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दिव्या सिंह: साइकिल से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचकर बनीं प्रेरणा

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दिव्या सिंह: साइकिल से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचकर बनीं प्रेरणा

सारांश

गोरखपुर की दिव्या सिंह ने साइकिल से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचकर नया इतिहास रचा है। उनकी यात्रा ने साबित किया है कि महिलाएं बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल कर सकती हैं। जानिए उनकी यात्रा के बारे में।

मुख्य बातें

दिव्या सिंह ने साइकिलिंग और ट्रैकिंग को अपने जुनून के रूप में अपनाया।
उन्होंने माउंट एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
उनकी कहानी ने लाखों युवतियों को प्रेरित किया है।
कठिनाइयों का सामना करने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकारी प्रयास जारी हैं।

गोरखपुर, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गोरखपुर की निवासी दिव्या सिंह ने साइकिल के माध्यम से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा पूरी की। समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि मैं दुनिया की दूसरी और भारत की पहली महिला हूं, जिसने साइकिल से इस अद्वितीय पहाड़ी पर स्थित बेस कैंप तक पहुंचने का साहस किया। माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 17,560 फीट है।

दिव्या ने कहा कि मैं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हूं, लेकिन मेरा जूनून साइकिलिंग और ट्रैकिंग भी है। मैंने इसे अपनी पहचान बना लिया है और इसी जुनून के चलते मैं बेस कैंप तक पहुंची। काठमांडू से एवरेस्ट बेस कैंप की दूरी लगभग 700 किमी है, और वहां पहुंचने में मुझे 14 दिन लगे। मेरी यात्रा 16 मार्च को काठमांडू से शुरू हुई थी।

उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया कि बारिश और बर्फबारी काफी अधिक थी। तापमान -20 से -25 डिग्री सेल्सियस था। बेस कैंप पहुंचने वाले दिन मौसम अच्छा था, और उस दिन का तापमान -12 डिग्री सेल्सियस था। उन्होंने यह भी बताया कि पहाड़ों पर एक समय के बाद हवा की घनत्व कम हो जाती है, जिससे 50 प्रतिशत ऑक्सीजन ही उपलब्ध होता है, जिससे शारीरिक समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इस दौरान उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।

दिव्या सिंह की यह उपलब्धि भारतीय महिलाओं के लिए एडवेंचर स्पोर्ट्स और आत्मविश्वास का एक नया उदाहरण बन गई है। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और यह लाखों युवतियों को प्रेरित कर रही है। उन्होंने साबित किया है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाएं भी बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकती हैं।

पिछले महीने केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया था। उन्होंने महिलाओं की फिटनेस और साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कोलकाता में फिट इंडिया पिंक साइक्लोथॉन में भी भाग लिया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय महिलाओं के लिए एक नई प्रेरणा भी है। इस प्रकार की उपलब्धियां हमें यह सिखाती हैं कि कठिनाइयों के बावजूद, लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिव्या सिंह ने कब और कहाँ से अपनी यात्रा शुरू की?
दिव्या सिंह ने अपनी यात्रा 16 मार्च को काठमांडू से शुरू की।
बेस कैंप तक पहुँचने में उन्हें कितना समय लगा?
उन्हें बेस कैंप तक पहुँचने में 14 दिन लगे।
दिव्या सिंह की यात्रा के दौरान मौसम कैसा था?
यात्रा के दौरान बारिश और बर्फबारी का सामना करना पड़ा, तापमान माइनस 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तक गया।
दिव्या सिंह की उपलब्धि का क्या महत्व है?
उनकी उपलब्धि भारतीय महिलाओं में एडवेंचर स्पोर्ट्स और आत्मविश्वास का नया उदाहरण है।
केंद्रीय मंत्री ने महिलाओं के लिए क्या किया?
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने महिलाओं की फिटनेस और साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम में भाग लिया।
राष्ट्र प्रेस
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