क्या यमुनानगर के दुष्यंत जौहर ने बिना गाइड के एवरेस्ट बेस कैंप तक का सफर पूरा किया?
सारांश
Key Takeaways
- दुष्यंत जौहर ने बिना गाइड के एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा की।
- उन्होंने 11 दिनों में 5,364 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा।
- यह यात्रा 153 किलोमीटर लंबी थी।
- दुष्यंत का सपना 8,000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना है।
- वह यूपीएससी की तैयारी भी कर रहे हैं।
यमुनानगर, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 1984 में बछेंद्री पाल ने पहला भारतीय महिला बनकर एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की थी, और उसके बाद कई अन्य लोगों ने इस उपलब्धि में अपना नाम दर्ज कराया। हाल ही में, यमुनानगर के 27 वर्षीय युवक दुष्यंत जौहर ने बिना किसी गाइड और सहायता के एक साथी के साथ मिलकर यह सफल यात्रा की।
दुष्यंत जौहर, यमुनानगर पुलिस स्पेशल सेल के इंचार्ज जगदीश बिश्नोई के पुत्र हैं। उन्होंने एक अन्य युवक के साथ मिलकर 5,364 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचने का कठिन सफर तय किया। इस यात्रा की कुल दूरी लगभग 153 किलोमीटर थी, जिसे दोनों ने 11 दिनों में पूरा किया। इस दौरान 8 दिन चढ़ाई में और 3 दिन लौटने में लगे। कठिनाईयों के बावजूद, दुष्यंत का हौसला कभी नहीं टूटा।
यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने दुष्यंत की इस उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दीं, यह कहते हुए कि ऐसी उपलब्धियां युवाओं के लिए प्रेरणा बनती हैं।
राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में, दुष्यंत ने बताया कि खेल हमेशा से उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा है। वह पहले स्टेट साइकिलिंग चैंपियन रह चुके हैं और कई मैराथन में भाग लेकर जीत हासिल कर चुके हैं। पिछले वर्ष, उन्होंने नेपाल का 90 किलोमीटर लंबा कठिन ट्रैक भी सफलतापूर्वक पूरा किया था।
दुष्यंत ने बताया कि 5,364 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना आसान नहीं था। ऑक्सीजन की कमी, ठंड और निरंतर चलना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन रोमांच और जुनून ने हर मुश्किल को आसान बना दिया। खास बात यह है कि उन्होंने यह सफर बिना किसी गाइड और तकनीकी सहायता के पूरा किया।
अपनी आगे की योजनाओं के बारे में, दुष्यंत ने कहा कि उनका सपना 8,000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने का है। इसके साथ ही, वह यूपीएससी की तैयारी भी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में देश और समाज की सेवा कर सकें।
अपने बेटे की इस उपलब्धि पर पिता जगदीश बिश्नोई और मां रामकली ने गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दुष्यंत की सफलता से अन्य बच्चों को प्रेरणा लेनी चाहिए और युवाओं से नशे से दूर रहने, खेलों से जुड़ने और मेहनत के रास्ते पर चलने की अपील की।