गुप्ता अब एवरेस्ट की राह पर, तीन साल में रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पर्वतारोही श्रद्धा गुप्ता इस समय माउंट एवरेस्ट अभियान पर हैं — और यह उनकी पर्वतारोहण यात्रा का अगला बड़ा पड़ाव है। इससे पहले वह दुनिया की आठवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट मनास्लु (8,163 मीटर) को फतह कर चुकी हैं, जो उनकी पहली 8,000 मीटर से ऊंची चोटी थी। महज तीन वर्षों में ट्रेकिंग से शुरू होकर दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों तक पहुंचने की उनकी यात्रा देश के उभरते पर्वतारोहण जगत में एक नई प्रेरणा बन गई है।
मनास्लु शिखर पर कब और कैसे पहुंचीं
श्रद्धा गुप्ता 26 सितंबर 2025 को सुबह 8 बजकर 6 मिनट पर मनास्लु के शिखर पर पहुंचीं। वह निर्मल पुरजा की एलीट एक्सपेड टीम के साथ थीं और उनके साथ एलीट गाइड तेनजी शेरपा भी मौजूद थे। मनास्लु उन 14 चोटियों में शामिल है जो 8,000 मीटर से अधिक ऊंची हैं और जिन्हें पर्वतारोहण की दुनिया में सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
इन चोटियों पर स्थित 'डेथ जोन' में ऑक्सीजन का स्तर इतना कम होता है कि मानव शरीर के लिए जीवित रहना भी कठिन हो जाता है। ऐसे में श्रद्धा की यह सफलता तकनीकी कौशल और मानसिक दृढ़ता दोनों का प्रमाण है।
तीन साल में तय किया लंबा सफर
श्रद्धा गुप्ता ने कोविड महामारी के बाद पर्वतारोहण की शुरुआत की — एक ऐसे समय में जब अधिकांश लोग घरों में बंद थे। उन्होंने पहले एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पूरा किया और फिर सात महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों ('सेवन समिट्स') में से तीन — माउंट किलिमंजारो, माउंट एल्ब्रस और अकोनकागुआ — पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की।
गौरतलब है कि अधिकांश गंभीर पर्वतारोही कम उम्र से ही प्रशिक्षण शुरू करते हैं। श्रद्धा ने यह यात्रा देर से शुरू की, लेकिन गति असाधारण रही। यह ऐसे समय में आया है जब भारत से महिला पर्वतारोहियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
पेशेवर जीवन और पर्वतारोहण का संतुलन
दुबई में रहने वाली श्रद्धा DBS बैंक में मध्य पूर्व के लिए कॉर्पोरेट बिजनेस का नेतृत्व करती हैं। एक व्यस्त पेशेवर जीवन के बावजूद उन्होंने उच्च-ऊंचाई पर्वतारोहण को न केवल अपनाया, बल्कि उसमें उल्लेखनीय सफलता भी हासिल की। उनकी कहानी उन कामकाजी पेशेवरों के लिए प्रेरणा है जो अपने जुनून को करियर की व्यस्तताओं के बीच जीवित रखना चाहते हैं।
अब एवरेस्ट पर निगाहें
मनास्लु की सफलता के बाद श्रद्धा गुप्ता अब माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) — दुनिया की सबसे ऊंची चोटी — पर चढ़ाई का प्रयास कर रही हैं। यदि वह सफल होती हैं, तो यह उनके तीन साल के पर्वतारोहण सफर का सबसे बड़ा मील का पत्थर होगा। उनकी यात्रा यह भी रेखांकित करती है कि दृढ़ संकल्प और सुनियोजित प्रशिक्षण से देर से शुरू की गई यात्रा भी ऊंचाइयों को छू सकती है।